देश को पसंद है मोदी का ये झूठ

हमारे स्कूल में एक हिंदी के सर थे, नाम था एम पी सिंह, पूर्व सैनिक थे. बच्चों में गज़ब का खौफ था उनके नाम का. ऐसी मार मारते थे कि तीन दिन तक गाल पर छाप रहती. पर एक खूबी थी उनकी मार में… मारते-मारते भी चेहरे पर गज़ब की मुस्कान रहती. स्केल से नकलची बच्चे का हाथ लाल होता रहता पर मुस्कुराते-मुस्कुराते गाते हुए अंदाज़ में उनके होंठों पर ये लाइने होतीं “अपना काम खुदी को साजे, और करे तो डंडा बाजे”. हर बच्चा जानने लगा था कि जितनी तेज़ मुस्कान इतना ही भीषण प्रहार!

सुना है मोदी जी ने कोई इंटरव्यू दिया है, जिसमें वे कह रहे हैं भारत का मुसलमान जियेगा भी देश के लिए और मरेगा भी देश के लिए.

क्या बात है मोदी जी, गज़ब, छप्पन इंच का सीना चाहिए इस झूठ को जीने के लिए. अगर सच में ऐसा होता ना तो आप भी एक आध बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनके ही रह गए होते. आज झंडेवाला के संघ कार्यालय के किसी कमरे में आराम कर रहे होते. सब कुछ इतना अच्छा होता जैसा आप गीत गा रहे हो तो, ना संघ की स्थापना होती, ना उसकी पल-पल देश को ज़रुरत पड़ती, ना हिंदुत्व का उदय होता, ना आप पिक्चर में आते.

वैसे गीत गाना बुरी बात नहीं है, अच्छा है प्रधानमंत्री की ज़ुबान से नकारात्मक बात निकलनी भी नहीं चाहिए. दो-पांच परसेंट देशभक्त मुसलमानों में ऐसे ही बिस्मिल के संदेशों से एक आध परसेंट की बढ़ोतरी हो जाए तो क्या बुरा.

खूब गीत गाओ जैसे मेरे सिंह सर गाते थे, पर हम ये भी महसूस करना चाहते हैं कि देशद्रोहियों, आतंकवादियों और उनके ‘बुद्धिजीवी’ समर्थकों के ऊपर आपकी स्केल चल रही है कि नहीं, डंडा बज रहा है की नहीं?

बात सिर्फ इतनी है कि सेक्युलर वाली हो या हिंदूवादी वाली, इस बकलोली से देश थक गया है. देश की ज़मीनी हकीकत आपको बताने की औकात नहीं है मोदी जी मेरी, सब समझते हो आप, आप पर ही विश्वास है.

आडवाणी का अवतार नहीं देखना चाहता देश आपके अंदर, ना ही कोई अतिवादी की तरह ‘ज़हरीला नेता’ पैदा होते देखना चाहता है. देश चाहता है कि देश को धोखा देने वालों का विनाश हो. आप दुनिया को दिखाने गीत गाओ, चाहे आरती उतारो या कोई और स्वांग करो we just don’t care!

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