BHU में 15 साल से बंद है राजनीति, क्रिमिनल बनने से बच गए जाने कितने बच्चे

BHU की सबसे बड़ी समस्या ये है कि यहाँ पिछले 15 साल से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए. अब जब चुनाव नहीं होते तो अराजकता, गुंडागर्दी, गिरोहबाज़ी, माफियागिरी, ब्लैकमेल, extortion, अपहरण, चोरी, डकैती जैसी बहुत सी सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों पर लगाम लग जाती है.

आपने कभी किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव देखा है? छात्र संघ के चुनाव से पहले Campus और शहर में किस कदर माहौल खराब होता है, ये देखा है?

यूपी का एक बहुत कुख्यात माफिया हुआ है बबलू श्रीवास्तव. उस आदमी को श्रेय जाता है कि उसने अपहरण के धंधे को इस देश में कॉर्पोरेट स्टाइल में करना सिखाया. फिरौती वसूलने का सिस्टम बदला. वो पहला आदमी था जिसने अपहरण के धंधे को अपराधियों के लिए सुरक्षित बनाया. क्योंकि इस से पहले 99% किडनैपर फिरौती वसूलते समय ही पैसा पकड़ते धरा जाते थे.

बबलू श्रीवास्तव ने डॉलर और पौंड में फिरौती वसूलनी शुरू की. फिरौती का पैसा दुबई, सिंगापुर और हांगकांग में वसूलना सिखाया. फिरौती और अपहरण के धंधे में स्पेशलाइज़ेशन और सुपर स्पेशलाइज़ेशन शुरू किया. अपहरण के धंधे में अलग-अलग विभाग बनाये.

एक विभाग रिसर्च करके समाज में अपहरण करने लायक मोटी मालदार आसामी चुनता. उसका काम-धंधा, उसकी Net worth, उसकी औकात, उसकी बैलेंस शीट पता लगा के उसकी कीमत तय करता, कि इस से इतने करोड़ तक वसूला जा सकता है.

दूसरा विभाग ये तय करता कि उस शिकार के घर में किसको किडनैप करना है. किस व्यक्ति को किडनैप कर सबसे ज़्यादा पैसा वसूल सकते हैं. एक बार उसके गिरोह ने कलकत्ते में एक व्यापारी की बीबी उठा ली. वो खुद ही उस से पिंड छुड़ाना चाहता था. उसने कहा, मार दो चाहे रख लो, फूटी कौड़ी नहीं दी. मजबूरन फ्री में छोड़नी पड़ी. तब बबलू श्रीवास्तव ने ये विभाग बनाया अपने धंधे में कि शिकार की सबसे प्रिय चीज़ उठाओ.

अगला विभाग अपहरण करता था फील्ड में और सम्हाल के रखने के लिए अगले विभाग को थमा देता. इसका काम होता पकड़ को तब तक सुरक्षित रखना जब तक कि फिरौती वसूल न हो जाये.

अगला विभाग है Negotiation… सेठ से मामला दाम-दोगानी तय करना. इतना नहीं इतना. एक बार इन्होंने दिल्ली के एक ज्वैलर की लड़की उठा ली. फिरौती तय हुई कोई 20 करोड़. लड़की बोली, अबे तुम सब एकदम्मे गधे हो का बे? काम से कम 100 करोड़ लो पर उसमें से 50 मेरे…

फिर अगला विभाग कहीं विदेश में पैसे की डिलीवरी लेता. बबलू श्रीवास्तव अपने इस नेटवर्क के लिए टैलेंट हंट और recruitment कैसे करता था, जानते हैं?

यूपी बिहार की यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव लड़ने, जीतने, हारने वाले लड़कों को चुनता था. उसका बाकायदा HR deptt था जो बाकायदे छात्र राजनीति को फंड करता था. उसके गिरोह में एक से एक स्मार्ट लड़कियां भी थीं जो उसने सब इसी तरह कैंपस आंदोलनों से ही छाँटी थी.

ये सारी जानकारी उसने स्वयं अपनी किताब ‘अधूरा ख्वाब’ में लिखी है. और इसके अलावा मुझे उसके गिरोह के एक बड़े नामी शूटर ने दी थी, जो किसी ज़माने में एक नामी होनहार प्लेयर था. बाद में एनकाउंटर में मारा गया.

BHU में 15 साल से राजनीति बंद है. जाने कितने बच्चे क्रिमिनल बनने से बच गए.

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