इस्लाम पर महापुरुषों की राय

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर गुरुजी

पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता, उनकी हत्या, लूट दंगे, आगजनी, बलात्कार, आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है, ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा. पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है. पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है. दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनऊ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं. ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके.

अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं. सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हैं. यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगे.

– Bunch Of Thoughts पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर इस्लाम पर

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं. उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है.
मुसलमान अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते. वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं.
सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनावटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं.

– रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५, टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

लाला लाजपत राय इस्लाम पर

लाला लाजपत रायमुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है.
मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते. क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है?
हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा क्या हमें एक होने देगी? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान, मध्य एशिया अरब, मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें.

– पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५

समर्थ गुरु रामदासजी इस्लाम पर

समर्थ गुरू राम दास जी छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली.
मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे. मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया.

– डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८

राजा राममोहन राय मुसलमानों पर

राजा राममोहन राय कहते हैं – मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं. और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है.
इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए, उनका वध किया, लूटा व उन्हें गुलाम बनाया.

-वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

श्रीमति ऐनी बेसेन्ट मुसलामानों पर

मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं. हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मुसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे.
मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं, हमारी मातृभूमि के लिए नहीं. यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का.
स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा.

– कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५

स्वामी रामतीर्थ मुसलामानों पर

स्वामी रामतीर्थ अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत, अलगाववाद, पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है.
मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है. गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया.
लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया. उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया. उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया. क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है.

– भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ ३५-३६

महर्षि दयानन्द सरस्वती मुसलामानों पर

महर्षि दयानन्द सरस्वती इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं. जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती.
श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता, जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं. अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी व विषयासक्त मनुष्य थे, एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दूसरा और कोई नहीं.
इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया, न कि इसको बढ़ाने के लिए. सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है.

-सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

स्वामी विवेकानन्द मुस्लिम पर

ऐसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो. इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए. उसको मारना उस पर दया करना है.
जन्नत (जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है. इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है.

– कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३

गुरु नानकदेवजी मुस्लिम पर

मुसलमान सैय्यद, शेख, मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं. जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था.

– नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०

महर्षि अरविन्द मुस्लिम पर

हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता.
हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए. इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं. किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए. हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें.
हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है.

– ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

सरदार वल्लभभाई पटेल मुस्लिम पर

सरदार वल्लभ भाई पटेलमैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था. मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रही हैं. मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है.
मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए. मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया है वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं, क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी.
जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है.
वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो.

-संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर मुस्लिम पर

हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है. यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं.
साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा. विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी.
पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी?
मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है. मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है. कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है, इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है.
मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है. इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता. संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया. कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है.
गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है. इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं. धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते. मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती. वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते.

-प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

Source: Cited reference books

– संजीव श्रीवास्तव की फेसबुक वाल से साभार

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