यहाँ तो दबे पड़े हैं कई सिकंदर

इंग्लैंड आया था तो मेरे पास नोकिया 1100 हुआ करता था. तब लोगों के हाथ में तरह तरह के फ़ोन देखे. उस समय भारत में उतने तरह के फ़ोन नहीं दिखा करते थे. तब फ़ोन पर इंटरनेट का लालच हुआ, एक स्मार्टफोन की सख्त जरूरत महसूस होने लगी. धर्मपत्नी ने एनीवर्सरी पर एक iphone खरीद कर देने की पेशकश की. वो iphone 4 का जमाना था. Iphone 4 नया नया आया था… सीने पर पत्थर रख कर खरीद लिया. बहुत खुशी मिली, बहुत इतराया…

भारत में एक सीनियर को एक मेल किया. मेल का विषय तो याद नहीं, पर मेल के आखिर में जुड़ जाता था sent from my iphone 4… उधर से मेल का जवाब आया… वॉव राजीव! इम्प्रेसिव!!!

यह तारीफ मेल की विषय वस्तु के बारे में नहीं थी… iphone 4 की थी… महीने दो महीने यह नए फ़ोन का सुख रहा. मैंने पत्नी से कहा – इसे मैं बीबी की तरह संभाल कर रखता हूँ…

फिर धीरे धीरे उसकी चमक जाने लगी… फ़ोन गिरने लगा, उसका शीशा टूटा, उसे कभी बाथरूम में भूल जाऊँ, कभी वर्क डेस्क पर छूट जाए, कभी कोई चेंजिंग रूम से लाकर लौटाए…

फिर भी वह फ़ोन 2016 तक चला. जब तक बाज़ार में iphone 7 आ गया था. आज वह फ़ोन मेरे कार के ग्लव कम्पार्टमेंट में पड़ा है, यूँ ही… डिस्चार्ज, निर्जीव, निस्तेज…

आज सुना है बाजार में iphone 8 आ गया है… उसके साथ ही किडनियां बेचकर iphone खरीदने के तमाम पुराने जोक फिर से बाजार में घूम रहे हैं… जिन्हें सुन सुन कर सबसे ज्यादा कोई हँसता तो मेरा iphone 4… साथ में हंसते हैं घर के एक कोने में पड़े glaxy note 2 और ipad.. जो वहीं पड़े हैं जहाँ है मेरा पुराना नोकिया 1100.

किसी ने एक बोध कथा सुनाई थी – जब सिकंदर की अपने भारत अभियान पर मलेरिया से मृत्यु हो गई तो उसकी माँ खूब रोई, खूब खूब रोई… रोती ही रहे… सिकंदर बेटा, वापस आ जा… सिकंदर बेटा, वापस आ जा…

तब सिकंदर के गुरु अरस्तू ने कहा – यहाँ वह नहीं मिलेगा… तू कब्रिस्तान में जा और उसे पुकार. तब उसकी माँ कब्रिस्तान में गई और उसने आवाज लगाई – सिकंदर बेटा, वापस आ जा!!!

और आवाज़ आई – तुम किस सिकंदर को बुला रही हो? यहाँ तो कई सिकंदर दबे पड़े हैं…

– मैं विश्व विजेता महान सिकंदर को बुला रही हूँ..

– यहाँ कई विश्वविजेता महान सिकंदर भी दबे पड़े हैं…

हम सभी अपनी अपनी नज़र में सिकंदर हैं… पर वक़्त है जो गुनगुनाता है…

कितने घायल हैं… कितने बिस्मिल हैं…
इस खुदाई में… एक तू क्या है… एक तू क्या है…
ऐ दिले नादान…

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