हलेलुइया-हलेलुइया करने आये थे, अब किये जा रहे थे हाथ जोड़ के हाय-हाय

ईसाइयत कबूल कर चुके आदिवासियों की घर-वापसी कराते सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार बॉर्डर

हजारीबाग के दीपुगढ़ा से एक मिशनरी संस्था है ‘डिवाइन मर्सी आश्रम’ करके! ये धर्मान्तरण का कार्य खूब करती है… एक तरह से ये गढ़ है मिशनरियों का… फॉरेन फंडेड संस्था है… गाँव-गाँव में जा-जा के सेवा इलाज के नाम पे धर्मान्तरण का खेल खेलती है.

मेरे घर से करीब 30 किलोमीटर दूर जी.टी. रोड किनारे बगोदर थाना अंतर्गत डोरियो गाँव में भी इनकी एंट्री हुई… निशाने के तौर पर तुरी, रविदास जाति आदि थे. कुछ का कनवर्जन कर भी चुके थे इलाज के बहाने. लेकिन भनक न लगी थी…

फिर करीब डेढ़-दो महीने तक हर दो दिन में मार्शल-स्कॉर्पियो से मिशनरी लोग आते थे और बहुत ज्ञान देते थे लोगों को… प्रभु की शरण में आने से ये होगा, वो होगा, फलाना ढिमकाना, दिस दैट…!

आश्वासन दिया गया कि… यहाँ तुम लोगों के लिए मस्त अंग्रेजी कॉन्वेंट स्कूल खुलेगा… जिसमें आपके बच्चे फ्री में पढ़ेंगे. आप लोगों को भी एक-एक लाख रुपया दिया जाएगा, जिससे कि आप कुछ कर सको. आपकी कोई भी कितनी बड़ी बीमारी क्यों न हो, अच्छे से अच्छे हॉस्पिटल में मुफ्त में इलाज होगा… वगैरह.. वगैरह..!

अच्छी-अच्छी सिस्टर भी आती थी, और अच्छे से प्रभु के महिमा गा-गा के सुनाती थी. फिर उस बस्ती के 60 परिवार कनवर्जन को तैयार हो गए…

अब इतना कुछ हो रहा था तो बाहर कुछ खबर तो आनी ही थी. उस गाँव के जो लड़के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, वे अब कहने लगे थे कि कुछ दिन में हम लोग फ्री में अंग्रेजी स्कूल में पढ़ेंगे… हम लोग के यहाँ हजारीबाग वाला सब बोल के गया है कि अपने यहाँ अब अंग्रेजी स्कूल खुलेगा जहाँ हम सब फ्री में पढ़ेंगे.

और इस तरह बात आगे बढ़ी… थोड़ी छान बीन की गई तो पता चल ही गया… और उस दिन का भी पता चल गया जब उस बस्ती में सामूहिक कनवर्जन का कार्यक्रम होना था जिसमें कि 60 परिवार कनवर्ट होने वाले थे.

बस फिर क्या था… पहुँच गए बेस मुंगरा, कचरा के साथ हमारे भाई लोग. और जो इसके बाद कुकुर-रगदवा मार हुआ प्रभु के पुत्रों की कि मत पूछो…! ले कचरा का मार!… हलेलुइया-हलेलुइया करने आये थे अब हाथ जोड़ के हाय-हाय किये जा रहे थे…

और जो कनवर्जन को राजी हुए थे उनके भी घर के एक-दो मुखिया को भी दो-चार कचरा का मार हुआ… गोड़-मुड़ पड़ के प्रभु के पुत्रों ने माफी मांगी कभी न इस एरिया में घुसने की कसम खा कर… चमचमाती मार्शल स्कॉर्पियो को भी मस्त मार पड़ गई.

और चार परिवार जिनका कनवर्जन हो गया था, उनकी सोना माता पहाड़ी मन्दिर में विधिवत घर वापसी कराई गई.

मैंने करीब साल भर पहले ही लिखा था, दूसरे जगह का तो नहीं पता, लेकिन मेरे एरिया में अगर कोई मिशनरी घुसपैठ की कोशिश करेगा तो उसे जूते से मार भगाऊँगा… और आज हमारे भाइयों ने ये काम बखूबी करना शुरू कर दिया है… डोरियो, हेसला, बेको, औरा, बगोदर के साथियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और आशीष बॉर्डर भाई जी को बहुत अभिनन्दन.

अभी कुछ दिनों बाद एक चंगाई बाबा की धुलाई होने वाली है… वेट, इधर ही डालूँगा.

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