स्नाइपर को ‘योगी’ होना पड़ता है

स्नाइपर शूटर किसी योगी की तरह होते हैं. एकाग्रता, सांसों पर गज़ब का नियंत्रण और घंटों बुत की तरह खड़े रहने का गुण ही किसी निशानेबाज़ को एक ‘स्नाइपर शूटर’ बनाता है. ये सामने आकर नहीं लड़ता. अपने शिकार को एक किमी की दूरी से मार सकता है. भारतीय स्नाइपर शूटर्स का लेखा-जोखा 1857 की क्रांति से लेकर ताज होटल पर आतंकी हमले तक मिलता रहा है.

दुनिया के ऑल टाइम स्नाइपर्स की सूची में चार तो सोवियत रूस के ही हैं, इनमें से दो महिला शूटर हैं. विश्व का सबसे खतरनाक शूटर फ़िनलैंड के सिमो हायहा को माना जाता है. इसने 705 दुश्मन सैनिकों को ऊपर पहुंचाया था. हालांकि इस सूची के दो सबसे लोकप्रिय नाम हैं ‘वासिल ज्यातसेव और बॉब द नेलर’. आपको जानकर हैरानी होगी कि बॉब द नेलर ने 1857 की क्रांति में अपनी सेवाएं दी थी. वासिल द्वितीय विश्व युद्ध मे बहुत लोकप्रिय हुआ था. इसने आधिकारिक तौर पर 300 जर्मन सैनिकों को मारा था.

बॉब द नेलर इतिहासकारों के लिए अजूबा रहा है. कुछ इसे भारतीय मानते हैं और कुछ इसे अश्वेत नीग्रो बताते हैं. उलझन इसलिए कि इसका मौलिक नाम इतिहास में दर्ज नहीं है. ऐसा भी कहते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी की पेशेवर फौज से निपटने के लिए भारतीय सेनानियों ने बॉब की पेशेवर सेवाएं ली थी.

बॉब ‘एनफील्ड p53 राइफल’ प्रयोग करता था. ये वही बंदूक थी, सुअर और गाय की चर्बी वाले कारतूस वाली. ये एक पाउच होता था जिसे दांत से फाड़ना पड़ता था. फिर इसमें से काला गन पावडर निकलता था. तो बॉब इस गैर टेलिस्कोपिक गन से 1000 यार्ड की दूरी तक निशाना लगा लेता था. कहते हैं वो दुश्मन के इंतज़ार में घंटों मुर्दों की तरह बिना हिले लेटे रह सकता था. अंग्रेजों की ‘लाल वर्दी’ देखते ही उनकी उंगली ट्रिगर दबा देती थी.

उस दिन वह कानपुर के ‘जोहन्ना हॉउस’ में कहीं दुबका अंग्रेज़ों को निशाना बना रहा था. हमेशा चौकन्ना रहने वाला बॉब उस दिन धूर्त अंग्रेज़ों की साज़िश का शिकार बन गया. कायरों ने बारूदी सुरंग से जोहन्ना हाउस को ही उड़ा दिया. बॉब द नेलर हमेशा के लिए सो गया.

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय शूटर रूसी तकनीक वाली ‘ड्रेगनोव टेलिस्कोपिक गन’ उपयोग कर रहे थे. इस गन से वे पाकिस्तानी ट्रूप्स को लगभग एक किमी की रेंज में लेकर मारते थे. इनमे कुछ ऐसे थे जो ‘पचास पैसे’ के सिक्के को भी लंबी दूरी से उड़ा सकते थे.

नेवल एकेडमी एझिमाल (केरल) के इंडक्शन टेस्टिंग प्रोग्राम में कैडेट्स के बीच एक किस्सा बहुत चर्चा में रहता था. एक अनजान स्नाइपर, जिसने 26/11 के आतंकी हमले के दौरान गजब का शौर्य दिखाया था. उसने बहुत लंबी दूरी से ताज होटल के भीतर खड़े आतंकी को ढेर कर दिया था. एक छुपा हुआ नायक, जिसकी कोई पहचान नही, कोई नाम नही.

स्नाइपर शूटर कई घंटों तक शिकार की रेकी करता है. शिकार कहाँ और कितनी देर खड़ा होता है, वो भी शूटर काउंट करता है. हवा का रुख भी भांपता है. घंटों की तैयारी एक ‘मास्टर शॉट’ के लिए. ये ऐसे रियल हीरो हैं, जिन्हें कभी पद्मश्री नहीं मिलता. अपने काम मे बेहतरीन होने का कोई सम्मान नहीं मिलता. ऐसे नायकों को मैं सलामी देता हूं.

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