हिंदुत्व की पोल खोल, पितृमोक्ष अमावस विशेष

वैसे तो आप सब जानते ही हैं कि हिन्दू धर्म कुरीतियों पा पुलिंदा है, जैसे इंसान गलतियों का पुतला है. अगर गिनाने बैठूंगा तो पूरा दिन कम पड़ जायेगा. और तो और 2007 से तो हिन्दू आतंकवादी भी होने लगे थे. वही हिन्दू जो अहिंसा परमो धर्म कहते फिरते थे, बुराइयां और कुरीतियां तो पहले भी बहुत थी लेकिन अब पानी सर से ऊपर हो चला है.

अब आज की ही बात ले लीजिए. मैं सुबह-सुबह टहलने निकला, अभी घर से कुछ दूर ही पहुँचा था कि अचानक चारों तरफ से मुझे 5-6 लोगों ने घेर लिया, AK47, इंसास जैसी खतरनाक बंदूकें मेरे सीने और कनपटी पर लगा दी गयी. कुछ के हाथ में हथगोले भी थे.

अगर मैं ज़रा सी भी चूक कर देता तो आज यह लिखने के लिए ज़िन्दा ना होता, सभी ने धोती और जनेऊ पहन रखा था, मुझे समझते देर ना लगी कि यह सब के सब मनुवादी ब्राह्मण हैं. मैने पूछा, “भाईसाहब क्या चाहिए? जो चाहिए ले लो मुझे गोली मत मारना”, तो सब के सब एक स्वर में बोले, “अबे श्राद्ध नहीं करेगा अपने पुरखों का? चल अपने घर और श्राद्ध कर और हमें खिला उसके बाद बेशर्मी से 11 रूपए दक्षिणा भी देना.

देखिये भैया, जान पर बन आयी थी इसलिए चुपचाप उन्हें घर ले आया और हाथ पैर धुलवा कर वो सब खिलाया जो मेरे पूर्वजों को पसंद था. ऐसा ही मेरे साथ हर शिवरात्रि को भी होता है, मुझे AK47 से लैस पंडे घेर लेते हैं और कहते हैं, चल बे शिवजी पर दूध चढ़ा वर्ना तेरे भेजे में गोलियां उतार देंगे.

सुनो बे, ये जो आप सब पितृपक्ष में उल्टे सीधे मैसेज भेजते हो ना, कि पंडित जी ऐसे पंडित जी वैसे, तो तुम लोग वही हो जो पंडित जी से 3 घंटे पूजा करवाने के बाद एक थाली भोजन सरका देते हो और आखिर में खीसें निपोरते हुए बड़ी बेशर्मी से 11 रूपए उनके हाथ में धर देते हो.

पेट्रोल सिर्फ आपके लिए महँगा हुआ है, पंडित जी की गाड़ी तो हवा से फ्री में चलती है. ये वही लोग है जो 900 रूपए का पिज़्ज़ा खा कर 100 रूपए की टिप देते हैं लेकिन पंडित जी को 11 टिकाते हैं.

अबे अनपढ़ मज़दूर भी 500 धरा लेता है हाथ लगाने के, यहाँ आपको चाहिए कि पूरे शास्त्र, वेद, पुराण पंडित जी उंडेल दें वो भी बिना त्रुटि और अपन 11 में उन्हें टरका देंगे. अरे आपको नहीं बुलाना, मत बुलाओ. क्या पंडित जी ने AK47 रख दी थी सीने पर कि हमें बुला वरना गोली मार देंगे?

अपने अधंविश्वास के चलते पंडित जी को क्यों कोसते हो? किसने कहा है श्राद्ध करने को? क्यों करते हो पूजा, जब मन में इतना पाप भरा पड़ा है तो क्या खाक आपकी पूजा स्वीकार होगी? क्या खाक आपके पितरों को तर्पण होगा? हिन्दू धर्म के अनुसार भावना महत्वपूर्ण है.

हफ्ते के सातों दिन पंडितों को गाली देने वाले आज उनके पैर पखारने वाले हैं, उन्हें पकवान खिलाने वाले हैं, जानते हैं क्यों? क्योंकि उन्हें अपने पितरों को खुश करना है. क्यों खिलाते हो भाई?

आप कोई राष्ट्र या धर्म के लिए यह कार्य नहीं कर रहे हो बल्कि अपने परिवार अपनी भलाई और अपने डर के कारण ये सब कर रहे हो कि कहीं पितृ नाराज़ ना हो जाएं और आपकी गाढ़ी कमाई ना डूब जाए. कभी अपने बाप को इतने पकवान खिलाये थे? जो ज़िन्दा थे तब उनकी कद्र की नहीं अब अपने भय को पंडितों के सर फोड़ रहे हो.

और ऐसी ही बातें शिवरात्रि के समय भी देखने को मिलती हैं. अरे आप से कौन ज़बरदस्ती कर रहा है भाई? आपको नहीं करना मत करो, दूसरों को उल्टे सीधे मैसेज क्यों भेजते हो?

सही मायने में हिन्दू से गद्दार कौम मैंने आज तक नहीं देखी, हिन्दुओं से घटिया कोई और है ही नहीं जो इतने selfish होते हैं कि सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिए जीते हैं, ना ये समाज के लिए कुछ करते हैं, ना हिन्दू धर्म के लिए.

अरे सॉरी भाई, धर्म के लिए तो बहुत कुछ करते हैं, हर मिनट में धर्म को 2 बार गाली देते हैं, दुनिया को बताते फिरते हैं कि हिन्दू धर्म आडंबरों का पहाड़ है. अपने डर को हिन्दू धर्म पर आडंबर कह कर मत थोपो भाई, और जो डर के कारण ये सब करते हैं वे आज ही हिन्दू धर्म छोड़ दें.

जिन्हें इस धर्म में सच्ची श्रद्धा है इसके वेद पुराणों में श्रद्धा है केवल वही हिन्दू धर्म में रुकें. आप जैसे लोग ही कम्युनिस्टों का सॉफ्ट टारगेट होते हैं, वह आप जैसे मंदबुद्धियों को उल्टे सीधे लॉजिक दे कर कहते हैं, देखो तुम्हारा धर्म ऐसा है वैसा है, और आप वैशाखनंदन की तरह सर हिलाते हो.

सुबह सुबह बहुत क्लास ले ली, चलो रे बागड़ बिल्लों अब गाली दे कर अपनी-अपनी पहचान बताओ.

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