ध्यान ही जीवन : एक भी रुपया खर्च किये बिना कम कीजिये वज़न

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Ma Jivan Shaifaly

पहला भाग – 1 : वज़न कम करने का अंतिम उपाय

अब आगे…

मैंने अक्सर लोगों को ढेरों रुपये खर्च कर वज़न कम करने के लिए बड़े बड़े क्लब और gym में जाते देखा है. ऐसे लोगों के मन में एक अलग तरह का विश्वास और अपेक्षा घर कर जाती है कि हम इतने रुपये खर्च कर रहे हैं और क्लब इतना नामी गिरामी है तो अब उसकी ज़िम्मेदारी है कि वो शम, दम, भेद, दंड लगाकर आपका वज़न कम करके दिखाए. और फिर वो खुद की ज़िम्मेदारी के प्रति लापरवाह हो जाते हैं.

लेकिन इस उपाय में सबसे पहले ज़िम्मेदारी आपको खुद को उठानी है कि जितना भी वज़न कम होना है या हुआ है उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ आपकी मेहनत, लगन और संकल्प शक्ति का जादू है.

तो सबसे पहले आपको सुबह सूर्योदय के कुछ देर पहले उठना है.

आँख खुलते ही ईश्वर को धन्यवाद देना है कि उसने आपको एक नई सुबह देखने का सौभाग्य दिया.

फिर मुंह धोकर ऐसे स्थान पर आ जाइए जहां से सूर्य की पहली किरण आप पर पड़े.

पहले आँखें खोल कर कुछ पल को प्रकृति को निहारिये और उसे धन्यवाद दिजीये कि उसने आपको इतनी सुन्दर सुबह देखने के लिए आँखें दी.

सुबह की सुगंध को अनुभव करते हुए उसके साथ एकाकार हो जाइए और धीरे धीरे आँखें बंद कर लीजिये.

अब आँखें बंद रखकर अनुभव कीजिये कि आकाश में उगते सूर्य के साथ एक नया सूर्य आपके भीतर उग रहा है.

सांस लेते हुए ऊगते सूर्य की किरणों की ऊर्जा और ऊष्मा अपनी देह में प्रवेश करता अनुभव कीजिये. उस सांस को कुछ पल को अन्दर ही रखें, बिलकुल सहजता के साथ… जबरदस्ती नहीं करना है…

जब आप सांस को अंदर रोककर रखेंगे तो आपको अनुभव होगा कि सूर्य की ऊर्जा आपके रक्तवाहिनियों में रक्त के साथ घुलकर आपकी देह के एक एक अंग को प्रकाशमान कर रही है, नई ऊर्जा से भर रही है. आप अन्दर से ही नहीं बाहर से भी एक नए आभामंडल से खुद को घिरा पाएंगे, जो आपको दिन भर ऊर्जावान और आनंदित रखेगा.

अब सांस छोड़ने के साथ यह भाव लाना है कि आपके अन्दर जितनी भी नकारात्मकता है वो बाहर निकली सांस के साथ आपकी आत्मा से हमेशा के लिए विदा ले रही है.

पांच से दस बार इसे करना है और यहाँ कृतज्ञता का भाव और आनंद आना सबसे महत्वपूर्ण है. जिन लोगों को अस्तित्व के जादू पर विश्वास नहीं उन्हें प्रारम्भ में ये सब यांत्रिक लगेगा परन्तु आप देखेंगे कि दो चार दिनों में ही आप अस्तित्व के जादू को अनुभव करने लगेंगे. बस यह याद रखिये कि जो भी जादू हो रहा है आपके भाव के कारण है, हमारे अन्दर जो भी भावना आ रही है वही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है.

