कुछ तो गोलमाल ज़रूर है!

पिछले दिनों आपने देखा कि भारतीय मीडिया का एक तबका किस तरह से गौरी लंकेश के मुद्दे पर लगातार चार दिनों तक हिन्दुत्व, सनातनत्व, और संघ विरोध की मुहिम चला रहा था. अब जाकर पता चला कि गौरी लंकेश पैट्रिक की हत्या लाल सलाम गैंग ने की थी. कांग्रेसी और वामी-मीडिया अपनी नीचता और हिन्दू-विरोधी नीयत दिखाती रही, अब असलियत खुलकर सामने आ गई तो वे पूरे कमीनेपन के साथ चुप हैं.

जिस तरह हत्या हुई, शोरगुल हुआ, राजनीतिक लोग संघ को दोषी ठहराने आगे आये, सच दिखते ही खबर गायब है. इससे बहुत बड़ा संदेह यह होता है कि कहीं यह पुरोहित मामले की तर्ज पर संघ और हिंदू संगठनों को बदनाम करने की साज़िश तो नहीं थी. एक राजनीतिक वंश और गिरोह इस काम में माहिर है. यह जगत-जाहिर है.

जिस दिन गौरी लंकेश की हत्या हुई थी उसके दूसरे ही दिन राहुल गाँधी ने मोदी, भाजपा और आरएसएस पर उनकी हत्या का आरोप लगा दिया था. ऐसा इसलिए क्योंकि गौरी लंकेश आरएसएस के विरोध में हमेशा लिखती रहती थीं. वह ईसाई कम्युनिस्ट होने के कारण स्वभावत: हिंदू विरोधी थी. उनकी हत्या के अगले दिन ही राहुल गाँधी ने आरएसएस को उनका हत्यारा बता दिया. राहुल गाँधी के आरोपों के बाद तथाकथित ‘लिबरल मीडिया’ ने भी उनके सुर में सुर मिला लिया और मोदी, भाजपा, आरएसएस को गौरी लंकेश का हत्यारा बताने लगा.

यही नहीं प्रेस क्लब में पत्रकारों की मीटिंग में भी आरएसएस पर ही सवाल उठाए गए. वहां पर कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे देशद्रोह के आरोपियों को बुलाकर मोदी के खिलाफ भाषण दिलवाया गया. मोमबत्ती और बड़ी बिंदी गैंग एकदम से मुखर हो गया. अब खुलासा हो रहा है कि गौरी लंकेश का मर्डर उनके (मुंहबोले) बेटों कन्हैया कुमार और उमर खालिद की गैंग ने ही किया है. ये लोग अल्ट्रा लेफ्ट माओइस्ट का समर्थन करते हैं, लाल सलाम बोलते हैं. गौरी लंकेश की हत्या भी इन्हीं लोगों ने की थी.

यह खुलासा जेल में बंद एक माओवादी ने ही किया है. गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही बैंगलोर SIT ने बैंगलोर की सेंट्रल जेल में बंद इस नक्सली से पूछताछ की. उसने बताया कि गौरी लंकेश को अल्ट्रा लेफ्ट यानी कट्टर नक्सलियों ने मारा. हत्या का कारण बताते हुए नक्सली ने बताया कि गौरी लंकेश नक्सलियों को सरेंडर करने की अपील कर रही थी जिसकी वजह से नक्सली उनसे नाराज थे, क्योंकि पैट्रिक की बात मानकर कई लोगों ने सरेंडर भी किया था.

पैट्रिक नक्सलियों और मिशनरियों को लेकर एक ख़ास एजेंडे के तहत यह सरेंडर करवा रही थी. उसने कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ मिलकर योजना बनाई थी जिसके अंतर्गत नक्सलियों का उपयोग भाजपा के खिलाफ करना था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल में बंद कर दिया गया. उन्हें लगा कि गौरी लंकेश ने उन्हें धोखा दिया है. गौरी लंकेश उनसे हथियार छोड़ने की भी अपील करती थी इसकी वजह से भी नक्सली नेता उनसे नाराज थे. इसी गुस्से की वजह से अल्ट्रा लेफ्ट के लोगों ने उन्हें मार डाला.

यहाँ पर सवाल लिबरल मीडिया और राहुल गाँधी पर उठ रहा है. पहले तो राहुल गाँधी ने आरएसएस और मोदी पर उसका इल्जाम लगा दिया. लेकिन जब पता चला है कि गौरी का मर्डर नक्सलियों ने किया है तब से वे शांत हैं. इससे भी हैरानी की बात यह है कि हिन्दुओ को आतंकी साबित करने वाली मीडिया अब क्यों शांत हैं? क्या पत्रकारिता अपने धर्म से तौबा कर चुकी है या उसे केवल हिन्दुओ को ही नीचा दिखाना है?

अब उन्हें गौरी लंकेश की हत्या का कोई दुःख नहीं है क्योंकि उन्हें नक्सलियों ने मारा है, उन्हें गौरी लंकेश की हत्या का तभी दुःख होता जब उन्हें आरएसएस ने मारा होता. कहीं ऐसा तो नहीं हिन्दू-विरोधी न्यूज़-स्कूप के लिये मीडिया का वह ख़ास तबका भी पैट्रिक लंकेश की हत्या में शामिल रहा हो या यह हत्या उनके इशारे पर ही की गई हो?क्योकि पिछले दिनों दिल्ली में पकडे गए कुछ नक्सलियों के साथ दिल्ली के एक ख़ास चैनल के कुछ पत्रकारों के सम्बन्ध भी सामने आये थे.

हिन्दू आतंकवाद शब्द गढ़ने से यह साबित ही हो चुका है. गत दस साल से कुछ राजनीतिक और मीडिया घराने लगातार इस तरह की साजिश करने में लगे हुए हैं जिससे भाजपा, संघ और हिन्दुओं का चेहरा खराब हो. वे इसके लिए तरह-तरह के शिगूफे छोड़ते हैं और फिर एक सुर में शोर मचाते हैं. यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने नक्सलाइट संबंधों को इस जघन्य हत्या के लिए इशारा किया हो. कुल मिला कर कुछ गोलमाल तो ज़रूर है.

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