इंसाफ का तराज़ू : एक में आस्था, दूसरे में ममता

mamta banerji durga visarjan high court
Mamta Banergee refused to accept HC order

बंगालिस्तान की वजीरेखाला मोमताबानो द्वारा 1अक्टूम्बर को दुर्गाप्रतिमा के विसर्जन पर लगी रोक मामले पर हाई कोर्ट की कड़ी फटकार लगाये जाने के बाद भी उसके तेवरो में कोई कमी नही आई है. ममता ने कहा कि भले ही कोई मेरा गला काट दे पर मुझे यह नहीं बताया जाये कि मुझे क्या करना है.

1अक्टूम्बर को दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन को रोकने पर अड़ी मोमताबानो ने अब पैंतरा बदलते हुए कहा है कि 1अक्टूम्बर को दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन होगा या नहीं ये कोर्ट नहीं पुलिस तय करेगी और पुलिस की अनुमति के बाद ही दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा.

राज्य की पुलिस किसका कहा मानती हैं ये सारा देश जानता है और तालिबानी मानसिकता से भरी हुई मोमताबानो से पंगा लेकर कौन पुलिसवाला अपनी नौकरी खतरे में डालना चाहेगा. मतलब मोमताबानो के बंगालिस्तान में वहीं होगा जो हाईकोर्ट नहीं बल्कि वो चाहेगी.

दूसरी और देश के करोड़ों हिंदू और हिंदूवादी संगठन राम मंदिर निर्माण के लिये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा में टकटकी लगाये उसकी ओर देख रहे हैं. कोर्ट का जो निर्णय होगा उसे ईश्वरीय आदेश की तरह पालन करने का वचन दे रहे हैं. कोर्ट के एक एक शब्द को पत्थर की लकीर की तरह अमल में लाने के लिये पलक पावड़े बिछाये बैठे हैं. दहीहांडी से लेकर होली दीवाली के रंग पटाखों तक में हमने कोर्ट के हर आदेश का पालन किया है. दूसरी ओर मोमताबानो जैसे राजनेता शांतिप्रिय समुदाय को खुश करने के लिये हाई कोर्ट के आदेश को भी धता बताकर अपने वोट बैंक को खुश करने मे लगे हुए हैं. तीन तलाक के मुद्दे पर भी देश का एक वर्ग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से साफ इंकार कर चुका है!

इसे भी पढ़े

काश हर धर्म गुरु समझें धर्म का वास्तविक अर्थ

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY