केजरीवाल अपना रहे मानहानि केस को लटकाने के हथकंडे, जेटली का आरोप

नई दिल्ली. अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 10 करोड़ रूपए के मानहानि के मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को हाई कोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जानबूझ कर देर करने के हथकंडे अपना कर सुनवाई को टालने का प्रयास कर रहे हैं.

दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जेटली ने दिल्ली हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री सहित ‘आप’ नेता राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, संजय सिंह, आशुतोष व दीपक बाजपेयी के खिलाफ 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा किया है.

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अरविंद केजरीवाल ने याचिका लगाकर वर्ष 1999 से 2014 तक के डीडीसीए की मीटिंग के मिनट्स समन कर मंगवाने की मांग की थी. इस अवधि के दौरान जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे.

केजरीवाल के वकील ने कहा कि जब वित्त मंत्री ने डीडीसीए मे किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया ही नहीं है तो फिर उन्हें मीटिंग के मिनट्स मंगवाने में आपत्ति क्यों हो रही है. 31 अक्टूबर को रजिस्ट्रार जनरल इस याचिका पर अपना फैसला सुना सकते हैं.

जेटली ने डीडीसीए में घोटाले के आरोप लगाने पर अरविंद केजरीवाल, राघव चड्ढा के अलावा कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था. इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी को बतौर आरोपी समन जारी किए थे. बाद में आरोपियों ने कोर्ट से जमानत ले ली थी. इसके अलावा अरूण जेटली ने दिल्ली हाईकोर्ट में दस करोड़ रुपये के सिविल मानहानि का मामला भी दाखिल कराया है.

ट्वीट-री-ट्वीट मामले में केजरीवाल और चड्ढा पर चलता रहेगा केस

दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा की याचिका पर अपना फैसला सुनाया दिया है. यह मामला केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर किए गए ट्वीट को रीट्वीट करने का है, जिसके लिए जेटली ने दिल्‍ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप नेताओं पर मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है.

इसको निरस्‍त करने के लिए राघव ने पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. राघव चड्ढा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील की गई थी कि उन पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा सिर्फ इसलिए चल रहा है क्योंकि उन्होंने केजरीवाल के कथित तौर पर आपत्तिजनक ट्वीट को रिट्वीट किया था. उन्होंने कहा कि सिर्फ रिट्वीट करने के आधार पर आपराधिक मानहानि का मामला नहीं बनता, ये आईटी एक्ट के दायरे में आएगा.

इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सोशल मीडिया के तहत आने वाली किन चीजों को दोबारा आगे किया जा सकता है या नहीं. इसके अलावा किसी ऐसे ट्वीट पर जिसको लेकर पहले से ही मामला कोर्ट में विचारधीन हो, को रीट्वीट किया जाना चाहिए या नहीं.

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