क्या लाजवाब छक्के थे वो

आज से ठीक 10 साल पहले. तारीख थी 19 सितंबर 2007. किंग्समीड, डरबन, दक्षिण अफ्रीका का ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान. मौका था क्रिकेट के T 20 फॉरमेट का पहला विश्व कप. भारत और इंग्लैंड के बीच महत्वपूर्ण मैच. इस मैच में दिखा युवराज सिंह का असली जलवा. क्या बल्लेबाजी थी! क्या रोमांच था! छह गेंदों पर छह छक्कों का वो अनमोल रिकार्ड आज भी मेरे मानस पटल पर अंकित है. इतनी ख़ुशी, इतना रोमांच जिंदगी में बहुत कम बार हासिल होता है. आज वो रात्रि फिर से जीने की इच्छा बलवती हो उठी है.

आज भी ऐसा लगता है जैसे ये कल की ही बात हो जब इस जोशीले भारतीय बल्लेबाज़ ने डर्बन के किंग्समेड में एक ओवर में लगातार छः छक्के मारकर इतिहास रचा था और विपक्षी टीम सहित मुझ जैसे देखने वालों के होश उड़ा दिए थे.

मुझे याद है भारत 171/3 के स्कोर पर था और क्रीज़ पर 14 (6) रनों के साथ युवराज और 7 (6) रन बनाकर धोनी मौजूद थे. मैच का 19वां ओवर था जिसमें गेंद करने आये स्टुअर्ट ब्रॉड. ओवर की पहली गेंद एक अच्छी लेंग्थ पर डाली गयी थी जिसे युवराज ने डीप मिड विकेट पर लिफ्ट कर के ज़बरदस्त छक्के में तब्दील कर दिया गया. ब्रॉड की दूसरी गेंद पर युवराज ने बैकवर्ड स्क्वायर लेग के उपर से छक्का लगाया, तब युवा खिलाड़ी ब्रॉड दबाव में आ गए.

कप्तान कॉलिंगवुड के साथ बातचीत होने के बाद ब्रॉड ने तीसरी बॉल डाली. इस बार गेंद ऑफ स्टंप के बाहर थी जिस पर युवराज ने डीप एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से एक झनझनाता शॉट मारा और गेंद फिर सीधे बाउंड्री लाइन के पार यानी फिर छक्का. अगली गेंद डालने में ब्रॉड ने ज्यादा समय नहीं लिया. इस बार उन्होंने एक वाइड फुल टॉस डाला जिसे युवराज ने बड़े ही आसानी से छक्के में बदल दिया. चौथा छक्का.

अब पूरा किंग्समीड स्टेडियम और टेलीविजन पर मैच देख रहे करोड़ों दर्शक रोमांच मे डूब गए थे. सभी क्रिकेट का नया इतिहास रचता हुआ देखने के लिए तैयार हो गए. इस बीच इंग्लैंड टीम का थिंक टैंक यानी फ़्लिंटॉफ़, कॉलिंगवुड, ब्रॉड समेत लगभग टीम के सभी खिलाड़ी मैदान पर युवराज के आक्रामक प्रदर्शन को रोकने के उपायों पर विचार करने लगे. दुर्भाग्यवश, किसी के पास कोई सुझाव नहीं था. ब्रॉड ने ओवर की पांचवी गेंद डाली और युवराज ने उसे भी मिड विकेट पर से उड़ाकर बाउंड्री के पार भेज दिया. बाउंड्री पर तैनात डिमिट्री मैस्कारेन्हास महज़ दर्शक बनकर रह गए.

यहां मैंने मैस्कारेनहास का जिक्र इसलिए किया क्योंकि उस समय ऐसा लग रहा है था मानो इस मैच के ज़रिये युवराज कुछ समय पूर्व हुई नेटवेस्ट सीरीज के उस मैच का बदला ले रहे थे जिसमें मैस्कारेन्हास ने युवराज के लगातार पांच गेंदों पर पांच छक्के मारे थे.

लेकिन युवराज बदला लेने की इस प्रक्रिया में उनसे एक कदम आगे निकल गए. अब छठी गेंद थी. ब्रॉड मुस्कुरा रहे थे. युवराज ने अब एक कदम आगे रहने का मन बनाया हुआ था. हम सबकी सांसे भी थम गई थी. ब्रॉड ने फुल लेंथ गेंद डाली. पहली गेंद से कुछ छोटी पर फिर भी बल्ले की रेंज में. अद्भुत नजारा. युवराज ने इस बॉल को भी वाइड मिड ऑन के ऊपर से छह रन के लिए उड़ा दिया.

मैस्केरेंह्स के पांच छक्के भुलाए जा चुके थे. स्टुअर्ट ब्रॉड ज़मीन के फटने का इंतज़ार कर रहे थे. फ़्लिंटॉफ़ खुद को कोस रहे थे. “Six sixes in an over.” ये वह वाक्य था, जो चांद पर भी सुनाई दिया होगा. अब तक तमाम चीजें चांद से ही दिखाई देती, इस दफ़ा ऐसा हुआ था कि यह कारनामा और कमेंटेटर रवि शास्त्री की वो आवाज़ चांद पर सुनाई दी गयी होगी.

युवराज सिंह धोनी के पास पहुंचे और हंसते हुए उनके ग्लव्स पर वार किया और फ़्लिंटॉफ़ को संबोधित करते हुए कुछ सुविचार उचारे. स्कोर था युवराज 50 रन, 12 गेंदों में. टी-20 की सबसे तेज़ हाफ़ सेंचुरी. मेरी पलकें खुशी के मारे भीग चुकी थी. मन प्रफुल्लित था. युवराज जैसा कोई नही. शुक्रिया युवराज!!!

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