ज्योतिष पीठ बद्रिकाश्रम में नियुक्त हो नया शंकराचार्य : इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद. ज्योतिष पीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानन्द दोनों को इस पीठ का शंकराचार्य मानने से इनकार करते हुए उनका दावा खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने दोनो संतों की इस पद के लिए हुई नियुक्ति को गलत माना.

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद इसी साल तीन जनवरी को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था. अब तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की गद्दी पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती काबिज थे.

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस केजे ठाकुर की डिवीजन बेंच ने फैसला देते हुए तीन महीने में परंपरा के मुताबिक नया शंकराचार्य चुनने को कहा है. फैसले के मुताबिक तीन महीने तक यथास्थिति कायम रहेगी. नये शंकराचार्य का चयन बाकी तीनों पीठों के शंकराचार्य, काशी विद्वत परिषद और भारत धर्म सभा मंडल मिलकर करेंगे. उल्लेखनीय है कि बाक़ी तीन पीठों के शंकराचार्यों में स्वामी स्वरूपानंद भी शामिल रहेंगे क्योंकि वे द्वारका पीठ के शंकराचार्य भी हैं.

कोर्ट ने कहा है कि नए शंकराचार्य के चयन में 1941 की प्रक्रिया अपनायी जाए. हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की नियुक्ति होने तक यथास्थिति कायम रखने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने आदि शंकराचार्य द्वारा घोषित 4 पीठों को ही वैध पीठ माना है. कोर्ट ने स्वघोषित शंकराचार्य पर भी कटाक्ष किया है. कोर्ट ने फर्जी शंकराचार्यों और मठाधीशों पर भी अंकुश लगाने का निर्देश दिया है.

1989 में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के गद्दी सँभालने के बाद द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उनके खिलाफ इलाहाबाद की अदालत में मुकदमा दाखिल किया और उन्हें हटाये जाने की मांग की.

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य की पदवी को लेकर करीब सत्ताईस साल तक चले मुक़दमे में इलाहाबाद की जिला अदालत ने साल 2015 की पांच मई को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के हक़ में अपना फैसला सुनाया था और 1989 से इस पीठ के शंकराचार्य के तौर पर काम कर रहे स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की पदवी को अवैध करार देते हुए उनके काम करने पर पाबंदी लगा दी थी.

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