सोशल पर वायरल : दिक्कत यह नहीं है कि दाल महंगी है, दिक्कत यह है कि किसी की गल नहीं रही

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सोशल पर वायरल में आज हम Whatsapp से प्राप्त नीचे दिया गया सन्देश देशवासियों तक पहुँचाना चाहते हैं. आप सहमत हैं तो इसे आगे शेयर करें और देशवासियों के इस विश्वास और हौसले को बुलंद करें. अच्छे दिनों ने भारत माँ के दरवाज़े पर दस्तक दे दी है, बस अब आप दरवाज़े के साथ आँखें भी खोलें.

मेरे तो 15 लाख कब के वसूल हो चुके हैं, कैसे, आइये बताता हूँ. 1. जब जाकिर नाइक देश छोड़ कर भागा, और उसकी करोड़ों की संपत्ति जप्त कर ली गयी जो देश के काम आएगी. 2. जब नोटबन्दी से त्रस्त अलगाववादियों के 500 और हजार के करोड़ों नोट कागज के टुकड़े बनकर रह गए. दाऊद के financer ने टावर से कूदकर आत्महत्या कर ली. 3. जब आशाराम और रामपाल जैसे फ़र्ज़ी बाबा सलाखों के पीछे दिखे. 4. जब राम रहीम कनाडा में एयरपोर्ट खरीदकर वहां बसने की तैयारी में यहाँ से निकलने ही वाला था. उसे दूसरा माल्या बनने से रोक लिया गया.

5. जब दाऊद की 35000 करोड़ की दुबई में और 42000 करोड़ की सम्पत्ति लन्दन में जप्त कर ली गयी. 6. जब पहली बार हिम्मत दिखाकर NIA ने अलगाववादियों को पाक से मिलने वाले फंड के सबूतों के साथ धर दबोचना शुरू किया. 7. जब आतंकवादियों की लाशों का अम्बार लगने लग गया. 8. जब मांस कारोबारी मोईन कुरैशी जेल में डाला गया. 9. जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को रिहा किया गया. 10. जब देशभक्त कर्नल पुरोहित आज़ाद हो गए.

11. जब विदेशी चंदे से अराजकता फैला रहे मिशनरीज और NGO पर नकेल कसी गयी. 12. जब वर्षों से भारत में रह रहे रोहिंगया मुसलमानो को बाहर निकालने की आवाज उठाई गई. 13. जब तीन तलाक़ और हलाला जैसी मुस्लिम समाज की कुरीतियों सरकार द्वारा ही विरोध किया जाने लगा. 14. जब प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास में इफ्तार दावत की जगह नवरात्रि की पूजा की जाने लगी. 15. जब डोकलाम जैसी महत्वपूर्ण जगह पर चीन युद्ध की धमकी देते देते खुद पीछे हटा और थूककर चाटने लगा.

इन 15 उपलब्धियों के अलावा 115 गिनाई जा सकती हैं. घोटाला एक भी नहीं. वाजपेयीजी के जमाने मे भी कोई राजनैतिक या आर्थिक घोटाला नहीं हुआ था. है तो और भी बहुत कुछ. पर मेरे तो 15 लाख इतने में ही वसूल हो गए और आगे जो देश को मिलेगा वो बोनस होगा.

30 का पेट्रोल सरकार 70 में क्यों बेचती है, ऐसा पूछने वाले एक बार ये भी तो पूछे कि …..
16 रूपये में गेहूं खरीदकर सरकार 2 रूपये में क्यों बेचती है?
50 रूपये का केरोसिन 15 रूपये में क्यों बेचती है?
40 रूपये की शक्कर 26 में क्यों बेचती है?
25 रूपये का चावल खरीदकर 1 रुपये में क्यों बांटती है?
लाखों रुपये टीचरो को तनख्वाह देकर बच्चो को मुफ्त क्यों पढ़वाती है? 6 करोड़ शौचालय मुफ्त में क्यों बनवाती है? 3 करोड़ गैस चूल्हे मुफ्त में क्यों बाटती है?

ये भी पूछो भाई दरअसल अपने बच्चों को 15 kmpl की माइलेज देनेवाली 2-2 लाख की महंगी bike वाले ही अक्सर ऐसे सवाल करते हैं.
गुजरात के मोहनदास करमचन्द गांधी राष्ट्र के पिता हो सकते हैं. जवाहर लाल नेहरू सबके चाचा हो सकते हैं. मायावती सबकी बहन हो सकती है. ममता बनर्जी सबकी दीदी हो सकती है. जयललिता सबकी अम्मा हो सकती है. सोनिया गांधी देश की बहू हो सकती है. केवल नरेंद्र मोदी इस देश का बेटा नहीं हो सकता. इतनी नफरत क्यों है भाई!!

दिक्कत यह नहीं है कि दाल महंगी हो गयी है, दिक्कत यह है कि किसी की गल नही रही है.

– Whatsapp से सोशल पर वायरल

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