[सूर्य साधना की यह विधि मैंने आध्यात्मिक गुरु दिनेश कुमार जी से ग्रहण की है जिनके बारे में आप उनके नाम पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं]

लेख की पहली कड़ी में इतनी लम्बी चौड़ी भूमिका इसी भाव को उत्पन्न करने का प्रयास है. एक बात आप सभी लोग जानते होंगे कि हिन्दू जीवन शैली के अनुसार कर्मकाण्ड से अधिक उसको करते हुए आपके अंदर उपजी भावना, सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र और दैवीय शक्तियों का आह्वान महत्वपूर्ण है. और इसे हमारे ऋषि मुनियों ने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध भी किया है. लेकिन हमने अपनी अज्ञानता और स्वार्थ-सुविधा के कारण कर्मकाण्ड पकड़ लिए और उसके पीछे काम कर रहे भाव को तिरोहित कर दिया.

फिर लोग शिकायत करते हैं हम इतनी पूजा पाठ मंत्र जाप करते हैं फिर भी कोई फल नहीं मिलता. तो मैं आपको बता दूं मुझे ना कोई मंत्र आता है, ना मैं पूजा पाठ जानती हूँ. मंदिर जाती हूँ तो आसपास के लोगों को देखती हूँ… होठों के अन्दर से पता नहीं क्या बुदबुदाते रहते हैं… मैं मंदिर में मूरत को देखती हूँ और मुस्कुरा देती हूँ… और ऊर्जावान होकर लौट आती हूँ…

एक बार फिर आपको बता दूं यह भाव भी वज़न कम करने के उपायों से जुड़ा है. इसलिए ही कह रही हूँ… यहाँ एक भी बात मुख्य विषय से परे नहीं. तो आप यदि सुबह सूर्य साधना कर रहे हैं, तो आपका केवल सूर्य के सामने यंत्रवत बैठे रहना काम नहीं आयेगा, आपके अन्दर सकारात्मक भाव उपजना और उस भाव के फलस्वरूप आनंद अनुभव होना अपरिहार्य है.

अब सुबह किसी पारिवारिक कारणवश समय नहीं निकाल पा रहे, बच्चे को डरा धमका कर सोने को कहकर या परिवार के किसी अन्य सदस्य को परेशानी में छोड़ यदि आप सूर्य साधना कर रहे हैं, तो मैं बता दूं आप पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. आप दिन भर साधना में बैठे रहिये और आपकी वजह से दूसरे परेशानी उठाये तो आप पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. यहाँ पूरा खेल आपका अपने प्रति, दूसरों के प्रति नजरिया बदलने का है.

शुरू के आठ दिन सूर्य साधना के बाद आपको क्या करना है ये अगले भाग में पढ़िए. इसे इतना विस्तृत से इसीलिये लिखा गया है क्योंकि ये वास्तव में अंतिम उपाय है. इसके बाद कोई उपाय हमेशा के लिए आपका वज़न कम नहीं कर सकता. डायटिंग और व्यायाम से कर भी लिया तो दोबारा चर्बी चढ़ने में समय नहीं लगता. क्योंकि ये सब अस्थायी उपाय है. मैं जो आगे उपाय बताने जा रही हूँ वो उस अतिरिक्त वसा को आपके ह्रदय के हवनकुंड में हमेशा के लिए जला देगा. और आपकी आत्मा को ठीक उसी तरह पवित्र कर देगा जैसे हवन के बाद हमें घर में एक विशेष पवित्रता और दैवीय ऊर्जा का अनुभव होता है.

आखिर आपकी देह भी तो एक मंदिर ही है जिसमें आपकी आत्मा रूपी दैवीय शक्ति वास करती है. और कल से वैसे भी नवरात्रि प्रारम्भ हो रही है, इससे अच्छा शुभ मुहूर्त और क्या होगा. आप में से कई लोग व्रत भी रखते होंगे. तो आइये हम सब मिलकर व्रत के साथ सूर्य साधना प्रारम्भ करें और दैवीय शक्तियों से प्रार्थना करें कि वो हमारी देह के साथ आत्मा पर पड़े अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ को हटा दें.

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