मामूली केस में दाउद के भाई का गिरफ्तार होना एक गहरी चाल

फ़िल्में किसी गलत बात को जस्टीफाई करने का सबसे अच्छा तरीका होती हैं. सन सत्तर के बाद हिन्दी फिल्मों का जितना शातिराना इस्तेमाल अपराधियों और आतंकियों द्वारा हुआ है उतना अच्छा इस्तेमाल राष्ट्र-निर्माताओं द्वारा नहीं हो सका. इस बीच हजारों ऐसी फ़िल्में बनाई गई जो अपराधियों और आतंकियों को न केवल जस्टीफाई कर रही थीं बल्कि उनका महिमामंडन करके हीरोइक इमेज बनाने में लगी हुई हैं.

उन्होंने पूरी योजना के साथ मुम्बईया फिल्म इंडस्ट्री पर कब्जा किया है और वे इसका लगातार लाभ उठा रहे हैं. इनके साथ ही उसे कच्ची-उम्र का रॉ-मैटीरियल नए अपराधियों की खेप के रूप में इस प्रकार के फिल्मों के प्रभाव से मिल जाता है. इससे उनकी नेटवर्किंग में आसानी होती है. पिछले बीस सालों में मुम्बइया फिल्मों पर Pakistan की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI ने दाउद इब्राहिम के माध्यम से सैकड़ों फ़िल्में बनवाई है जो भारत के जनमानस को प्रभावित करने के काम भी आईं.

अब जरा लेटेस्ट मामला देखिये. आतंकी Dawood Ibrahim ने ऐसी ही प्लानिंग फिर की है. वह एक लम्बी योजना बनाकर खेल रहा है. उसनें अपने भाई इकबाल कासकर को जान बूझ कर गिरफ्तार करवाया है और ऐसा करके उसने ज़बरदस्त मीडियाटिक गेम खेला है. खबर में आ जाने से एक बार फिर वह न्यूज़ स्पेस लेकर चर्चा में आ गया. इससे वह न केवल अरबों रुपये कमाना चाहता है बल्कि अपनी आपराधिक गतिविधियों को एक वर्ग में संदेश के रूप में फैलाना चाहता है.

अगर हम उसकी साज़िश को समझ नहीं सके तो वह हमसे ही अरबों रुपये तो कमायेगा ही कोई नया गेम-प्लान भारत में स्टेस्ब्लिश करेगा. असल में दुश्मन देश भारतीय लोकतंत्र की खामियों को ज़बरदस्त इस्तेमाल करते हैं. वे जानते है ज़हरीली मानसिकता का पोषण कैसे किया जाए. कल तक इस देश के लोगों को पता भी नहीं था कि दाऊद का कोई भाई मुंबई में रहता है और खुलेआम यहाँ की सड़कों पर घूमता है. लेकिन अब पता चल गया है.

इससे भी हैरान करने वाली खबर यह है कि दाऊद के भाई इकबाल कासकर को उसकी बहन हसीना पारकर के घर में गिरफ्तार किया गया है. उसके गिरफ्तार होते ही भारत की गैरज़िम्मेदार Main Stream Media भोंपू की तरह बजना शुरू हो गई. अब मीडिया में हसीना पारकर की भी चर्चा शुरू हो गयी है. आतंकी दाऊद यही चाहता था. आतंकी दाऊद चाहता है कि मीडिया में उसकी बहन की चर्चा शुरू हो जाए इसीलिए उसने जान बूझ कर अपने भाई को फिरौती के छोटे से मामले में गिरफ्तार करवा दिया.

उसे पता है कि उसके भाई को पांच-सात दिनों में ज़मानत मिल जाएगी. भई, एक अपराधी देशद्रोही फैमिली की इज्ज़त छोटी-मोटी गिरफ्तारी से तो घटने वाली नहीं. हाँ, वे मज़हबी निगाह में तो आ ही गए. उन्होंने अपने ख़ास दर्शक वर्ग का ध्यान खींचने में सफलता पा ली है, वह वर्ग तेजी से एक्टिव हो चुका है.

अब ज़रा मार्केटिंग हथकंडा समझिये. 22 सितम्बर को ‘हसीना पारकर’ फिल्म रिलीज होने वाली है. हसीना पारकर दाऊद इब्राहिम की बहन है. यह फिल्म दाउद इब्राहिम की बहन के जीवन पर आधारित है. लेकिन अभी इसका इतना प्रमोशन नहीं हुआ था. दाऊद के भाई के गिरफ्तार होते ही हसीना पारकर का प्रमोशन होने लगा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इकबाल कासकर अपनी बहन हसीना पारकर के घर में अरेस्ट किया गया है.

दाऊद ने जान बूझ कर अपने भाई को अपनी बहन हसीना पारकर के घर में गिरफ्तार करवाया ताकि हसीना पारकर की फिल्म का प्रमोशन हो जाए. लोगों में इस फिल्म को देखने की उत्सुकता जगे. लोग सैकड़ों रुपये खर्च करके यह फिल्म देखें और यह पूरा पैसा दाऊद की जेब में चला जाए. इस फिल्म के निर्माता नाहिद खान हैं जबकि डायरेक्टर अपूर्व लाखिया हैं. उच्च खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस फिल्म में ज़रूर दाऊद इब्राहिम का पैसा लगा है वरना भारत में उसकी बहन के जीवन में किसका इंटरेस्ट होगा.

अब एक्चुअल कंडीशन समझिये. दाऊद इब्राहिम की वर्तमान स्थिति बहुत खराब हो चुकी है. अपंग और बीमार, लाचार और मजबूर हो चुका है. अब वह किसी भी तरह भारत में आने की जुगत लगा रहा है. एमएनएस प्रमुख Raj Thackeray ने खुलासा किया है कि अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम खुद भारत आने का इच्छुक है. राज ठाकरे ने मुंबई में अपने फेसबुक पेज का उद्घाटन करने के बाद Narendra Modi एवं फड़नवीस सरकार पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए.

ठाकरे ने कहा कि मोदी सरकार बार-बार कहती है कि वह दाऊद को भारत लाकर रहेगी वास्तव में दाऊद खुद भारत आना चाहता है. वह अब बीमार ही नहीं लगभग अपंग हो चुका है. मोदी के आने के बाद संसार भर में उसका नेटवर्क खत्म हो चुका है. RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) और अंतरर्राष्ट्रीय कूटनीति ने उसका जीना-हराम कर दिया है. आईएसआई और पाकिस्तान खेल दुनिया के सामने खुल चुका है. उसके पाकिस्तानी आका अकेले पड़ गए हैं और साख बचाने के लिए उससे छुटकारा पाना चाहते हैं.

सम्भवतः अज्ञात मौत की जगह वह अपना अंतिम समय अपनी मातृभूमि में गुज़ारना चाहता है. यह लगभग तय है कि उसका खेल कुछ ही दिनों का और है. विशेषज्ञों का मानना है कि उसके भारतीय भारतीय रहनुमा Bollywood लिंक के माध्यम से उसके लिये बड़ी भूमिका तैयार कर रहे हैं जिससे कि उसकी गिरफ्तारी डिक्लेयर होने के बाद मज़हबी लोगों में एक सहानुभूति खड़ी कर सके. इसके चलते आशंका है कि आगे इस तरह की कई फ़िल्में और आ सकती हैं.

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