आओ ‘बालम ककड़ी’ खाएं मालवा की धरती पर

अभी बाज़ार में बालम ककड़ी आवक शुरू हो गई है. बहुत ही स्वादिष्ट और प्राकृतिक रूप में पनपने वाली यह ककड़ी अब देशभर में प्रसिद्ध हो गई है. इसका स्वाद हर कोई चखना चाहता है. हरे पीले मिश्रित रंग वाली बालम ककड़ी में प्रचुर मात्रा में पानी होता है.

बालम ककड़ी काटने पर अंदर से बिल्कुल केशरिया रंग की निकलती है. इसे ऐसे ही खायें या सब्जी, कोफ़्ते या खीर बनाकर खायें बड़ी मजेदार लगेगी…ज्यादातर लोग इसे यूं ही काटकर खाते हैं ।

इसकी और एक विशेषता है कि इसकी पैदावार सिर्फ़ धार जिले के मांडवगढ़, रतलाम जिले के सैलाना और झाबुआ जिले के थान्दला में ही होती है अन्य जगह यह पैदा नहीं होती और होती है तो फिर ये स्वाद नहीं होता.

बालम ककड़ी के बारे में कहा जाता है कि जैसे आगरे का पेठा आगरे में ही पनपता है वैसे ही यह भी सिर्फ़ इन्हीं दो -तीन जगह पैदा होती है. अनेक लोगों ने इसे दूसरी जगह उगाने की कोशीश की पर सफ़लता नहीं मिल पायी. बालम ककड़ी के एक नग का वजन लगभग डेढ़ दो किलो से ढाई तीन किलो तक का होता है…

मांडव गढ (धार) व थांदला ( झाबुआ ) की बालम ककडी थोडी सस्ती भी है यानि एक ककडी 30 से 50 रूपये में मिल जाती है वहीं सैलाना की 90 से 200 रूपये में मिलती है.

बालम ककड़ी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व पाये जाते हैं. यह कमजोरी दूर करके ताकत प्रदान करती है. और भी बहुत सारे गुण हैं जो शरीर और स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है.

यदि आप बालम ककड़ी का स्वाद लेना चाहते हैं तो पधारिये मालवा की इस धरती पर….।।

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