BHU : अपराधी का कोई धर्म, जाति, नस्ल और लिंग नहीं होता, गिरा के मारो

1. मैं इधर जंजैहली शिकारी माता में बाइकिंग कर रहा हूँ और उधर Varanasi में BHU में भसड़ मची है. बताया जा रहा है कि किसी लड़के ने किसी लड़की को रात के अंधेरे में छेड़ दिया. एक तो ये छेड़छाड़ का मामला बहुत संदिग्ध है. जब से ये निर्भया कांड के बाद रेप पर बहुत सख्त कानून बना है, छेड़छाड़ बहुत संदिग्ध मुद्दा बन गया है.

इस कारण सरकार को चाहिए कि छेड़छाड़, molestation और rape की डिग्री तय कर दे. क्योंकि निर्भया कानून में बाद तो गलत निगाह, गलत नीयत से देखना तक अपराध घोषित हो चुका है. इसलिए BHU में किस लेवल की छेड़छाड़ हुई, कोई नहीं जानता.

गलत निगाह-नीयत से देखा, आंख मारी, देख के सीटी मारी, फब्तियां कसी, चिकोटी बीन ली, पकड़ लिया, groping, kiss कर दिया, कपड़े फाड़ दिए, बलात्कार का प्रयास किया, actully penetrative rape किया, gang rape किया… ये इतनी degrees हैं छेड़छाड़ और molestation rape की.

इसके अलावा कुछ अन्य rape भी होते हैं.

मसलन 3 साल लिव-इन में रहने के बाद पता चलता है कि मेरे साथ तो rape हो रहा था. भाग के शादी कर ली, घर वाले खोज-खाज कर ले आये और पतिदेव पर rape और अपहरण का मुक़दमा लिखा दिया. इसके अलावा एक Honey Trap वाला rape… casting couch वाला rape…

अभी कुछ दिन पहले बड़के मी लॉर्ड तो शादी में भी marital rape पर सरकार से हलफनामा मांग रहे थे. मने बड़के मी लॉर्ड की चली तो किसी भी सिरिमान जी को उनकी सिरीमती जी Marital Rape में टाँग देंगी.

अब कोई ज्ञानी, ध्यानी, महापुरुष बता सकता है क्या कि BHU में इनमे से कौन सा rape / gang rape / मोलेस्टेशन / छेड़छाड़ / या दृष्टि rape / आंख मारी / फब्ती कसी / जबर्दस्ती चुम्मा ले लिया / गाल काट लिया… क्या आखिर हुआ क्या ?

लड़की ने विश्वविद्यालय प्रशासन या पुलिस को कितना समय दिया rapist को पकड़ने के लिए? घटना के कितने घंटे या कितने दिन बाद लड़कियां धरने पे बैठ गईं. Rapist BHU का कोई छात्र ही तो होगा? छात्र क्या खुद के खिलाफ ही आंदोलन रत हैं ?

2. यूनिवर्सिटी कैंपस में धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, लाठी चार्ज, पुलिसिया कार्यवाही, रात में हॉस्टल में घुस के पीटना, हॉस्टल को खाली कराना, पूरे कैम्पस को खाली करा लेना आम बात है. इस से पहले BHU में ये एक हज़ार बार हुआ है.

छेड़छाड़ का पूरा मामला ही प्रथम दृष्टया फ़र्ज़ी लगता है. अगर सच मान भी लिया जाए कि सचमुच छेड़छाड़ हुई तो भी इतने बड़े कैंपस में जहां हज़ारों लोग रहते हैं, हज़ारों बाहर से बेरोकटोक आते जाते हैं, हज़ारों लोग नौकरी करते हैं, वहां किसी गुमनाम अपराधी को खोज लेने में समय लगेगा.

वो समय यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस को नहीं दिया गया, और चूंकि PM मोदी शहर में थे इसलिए धरना लगा दिया गया.

मामला पूरी तरह फ़र्ज़ी है. BHU के जिन लड़कों को ज़्यादा तकलीफ हो रही है वो पहले अपना रिकॉर्ड सुधारें. छेड़छाड़ के आरोपी आप हैं. यूनिवर्सिटी में माहौल सुधारना, लड़कियों की इज़्ज़त करना आपका काम है. पुलिस उपद्रवी छात्रों को पहले भी पीटती आई है, आगे भी पीटेगी. अभी कम पीटा है… और पीटना चाहिए.

3. आज के युग में लड़का लड़की की बात करना बेमानी है. सब बराबर हैं. ये बराबरी भी तुमने लड़ के ही हासिल की है. जहां ये बराबरी नहीं मिलती वहां तुम इसके लिए लड़ती हो.

तुम्हें हर चीज़ में लड़कों से बराबरी चाहिए. रात 2 बजे तक सड़कों पर घूमने की बराबरी चाहिये, कपड़े पहनने, दारू पीने की बराबरी चाहिए, why only the boys should have all the pleasure… ये तुम्हारा सूत्र है.

पेट्रोल बम तुम फेंक ही रही हो, पुलिस पर हमला कर ही रही हो, आगज़नी-तोड़फोड़ कर ही रही हो, धरना-प्रदर्शन कर ही रही हो, तो फिर लड़कों की तरह पुलिस से पिटने में भी बराबरी करो न?

अपराधी का कोई धर्म, जाति, नस्ल और लिंग नहीं होता… गिरा के मारो. जैसे यूनिवर्सिटी में लड़कों को बेरहमी से पीटते हो, वैसे ही पीटो. No gender discrimination…

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