सात साल अंतरिक्ष में खोया रहा भारतीय गौरव

15 अगस्त 2003 को लाल किले की प्राचीर से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था ‘हमारा देश अब विज्ञान के क्षेत्र में लंबी उड़ान भरने के लिए तैयार है. मैं ये घोषणा करते हुए प्रसन्नता अनुभव कर रहा हूं कि 2008 में हम अपना पहला स्पेसक्राफ्ट ‘चन्द्रयान-1 चंद्रमा पर भेजने जा रहे हैं’.

अब इस घोषणा को यही छोड़कर 2017 में वापस आ जाते हैं. पिछले सात साल से चंद्रमा की ऊपरी सतह का नक्शा तैयार किया जा रहा था, उसमे नासा को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है. नक्शा बन जाने के बाद पता चला कि चन्द्रमा पर ‘भारी मात्रा’ में पानी मौजूद है. इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में ये पता लगा लिया गया था कि चन्द्रमा पर पानी है लेकिन कितनी मात्रा में है ये नहीं मालूम था और न ही नासा ये नक्शा बनाने में सक्षम था.

22 अक्टूबर 2008 को इसरो अटल जी की घोषणानुसार चन्द्रयान को अंतरिक्ष के लिए रवाना करता है. चन्द्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद चन्द्रयान एक साल तक चंद्रमा की निर्जन सतह की मिट्टी का अध्ययन करता है. इस स्टडी को नासा का ‘मून मिनरोलॉजी मैपर’ रिकार्ड करता है. इसके आधार पर पता चलता है कि चाँद की मिट्टी में ‘हाइड्रॉक्सिल’ की मौजूदगी है. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के तत्व. इस जानकारी के आधार पर नक्शा बनाया जाता है.

चन्द्रयान अपनी उपयोगिता शत-प्रतिशत सिद्ध करता है लेकिन 29 अगस्त 2009 को चन्द्रयान चंद्रमा के अंधकार में खो जाता है. इसरो इस घटना से निराश हो जाता है. समझ लिया जाता है कि पहला स्वनिर्मित भारतीय स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष की अतल गहराइयों में गुम हो चुका है.

सात साल बाद नासा की एक टीम हमारे चन्द्रयान को सही सलामत खोज निकालती है. 2016 में प्राप्त होने के बाद इस पर एक राडार लगा देती है ताकि ये पहुंच में रहे. वर्तमान में चन्द्रयान-1 चंद्रमा के 200 किमी के हिस्से की निगरानी खुशी से कर रहा है. अंतरिक्ष के क्षेत्र में आज जो व्यापारिक संभावनाएं हम देख पा रहे हैं, उनमे चन्द्रयान का बहुत बड़ा योगदान है.

14 सितंबर के बाद से टीवी चैनल और सोशल मीडिया बाबा, प्रद्युम्न और हनीप्रीत से आगे ही नहीं बढ़ सके. हमारी एक अंतरिक्षीय उपलब्धि को कोई सम्मान नहीं मिला. अटल जी का एक सपना पूरा हुआ लेकिन भाजपा समर्थकों को चन्द्रयान के बारे में कुछ मालूम ही नहीं था.

अटल जी का सपना जो सात साल अंतरिक्ष में खोया रहा. चंद्रमा के बारे में जानकारी देने का टॉस्क अद्भुत ढंग से पूरा किया. उस चन्द्रयान की अहमियत मेरे और आपसे ज्यादा नासा जान रहा है. आएं ‘इसरो के वैज्ञानिकों की इस अटल उपलब्धि’ को सराहें.

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