राहुल पीएम का सपना देखने लगे हैं! करें बच्चों के सपने पूरे, और करें मोदी सरकार की आलोचना

ऐसा नहीं है कि मोदी जी हमेशा अपने हर प्लान में सफल होते हैं. पिछले साल उनकी एक योजना बुरी तरह असफल रही. विश्व में तीन टॉप की रेटिंग एजेंसी हैं. मूडी, स्टैण्डर्ड एन्ड पुअर, फिच. ये कंपनियों के साथ राष्ट्रों की भी इन्वेस्टमेंट रेटिंग करती हैं. इसी रेटिंग के आधार पर राष्ट्रों को विदेशी कर्ज मिलने की ब्याज दर निर्धारित होती है. इसके अलावा उस देश के स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों में इसी रेटिंग के अनुसार विदेशी निवेश आता है.

अच्छी रेटिंग यानि की सस्ता कर्ज देश और उसकी कंपनियों को, स्टॉक एक्सचेंज में अच्छा विदेशी निवेश. क्योंकि बहुत से पेंशन फंड्स, डेब्ट फंड, नेशन सेंट्रिक म्युचअल फंड्स किसी भी देश में उसकी रेटिंग देख कर ही पैसे लगाते हैं.

भारत की आजादी के बाद से रेटिंग जंक स्टेटस की रही. जंक यानि सबसे नीचे. जहाँ इस रेटिंग का अर्थ है कि खतरा, निवेश न करने की सलाह. सन 2004 में अटल सरकार के सुधार, नरसिम्हा राव सरकार द्वारा इकॉनमी को ओपन करने के बाद मूडी ने रेटिंग बदली. BAA3. निवेश के लिए दी जाने वाली सबसे लोवेस्ट रेटिंग.

इसके बाद निवेश बढ़ा. कर्जे भी थोड़े और सस्ते हुए. लेकिन फिर मनमोहन जी की सदा पूजनीय सरकार आयी. दस साल रही. रेटिंग में सुधार के लिए कभी कोई प्रयास नहीं हुआ.

फिर 2014 में मोदी जी आये. कुछ किस्मत भी चमकी. पेट्रोल डीज़ल के अंतर्राष्ट्रीय दाम कम हुए. लेकिन भारत में आम जनता के लिए दाम पहले जैसे ही रहे. नतीजे में खजाना भरा. फिस्कल डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट कम हुआ. नियंत्रण में आया.

अगले दो सालों में इन्फ्लेशन भी कम हुआ. भारत का डेब्ट वर्सेस जीडीपी रेश्यो 80% से कम होकर 66% हो गया. स्टेज सेट थी. रेटिंग में सुधार के लिए. बढ़ी रेटिंग, बढ़ता विदेशी निवेश मोदी सरकार की योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण था.

लेकिन मूडी ने रेटिंग बढ़ाने से इंकार कर दिया. उसने कहा कि रेटिंग बढ़ाने के पर्याप्त कारण मौजूद नहीं हैं. बैंकों की हालात ख़राब है. उन पर 136 बिलियन डालर का बैड डेब्ट है. भारत कर्ज लेने के लिए उपयुक्त देश नहीं है.

ये मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका था. दो साल के वित्तीय अनुशासन, तमाम प्लानिंग और भविष्य की हार थी. इसके बाद मोदी सरकार ने जो किया वो अभूतपूर्व था. ऐसी कोई मिसाल अभी तक नहीं है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज़ स्वतंत्र होती हैं. इन पर किसी तरीके का दबाव नहीं डाला जा सकता. लेकिन भारत ने डाला. मूडी के ऑफिशियल्स को दिल्ली बुलाया गया, उनसे रेटिंग देने के पैरामीटर्स एक्सप्लेन करने को कहा गया.

मूडी ने जवाब दिया. दिल्ली आकर अपने पैमानों को प्रेजेंट किया. इसके बाद सरकार ने मूडी को घेरा. उसके दिए पैरामीटर्स पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि इन्ही पैरामीटर्स पर कितने ही देशो की रेटिंग भारत से बेहतर है.

सरकार ने इन पैरामीटर्स पर एतराज उठाये और सभी देशों को एक ही बेंचमार्क पर तौलने के तरीके पर एतराज प्रकट किया. ये साफ़ तौर पर आरोप था कि कहने को पैरामीटर्स सभी देशो के लिए समान हैं लेकिन नतीजा सभी देशो के लिए एक जैसा नहीं है.

27 अक्टूबर 2016 में वित्त मंत्रालय ने अपने अंतिम प्रयास में एक 6 पेज की चिट्ठी मूडी को भेजी. जिसमें तमाम सुधारों का हवाला दिया गया. दो साल की उपलब्धियां गिनाई और आने वाले समय में होने वाले सुधार, बढ़ता विदेशी निवेश, बताया गया.

लेकिन 16 नवम्बर 2016 को मूडी ने जारी बयान में भारत की रेटिंग BAA 3 बनाये रखी. मोदी सरकार असफल रही… बुरी तरह असफल…

मैंने जब ये छोटी सी खबर पढ़ी. तो मुझे सबसे पहले एक आम कहावत याद आयी. सारे नेता चोर होते हैं… पर क्या वाकई? देश के लिए चिंतन करने वाला, लीक से हटकर काम करने वाला कोई नहीं?

लोग पेट्रोल डीज़ल के बढे दाम पर सरकार की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन मुझसे नहीं होती. मेरे मन में मोदी सरकार के लिए अगाध श्रद्धा है. मैंने देश के लिए ऐसे प्रयास पहले कभी नहीं पढ़े, नहीं सुने. करप्शन के ढेरो किस्से पढ़े. देश को बर्बादी की तरफ ले जाते फैसले देखे. लेकिन ऐसी सरकार न देखी, जिसके लिए सिर्फ देश प्रथम है.

कुछ दिन पहले चाइना में ब्रिक्स (BRICS) देशो का सम्मलेन हुआ. बहुत सी ख़बरें, वक्तव्य आये. साझा बयान आया. पाकिस्तान के खिलाफ भी आया. और एक बेहद छोटी और मामूली खबर आयी… भारत ने BRICS क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बनाने का प्रस्ताव रखा.

इससे पहले BRICS समूह BRICS बैंक की स्थापना कर चुका है. जिसका उद्देश्य वर्ल्ड बैंक और IMF की देशो को दिए जाने वाले कर्जे की मोनोपली खत्म करना था. आज BRICS बैंक अपनी जड़े जमा चुका है.

मोदी जी का क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ओपन करने का प्रस्ताव मुझे बहुत बहुत भाया. तीन रेटिंग एजेंसी की मोनोपली टूटेगी. असफल रहे, गिरे, मुंह की खायी, लेकिन मोदी सरकार ने हार न मानी. लड़ाई खत्म नहीं हुई. पिक्चर बाकी है.

वैसे देश में बुलेट ट्रेन और डीज़ल पेट्रोल की पिक्चर चल रही है.

राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने लगे हैं.

आप सभी से अपील है, बच्चों के सपने पूरे कीजिये. मोदी सरकार की खूब आलोचना कीजिये.

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