‘भारत का रूपांतरण’ : गली-गली तेरी लौ जली

‘अन्यायी शासक के अत्याचारों से कांपती प्रजा को जब सच्चे जन-नायक की झलक भर मिलती है तो क्षण भर में सर्वस्व बदल जाता है. सेना हुंकार भरने लगती है, प्रजा का रुदन उल्लास बन जाता है, नर्तक राज-स्तुति छोड़ राष्ट्रभक्ति में झूमने लगते हैं, गायकों के गले मे वीर रस उतर आता है.’

2012 तक भारत सिर झुकाए निराश भाव से जगत के पीछे-पीछे चल रहा था. 2012 से 2014 का समय संपूर्ण भारत के लिए रूपांतरण का रहा. नई सरकार की संभावनाएं बनते ही देश रूपांतरित होने की राह पर चल पड़ा था.

देश में हुए इस बदलाव को गदगद होकर अनुभव करना हो तो बाहुबली प्रथम का एक दृश्य आज फिर से देखिए. इस आलेख को पढ़ने के बाद जब दोबारा देखेंगे तो गर्व की अनुभूति होगी. ये समझ लीजिए कि फ़िल्म के वे पांच मिनट भारत की वास्तविकता बन गए.

पूर्व का दृश्य

महेंद्र बाहुबली देवसेना को लेने के लिए महिष्मति में प्रवेश करता है. भल्लालदेव की विशाल सोने की प्रतिमा खड़ी की जा रही है. प्रजा कोड़े खाकर टनों वज़नी प्रतिमा को रस्से से खींचकर उठा रही है. मंच पर गायक रोनी मुद्रा में भल्लालदेव का स्तुति गान गा रहे हैं. नर्तकियां बेमन से नाच रही हैं. गजराज इस समारोह में न आने का संकेत बार-बार सिर झटक कर दे रहे हैं.

रूपांतरण

एक मज़दूर का संतुलन बिगड़ता है और रस्सा हाथ से छूट जाता है. प्रतिमा नीचे मौजूद सैकड़ों मज़दूरों पर गिरने ही वाली है. भल्लाल का पिता कह रहा है ‘सौ-दो सौ की बलि हो जाएगी क्या फर्क पड़ेगा’. तभी मुंह पर नकाब लगाए महेंद्र प्रकट होता है और रस्सा थाम लेता है. हवा का एक झोंका नकाब सरका देता है. उसे देखने वाले बूढ़े का चेहरा स्याह पड़ जाता है और वह बुदबुदाता है ‘बाहुबली’.

बिजली की तेज़ी से ये नाम पूरे माहौल में दौड़ जाता है. अब कोड़े खाकर भी लोग चीख रहे हैं ‘बाहुबली’. अचानक मंच पर विराजमान गायकों की मुखमुद्रा कठोर हो जाती है और वे वीर रस में गाने लगते हैं. नर्तकियों की भाव-भंगिमाएं बदल गई हैं, उनकी भृकुटियां तन गई हैं, जैसे उनमें दुर्गा प्रकट हो गई है. गजराज अपना पैर उठाकर हर्ष व्यक्त कर रहे हैं.

बाहुबली दृश्य में कहीं नहीं है, लेकिन हर ओर बस बाहुबली ही है. ये कमाल निर्देशक एस. राजामौली ही कर सकते हैं. बस एक नाम की पुकार जन-मानस में आशा का संचार कर देती है. आज का दिन भारतवर्ष के लिए गर्व का दिन है. यूएन में सुषमा स्वराज की हुंकार देख मन आल्हादित हो गया, ऐसा लगा राष्ट्र गर्दन ताने उठ खड़ा हुआ है.

पहले ये दृश्य देखिये और फिर ऊपर मेरी कही बात का मिलान कीजिये. इस रूपांतरण में आपको ‘भारत का रूपांतरण’ स्पष्ट दिखाई देगा.

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