सौभाग्य योजना : नरेन्द्र मोदी ने चल दिया अपना पहला ब्रह्मास्त्र

देश में बिना बिजली के घरों में रह रहे 4 करोड़ महा गरीब परिवारों के घरों में 5 LED बल्ब, एक पंखे समेत मुफ्त बिजली देने की सौभाग्य योजना ने 2019 में मोदी विरोधियों के सफाये के महाभियान की शुरुआत आज से कर दी.

याद करिये कि यूपी चुनाव से पहले के केवल 6 महीनों में प्रदेश के सबसे गरीब 55 लाख परिवारों को उज्ज्वला सरीखी मुफ्त गैस चूल्हा और कनेक्शन देने वाली जनकल्याणकारी योजना. इस योजना के द्वारा उनके घरों, उनकी ज़िन्दगी से धुएं के काले बादल हमेशा के लिए दूर करने का इतना धमाकेदार उपहार/ पुरस्कार गरीब आम जनता ने नरेन्द्र मोदी को दिया था.

उस धमाकेदार उपहार/ पुरस्कार के धमाकों से साइकिल, हाथी, पंजा इतनी बुरी तरह घायल हुए थे कि यूपी में साइकिल आज खुद व्हीलचेयर के सहारे चल रही है. हाथी बैसाखियों के सहारे जैसे तैसे घिसट रहा है. पंजा सियासी ICU के स्ट्रेचर पर इस तरह बेहोश लेटा है कि अंतर करना मुश्किल हो रहा है कि स्ट्रेचर पर पंजा लेटा है या अर्थी पर मुर्दा लेटा है.

विपक्षियों पर भारी पड़ेगी सौभाग्य योजना
ध्यान रहे कि 2014 में भाजपा को 17 करोड़ 16 लाख 60 हज़ार 230 वोट मिले थे. भारत में एक परिवार में वोटरों की औसत संख्या लगभग 4.5 से 5 के बीच है. सौभाग्य योजना में जिन 4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली मिलेगी, उन में यह औसत इससे कहीं ज्यादा होता है.

इसका मतलब यह हुआ कि लगभग 20 से 22 करोड़ वो लोग जिनको आज तक बिजली का सुख नसीब ही नहीं हुआ था उनको यह सुविधा नि:शुल्क मिलेगी. अनुमान लगा लीजिये कि इन 20-22 करोड़ लोगों में से अधिकांश लोग 2019 में अपना वोट किसको देंगे.

और यही लोग अपनी ज़िंदगी से अंधेरा हमेशा के लिए दूर करने के लिए 2019 में नरेन्द्र मोदी को इतना धमाकेदार उपहार/ पुरस्कार देंगे कि साइकिल, हाथी, पंजा, लालटेन वगैरह व्हीलचेयर, बैसाखी, स्ट्रेचर का साथ छोड़कर चिता में लेटे नज़र आएंगे.

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