प्रकृति का न्याय : कोठारी बंधुओं की हत्या तो याद है ना मुलायम सिंह जी!

Kothari Brothers

मुलायम सिंह यादव ने आज अपनी छिपी हुई राजनीतिक तकलीफ पूरे देश को बताई. मुलायम सिंह ने कहा कि अखिलेश ने उनको धोखा दिया. केवल 3 माह के लिए पार्टी अध्यक्ष का पद मांगकर पूरे दल पर अपना नियंत्रण कर लिया. उन्होंने अखिलेश से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखने से साफ इंकार कर दिया. मुलायम सिंह ने कहा कि जो अपने पिता का नहीं हो सकता वो किसी का नहीं हो सकता!

1989-90 में जब रामजन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था, पूरे देश के हिंदू राम मंदिर निर्माण के लिये आंदोलनरत थे और अयोध्या में कारसेवा चल रही थी तब मुलायम सिंह ने ही राम भक्तों पर खुलेआम गोलियां चलवाकर सैकड़ों कारसेवकों की हत्या करवाई थी. जिनमें से बंगाल के कोठारी बंधु प्रमुख थे.

रामकुमार कोठारी और शरदकुमार कोठारी-दोनों सगे भाई थे. 30 अक्तूबर, 1990 को अयोध्या में हुई कारसेवा में इन दोनों भाइयों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था. फिर 2 नवम्बर को भी कारसेवा हुई, जिसमें कोठारी बंधु भी शामिल थे. पर तत्कालीन मुलायम सिंह की सरकार ने पुलिस को निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाने की अनुमति दे दी. इसके बाद उप्र की पुलिस ने सैकड़ों कारसेवकों को घर से निकाल-निकाल कर गोली मार दी.

इसी क्रम में हैवान बनी पुलिस ने पहले छोटे भाई शरद कुमार को घसीटते हुए कमरे से बाहर किया और सिर पर बंदूक तान दी, यह देखकर बड़ा भाई रामकुमार बाहर निकला और पुलिस वालों से बोला-“मेरे छोटे भाई को छोड़ दो, मारना ही है तो मुझे मार दो.”

किंतु सेकुलरिज्म से ग्रस्त पुलिसकर्मियों पर इस करुण पुकार का कोई असर नहीं पड़ा. उन्होंने दोनों भाइयों को गोली मार दी. अपने धर्म और भगवान श्रीराम के लिए बलिदान होने वाले इन दोनों भाइयों की मृत देह जब कोलकाता पहुंची तो उन्हें देखने के लिए पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया था. हर कोई उनके पिता श्री हीरालाल कोठारी और माता श्रीमती सुमित्रादेवी कोठारी को सांत्वना दे रहा था. किंतु अपने दो जवान पुत्रों को खोने के बावजदू कोठारी दम्पति में दु:ख का भाव लेशमात्र नहीं दिखा. उनका कहना था कि उनके दोनों पुत्र प्रभु राम के काज के लिए शहीद हुए हैं. और उनको अपने पुत्रो के बलिदान होनें पर गर्व है!

कोठारी बंधुओं के माता पिता को अपने पुत्रों के बलिदान होने पर भी किसी प्रकार का अफसोस नहीं था, क्योकि उनके लिये भगवान राम और उनकी जन्मभूमि की मुक्ति ही सब कुछ थी. दूसरी ओर मुलायम सिंह ने केवल उप्र विधानसभा में मिली करारी हार से ही कुंठित होकर अपने पुत्र से सारे सम्बन्ध तोड़ लिये. और अखिलेश तो पहले ही सत्ता के लिये अपने पिता को धोखा दे चुका है!

मुलायम सिंह को अब बुढ़ापे में शायद ईश्वर और प्रकृति के न्याय का स्मरण हो रहा है. मुलायम को ये भी ध्यान रखना चाहिये कि जो राम का नहीं होता, उसका भी कोई नहीं होता. जो राम और उसके भक्तों को धोखा देता है. अंत में उसे भी धोखा ही खाना पड़ता है. यही प्रकृति का न्याय है!

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