आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं रोहिंग्या, म्यांमार पर करवाए हमले : सू ची

यंगून. म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची (Aung San Suu Kyi) ने मंगलवार पहली बार रोहिंग्या संकट (Rohingya People) पर बयान देते हुए कहा कि रोहिंग्‍या मुसलमान आतंकी वारदातों में शामिल हैं. रोहिंग्‍या मुसलमानों के विस्‍थापन के मुद्दे पर उन्‍होंने कहा कि रखाइन इलाके में सिर्फ मुसलमान ही नहीं रहते. उन्होंने कहा कि वह आलोचनाओं से नहीं डरती हैं. उन्होंने रखाइन पर चर्चा के लिए बांग्लादेश के गृहमंत्री को न्यौता भी दिया है.

सू ची ने कहा, रोहिंग्या समूहों ने म्यांमार पर हमले कराए. म्यांमार ने उन्हें संरक्षण दिया, लेकिन इसका नतीजा क्या निकला. जो लोग म्यांमार वापस आना चाहते हैं, उनके लिए रिफ्यूजी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

सू ची ने कहा कि वह जानती हैं कि पूरी दुनिया की नजरें फिलहाल रखाइन राज्य में जारी हिंसा के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन पर टिकी हुई हैं. लेकिन उन्होंने इस हिंसा के लिए पिछले साल भर में रोहिंग्या चरमपंथियों की तरफ से हो रहे हमलों को भी जिम्मेदार बताया.

सू ची ने यह भी साफ किया कि उन्हें लगातार बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव से डर नहीं लगता, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ता यहां आ सकते हैं. सू ची बोलीं कि वह राज्य की स्थिति को सुधारने के लिए एक स्थायी समाधान खोजने को प्रतिबद्ध हैं. सू ची ने देश के नाम अपने संबोधन में उन बेगुनाह लोगों के प्रति भी दुख जताया, जिन्हें अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा.

अपने संबोधन में सू ची ने कहा कि मुस्लिम चरमपंथी समूहों ने पुलिस चौकियों को अपना निशाना बनाया जिसके बाद भड़की हिंसा में लोगों के घर तक जला दिए गए. उन्होंने कहा कि ताजा हिंसा 25 अगस्त को भड़की जब पुलिस चौकी पर चरमपंथी रोहिंग्याओं ने हमले किए. इसलिए सरकार ने अराकन रोहिंग्या सैलवेशन आर्मी को आतंकी समूह घोषित कर दिया.

सू ची ने अपने 18 महीने की सत्ता की उपलब्धियों को गिनाया. उन्होंने आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन की भी निंदा की.

म्यामां में रोहिंग्या संकट पर अपनी पहली टिप्पणी में आंग सान सू ची ने कहा कि रखाइन प्रांत में फैले संघर्ष में जिन ‘तमाम लोगों’ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए ‘दिल से दुख’ महसूस कर रही हूं. सू ची ने अपनी टिप्पणी में यह भी उल्लेख किया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को हिंसा के जरिए देश से विस्थापित किया गया.

टीवी पर प्रसारित अपने संबोधन में सू ची ने ऐसे किसी भी ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ की निंदा की जिससे संकट में इजाफा हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘हम यह सुनकर चिंतित हैं कि अनेक मुस्लिमों ने पलायन कर बांग्लादेश में शरण ली है.’

सू ची ने कहा, हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना से नहीं डरते. हमारी सरकार सिर्फ 18 महीने से सत्ता में है. हम शांति की कोशिशें और मानवाधिकार उल्लंघन की निंदा कर रहे हैं. लेकिन आतंकी गतिविधियों से हम सख्ती से निपटेंगे.

उन्होंने कहा कि रखाइन स्टेट में शांति स्थापित करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है. इस क्षेत्र में शांति और विकास के लिए वे काम कर रही हैं. रोहिंग्यों ने हमारे ऊपर आरोप लगाए हैं. सभी आरोपों को सुनने के बाद दोषियों को सजा दी जाएगी.

सूची ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि म्यांमार एक ऐसा देश बने जो धर्म और जाति के आधार पर बंटे. जो लोग वापस आना चाहते हैं उनके लिए म्यांमार रेफ्यूजी वैरिफिकेशन प्रॉसेस शुरू करने के लिए तैयार है. हमें यह देखना होगा कि आखिर यह पलायन क्यों हो रहा है. मैं उन लोगों से बात करना चाहूंगी जो रखाइन छोड़कर बांग्लादेश भागे हैं.’

सू ची ने कहा, ‘हमने डॉक्टर कोफी अनान को एक कमिशन का नेतृत्व करने के लिए बुलाया ताकि रखाइन राज्य में लंबे समय से चली आ रही परेशानी को सुलझाया जा सके. आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. हम सबकी सुनेंगे. सभी आरोपियों को सजा मिलेगी फिर चाहे वे किसी भी धर्म से हों. हमने रखाइन राज्य में कानून व्यवस्था स्थापित करने और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्रीय समिति का गठन किया. राज्य में स्थायी तौर शांति स्थापित करना ही हमारा लक्ष्य है.

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