ममता बनर्जी के नाम खुला खत : किस राह पर हो आप?

प्रति
ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

आदरणीय ममता जी. यूं तो आपके नाम को आदरणीय शब्द से अलंकृत करना मेरे लिए जरूरी नहीं है. लेकिन मेरे हिंदुस्तान के एक राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री होने के नाते आपकी इज्जत करना मैं अपना फर्ज मानता हूं. वो फर्ज, जिसे आप एक दफा नहीं बल्कि कई दफा न जाने किस विचारधारा और मानसिकता के बहाव में आकर भुला चुकी हैं. इसका एक उदाहरण तो आपने हाल के दिनों में ही पीएम मोदी के भाषण को पश्चिम बंगाल में बैन करा के दिया था. चलिए कोई बात नहीं, संभव है कि आपकी राजनीतिक मजबूरी ने आपको यह कदम उठाने पर मजबूर किया हो. लेकिन बहुत अच्छा होता, कि इस राजनीतिक टकराव को परे रखकर आप देश के प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से जुड़ने में सहयोग करती.

खैर छोड़िए, इस खत के माध्यम से मैं आपसे जुड़े एक दूसरे पहलू को छूना चाहता हूं. ममता जी, आज पश्चिम बंगाल को देशभर में पाकिस्तान का उपनाम दिया जाता है. आपके राज्य में हिंदू समुदाय पर अत्याचार की खबरें आम हैं. एक वर्ग विशेष वहां पर खुद को इतना मजबूत और सक्षम समझने लगा है, कि उससे जुड़े दूसरे देश से भगाए गए लोग हिंदुस्तान में आकर आपके राज्य में बसना चाहते हैं. देखते ही देखते पश्चिम बंगाल में यह स्थिति कैसे बन गई, इनके पीछे क्या कारण है और भविष्य में यह तस्वीर किस तरह के हालात का गवाह बनेंगी? क्या रात को सोने से पहले यह कुछेक सवाल आपके दिमाग में कौंधते है? यदि हां, तो क्या आप उनके बारे में सोचना पसंद करती हो या फिर दुनिया को नजर आने वाले अपने स्वभाव के मुताबिक इस विषय पर ध्यान देना भी आपको गंवारा नहीं है?

आज कोलकाता हाईकोर्ट ने आपकी सद्भावना नीति को एक वर्ग विशेष की विरोधी और एक वर्ग को खुश करने की मंशा बताया है. सही मायनों में यदि देखा जाए, तो यह सद्भावना नीति तो है ही नहीं, बल्कि आप तो दरार डालने की कोशिश कर रही है दोनों ही वर्गों के बीच. जरा खुद ही सोचिए, जिस हिंदुस्तान में दीपावली में अली और रमजान राम को खोजने की परंपरा है. वहां आपके राज्य की आने वाली पीढ़ियों को किस तरह की तस्वीर देखने को मिलेगी. अभी तो आप ऐढ़ी-चोटी का जोर लगाकर मुहर्रम के अवसर पर गणेश और दुर्जा विसर्जन को टालने की कोशिश में लगी हुई हैं. लेकिन फर्ज कीजिए, आगे चलकर यदि आप बंगाल की सत्ता में न रहीं और किसी दूसरी सरकार ने इस विषय में गौर नहीं किया, उस वक्त यदि हिंदू मुस्लिम त्योहार एक साथ पड़ गए. तो जमीनी स्तर पर ही एक ऐसे टकराव की स्थिति अस्तित्व में आ जाएगी, जिससे निपटना आसान नहीं होगा.

ममता जी. सच कहूं, तो कभी कभी तो समझ नहीं आता, कि आपकी यह खिलाफत एक दल विशेष के लिए है या इससे कहीं ऊपर एक सभ्यता को ही आप अपना दुश्मन समझ कर चल रही हो. और यदि ऐसा है, तो मैं जानना चाहूंगा, कि इसके पीछे मुख्य वजह क्या है? क्या आपके राज्य का 28 फीसदी मुस्लिम वोट इसके लिए जिम्मेदार है ? या उस हिंदू संस्कृति से बेइंतहा नफरत, जिसका हिस्सा आप तभी बन गई थीं, जब आपने एक ब्राह्मण कुल में जन्म लिया था.

खैर आपकी जिंदगी का तजुर्बा और काम करने का अनुभव मुझसे बीसियों गुना ज्यादा है. इसलिए मैं इस खत के माध्यम से यह तो नहीं कह सकता, कि आपसे यह सबकुछ अंजाने में हो रहा है. लेकिन ममता जी, इसके जरिए मैं आपसे एक सवाल जरूर पूछना चाहता हूं, कि यह सबकुछ करके साबित क्या करना चाहती हो आप?

– हेमंत चतुर्वेदी

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