भाषा का दुरुपयोग : हमारी अगली पीढ़ियाँ ‘बाबा’ या ‘साधु’ अर्थात ठग पढ़ेंगी!

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भाषा का दुरुपयोग

भाषा का दुरुपयोग – कुछ शब्द प्रतीक बहुत गलत हैं और ऐसे में उनके लगातार प्रयोग होने के कारण वे एक-दूसरे के पर्यायवाची बन जाते हैं. आजकल धड़ल्ले से हर गलत व्यक्ति को जो किसी भी प्रकार से धार्मिक सोच विचार से जुड़ा है – बाबा कहने का प्रचलन है. कुछ वर्षों बाद हमारी अगली पीढ़ियाँ “बाबा” या “साधु” अर्थात ठग पढ़ेंगी.

किसी राजनैतिक विचारधारा का समर्थक “भक्त” कहा जा रहा है. भविष्य में भक्त का अर्थ बिगड़ जाएगा और उस समय ईश्वर को मानने वाले शायद कुछ और कहलाएँ.

किसी विशेष विचारधारा की समर्थक स्त्रियों को “बिंदी ब्रिगेड” नाम से जाना जाता है आज. लेकिन बिंदी तो हम, हमारी माँएं – हिंदू स्त्रियाँ हमेशा से ही लगाती आईं हैं. फिर इस नाम का औचित्य? क्या वामपंथी विचारधारा वाली स्त्रियों को इन्हीं शब्दों में नहीं बताया जा सकता?

यह शब्दों एवं भाषा की क्रमागत उन्नति नहीं है और न ही इसमें कोई भलाई बल्कि अवनति ही है. हम यदि भाषा को सुसंस्कृत नहीं कर सकते तो भला बिगाड़ने का क्या अधिकार है हमें? अच्छे अच्छे पढ़े-लिखे और सम्मानितों को जब भाषा का गलत प्रयोग करते देखती हूँ तो मन व्यथित हो उठता है. मुझे इस तरह के शब्द प्रयोग पर कड़ी आपत्ति है.

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वर्तमान में सभी 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है. 2010 में गुजरात उच्च न्यायालय ने भी सभी भाषाओं को समान अधिकार के साथ रखने की बात की थी. हालांकि न्यायालयों और कई स्थानों में केवल अंग्रेजी भाषा को ही जगह दिया गया है. ऐसी हालत में आज राजभाषा दिवस पर लोगों की हिंदी प्रशस्ति भरे लेख पढ़ कर मैं सोच में पड़ गई हूँ कि मैं क्यों नहीं कुछ गुणगान कर पा रही. . . लज्जा का विषय है यह मेरे लिए, सचमुच !!Read More… हिंदी को प्रत्येक दिन शुभकामनाएँ और प्रणाम

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