सफाई का ईनाम : स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत

शेरसिंह ने स्वच्छता दिवस के उपलक्ष्य में एक प्रतियोगिता रखी. उन्होंने चंपकवन में घोषणा करवा दी कि,

“अबकी आने वाले रविवार को सभी जानवर अपने अपने घर की सफाई करेंगे. जिसका घर सबसे ज्यादा साफ सुथरा और सुन्दर होगा उसको ईनाम दिया जाएगा.”

सभी जानवर एक दिन पहले से घर की सफाई में जुट गये. उन्होंने घर का सारा सामान बाहर निकाल कर रख दिया. फिर घर की लिपाई पुताई और पेंट का काम किया जाने लगा. बाहर निकाले सामान में से जो काम के सामान थे उनको धो पोंछकर फिर से घर में सजाया जाने लगा. इस बार कोई भी जानवर बहुत पुराने हो गये सामान को घर में नहीं लाया बल्कि कबाड़ समझकर बाहर ही फेंक दिया.

उधर पेड़ पर बैठा मीकू बंदर बहुत उदास था. वो तो पेड़ पर रहता था इसलिए उसका कोई घर ही नहीं था. वो पेड़ पर बैठे बैठे सोच रहा था कि “अगर उसका भी घर होता तो वो भी अपने घर को बहुत सुन्दर सा सजाता. और क्या पता शेरसिंह उसे ही इनाम दे देते..

उदास मन से वो जंगल के जानवरों के घर देखने निकल पड़ा. वो एक एक के घर जाता और देखता. सभी बड़ी तन्मयता से घर को सजाने में जुटे थे. जब वो डुगडुग के घर से बाहर निकल रहा था तब उसने देखा डुगडुग के घर के आगे बहुत सारा कूड़ा पड़ा है. उसने आसपास नजरें दौड़ाईं. लगभग सभी के घर के बाहर यही नज़ारा था. हर किसी के घर के आगे कबाड़ इकट्ठा था. सभी ने अपने अपने घर तो चमका लिए थे लेकिन घर का कूड़ा बाहर डाल दिया था. ये देखकर मीकू को बहुत खराब लगा. उसने डुगडुग से कहा,

“डुगडुग भाई तुमने अपना घर तो खूब साफ सुथरा कर लिया लेकिन घर से बाहर कितना कूड़ा लगा रखा है.”

“अरे मीकू भाई! घर का कूड़ा बाहर नहीं फेंकेगें तो कहां फेंकेगें??

“लेकिन ये सोचो गन्दगी में होने वाले कीटाणु तो तुम्हारे घर में ही आएँगे न?”

मीकू ने डुगडुग को समझाने की कोशिश की, लेकिन डुगडुग के पास मीकू की बातें सुनने के लिए समय नहीं था. अभी उसे घर के अंदर बहुत से काम करने थे शाम तक. तभी मीकू ने कुछ सोचा और उसने सबके घरों के बाहर पड़ा कूड़ा उठाकर पास बने एक बड़े गड्ढे में डालना शुरू कर दिया. वो समझ गया कि ईनाम के लालच में सब अपने अपने घरों को चमका रहे हैं और उनको बाहर की गन्दगी से कोई मतलब नहीं है.

मीकू जानता था कि “बारिश आने वाली है. पानी बरसने पर सारा कूड़ा भीगकर सड़ने लगेगा और बीमारी के कीटाणु फैलने लगेंगे. बारिश में सबसे ज्यादा बीमार होते हैं लोग.” ये सब उसे उसके दोस्त ने बताया था. जो सुंदरवन से आया था कुछ दिन उसके पास रहने.

शाम तक मीकू ने सबके घरों के बाहर पड़े कूड़े कबाड़ को गड्ढे में भर दिया. ये सब करने वो बहुत थक गया था. नहा धोकर वो पेड़ पर जाकर आराम करने लगा. थके होने की वजह से उसे नींद आ गयी. तभी चिकचिक गिलहरी ने उसे जगाया,

“मीकू जल्दी उठो. शेरसिंह अंकल पूरे चंपकवन के घरों का निरीक्षण कर चुके हैं. थोड़ी देर में ईनाम की घोषणा होने वाली है और तुम यहाँ आराम से सो रहे हो. उठो मीकू जल्दी उठो.”

