पेट्रोल कीमतों को न झेलने वालों को 3 करोड़ शरणार्थियों पर हो रहे खर्च से कोई तकलीफ नहीं!

म्यांमार में बौद्धों के साथ न रह पाने वाले और म्यांमार में ही अपने लिये अलग इस्लामिक राष्ट्र की मांग करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को भारत के ही धर्मनिरपेक्ष शासकों ने, भारत की जनता से छिपा कर बसाया था. आज जब यह बात सार्वजनिक हो गयी है तो भारत की मोदी सरकार द्वारा इन रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत से निकाले जाने के प्रयास पर भारत का कट्टर मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाला समूह, भारत की आतिथ्य परम्पराओं और मानवतावाद के नाम पर सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, रोहिंग्याओं को भारत में ही बसे रहने के समर्थन में खड़ा हो गया है.

यह भारत के जो धर्मनिरपेक्ष लोग इन रोहिंग्याओं का समर्थन कर रहे हैं, वे या तो महामूर्ख हैं या फिर सीधे तौर पर राष्ट्रद्रोही हैं. ये इतने पतित हैं कि जिस राष्ट्र भारत का 70 वर्ष पूर्व धर्म के ही नाम पर बंटवारा कराया है, उसी की धरती पर उन लोगों को बसाने की वकालत कर रहे हैं, जो अपने राष्ट्र म्यांमार का धर्म के आधार पर बंटवारा किये जाने की मांग करने पर भगाए गये हैं.

भारत की आज की स्थिति इसीलिए है क्योंकि इतिहास से हमने कुछ न सीखने की कसम खायी हुयी है. आज से 2300 वर्ष चन्द्रगुप्त के काल में भारत की पश्चिमी सीमा पर, पश्चिम से आए शरणार्थियों पर भी प्रश्न खड़े हुये थे और तब भी भारत की मूर्ख जनता और उनके प्रतिनिधियों को चेतावनी दी गई थी, जो आज भी शाश्वत है.

चाणक्य सीरियल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल है. उसमें बोले गये संवाद को मैं यहां आपके पढ़ने के लिये लिख रहा हूँ ताकि आप कल के तक्षशिला को भारत और शरणार्थियों को बंगलादेशी/रोहंगिया समझे.

(आज का धर्मनिरपेक्ष) : “इस मानवतावादी कार्य से दो राष्ट्रों के भावी संबंधो में विकास भी होगा”

(आज का अक्ल से पैदल मानवतावादी हिन्दू) : “शरणार्थियों को आश्रय देने के मानवतावादी कृत्य का मैं समर्थन करता हूँ”

(आज का चिंतित राष्ट्रवादी) : “बंद करो परम्परा और मानवता की बातें! हम ही परम्परा और मानवता की बातें करते हैं और हम ही कुचले जाते हैं! दो राष्ट्रों के संबंधों की विकास की बातें करने वाले कुल-मुख्य भूरिग्रवा की बात मान ली जाय तो तक्षशिला के नागरिक यह निश्चित समझें कि शीघ्र ही तक्षशिला भी खंड-खंड में बंटा हुआ जर्जर दिखाई देगा. जिन विदेशियों को शरण देने की बात आप कह रहे हैं वे ही तक्षशिला की भूमि पर अपने अधिकार का दावा करेंगे. जिस मानवतावाद की दुहाई दे आप उन्हें शरण देने की योजना बना रहे हैं, उन्हीं मानवतावादियों की धरती कल धर्म जाति के संघर्ष से लाल हो उठेगी और धरती का कोई मानवतावादी उन संघर्षो के लिए उठी तलवारों को नहीं रोकेगा. कल यही शरणार्थी, आपके साथ सभा में बैठेंगे और आपके निर्णयों को प्रभावित करेंगे”.

(कुटिल धर्मनिरपेक्ष) : “धर्म को जाति के नाम पर परंपराओं को कलंकित मत करो रिपुदमन!”

(आक्रोशित राष्ट्रवादी) : “सत्य को स्वीकार करो भूरिग्रवा. जहाँ तक तक्षशिला के भविष्य का प्रश्न है वहां भावनाओं का कोई स्थान नहीं है. हमारा धर्म अलग, हमारी भाषा अलग, हमारा व्यवहार अलग. कल इन्हीं भेदों के नाम पर भेदभाव होगा और संघर्ष होगा. हम अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ना चाहते तो क्या वे अपनी परंपरा छोड़ेंगे? कल यही शरणार्थी आपके राज्य के अविभाज्य अंग होंगे और यही आपके सामने बैठ कर अपने तथाकथित अधिकारों की मांग करेंगे, तब आपका मानवतावादी हृदय उन पर हथियार उठाने से संकोच महसूस करेगा. क्या पौर सभा मुझे आश्वासन दे सकती है कि कल शरणार्थियों के कारण गांधार खंडित नहीं होगा? क्या कोई पौर मुझे आश्वासन दे सकता है कि कल यही शरणार्थी अपनी मातृभूमि लौट जायेंगे? क्या पौर सभा स्वयं आश्वस्त है कि शरणार्थियों के पुनर्वसन के नाम पर शासन तक्षशिला की प्रजा पर नवीन करों का बोझ नहीं लादेगा”?

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