मीकू चिकचिक की लगातार आती आवाज से हड़बड़ा कर उठ गया. जल्दी ही वो चिकचिक गिलहरी को पीठ पर बिठाकर शेरसिंह की गुफा की ओर दौड़ पड़ा.

शेरसिंह की गुफा के बाहर सभी जानवर एकत्रित थे. सबको उत्सुकता थी कि पता नहीं ईनाम किसको मिलेगा. सभी बस अटकलें लगा रहे थे. सबसे ज्यादा उम्मीद भोलू भालू के लिए थी. उसका घर काफी बड़ा था लेकिन उसने मेहनत करके घर के एक एक कोने को साफ किया था. घर की हर चीज ऐसे चमक रही थी जैसे बिल्कुल नई हो.

चारों तरफ खुसुर पुसुर मची थी. तभी शेरसिंह रानी शेरनी के साथ वहाँ आए. उनके आते ही सब शान्त हो गये. शेरसिंह ने ऊँचे बने पत्थर के एक मंच पर चढ़कर बोलना शुरू किया,

“दोस्तों, जैसी की मुझे उम्मीद थी उससे कहीं बढ़कर आप लोगों के घर पर सफाई मिली. सबके घर एक से बढ़कर एक सुन्दर लग रहे हैं. मेरे लिए किसी एक का नाम चुनना बहुत मुश्किल था लेकिन फिर भी, एक को ईनाम तो देना ही है.
दोस्तों! बेहतर सफाई के लिए जिस एक जानवर का नाम हमने चुना है वो है…

इतना कहकर शेरसिंह चुप हो गये उन्होंने चारों तरफ नज़रें दौड़ाईं. इतनी देर में सभी जानवरों के दिल की धड़कने बढ़ गयीं. वो एक नाम कौन है? ये जानने के लिए सभी आतुर हो रहे थे. तभी शेरसिंह ने ऊँची आवाज में कहा..

“और वो एक नाम है… मीकू!!!!!

मीकू अपना नाम सुनकर चौंक गया. मीकू के नाम से चंपकवन के सारे जानवर चौंक गये थे. सभी एक दूसरे का मुँह देखने लगे. तभी चीकू खरगोश अपनी जगह से उठा और शेरसिंह के सामने आकर बोला,

“माफ करिए अंकल.. मीकू को ईनाम मिल रहा है, ये हम सभी दोस्तों के लिए खुशी की बात है, लेकिन मीकू को किस आधार पर यह ईनाम दिया जा रहा है? ये हम सभी जानना चाहते हैं. जबकि उसका तो कोई घर भी नहीं है. और आपने कहा था कि जिसके घर में सफाई होगी आप उसको ईनाम देंगे.”

“हाँ चीकू, मैने ये कहा था कि जिसके घर में बहुत अच्छी सफाई होगी उसको ही मैं ईनाम दूँगा. तुम सबने अपने अपने घरों को खूब चमकाया. एक एक चीज़ करीने से लगाई. कोने कोने की सफाई की. लेकिन उसके बाद आपने क्या किया? घर का सारा कूड़ा करकट लाकर घर से बाहर फेंक दिया. इस तरह आपने ये साबित कर दिया कि आप चंपकवन को अपना घर नहीं समझते. आपने अपने घर की सफाई भी ईनाम पाने के लिए की.

मीकू का अपना कोई घर नहीं है वो पेड़ पर रहता है. लेकिन उसने फिर भी आपलोगों के घरों के आगे से ना सिर्फ कूड़ा हटाया बल्कि एक गड्ढे में डाला. जिससे हमारे घर के आसपास गंदगी न रहे. घर के अंदर की सफाई करना अच्छी बात है लेकिन बाहर कूड़ा पड़ा रहेगा तो उसपर खतरनाक कीटाणु पैदा होंगे और वो हम सबको बीमार कर देंगे. इसलिए सफाई के लिए दिए जाने वाले ईनाम का असली हकदार मीकू है.”

सबने ताली बजाकर मीकू का स्वागत किया और शेरसिंह से वादा किया कि अब वो अपने घर की सफाई के साथ साथ अपने आस पास की भी सफाई रखेंगे वो भी बिना किसी ईनाम के लालच में…

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