हमारे असंतोष के स्वरों को अपने लिए अवसर न समझें आपिये, वामिये और कांग्रेसी

पिछले कुछ दिनों से संवाद का दायरा बढ़ा है. नए-नए मित्र बन रहे हैं. संयोग से इस दौरान मेरा टोन भी कुछ बदला है. विरोध और आलोचना का स्वर ज्यादा मुखर हो गया है. तो यह मोदी विरोधी टोन कुछ अलग तरह के लोगों को आकर्षित कर रही है. बहुत से आपिया मनोवृति के, वामी कुंठित लोग भी जुड़ रहे हैं, मोदी विरोध ही जिनका कुल वैचारिक आधार है. यह लेख मूलतः उन नए मित्रों की अपेक्षाओं को संबोधित है.

मित्रवर! मोदी से मेरा विरोध या मोदी की आलोचना का मेरा सिर्फ एक आयाम है कि मोदी ने ‘हिंदुओं के लिए’ क्या किया?

मैं यह नहीं कहता कि मोदी ने देश के लिए कुछ नहीं किया. मोदी की सरकार में किसी भी किस्म का कोई भी घोटाला शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुआ. जो देश 4 साल पहले एक फ्रॉड बहुरूपिये के साथ जंतर मंतर पर खड़ा भ्रष्टाचार मिटाने का जादू देख रहा था, उसमें बिना किसी मदारी के तमाशे के तीन वर्ष भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना कम बड़ी उपलब्धि नहीं है.

अगर सरकार टैक्स सिस्टम में बदलाव कर रही है और हर तरफ से टैक्स वसूल रही है, या पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें घटाने के पॉपुलिस्ट कदम नहीं उठा कर पैसे बना रही है तो भी वह पैसा चोरों के हाथ में तो नहीं जा रहा. मोदी खज़ाना भरने में लगा है… कहीं इटली और स्विट्जरलैंड तो नहीं पहुंचा रहा… और वह खज़ाना देश के ही काम आ रहा है. मोदी का कितना भी बड़ा आलोचक हो, मोदी पर बेईमानी का आरोप नहीं लगा सकता.

भारत की सैन्य शक्ति मजबूत हुई है इसमें भी शक नहीं. जो भारत, पाकिस्तान से ही उलझा रहता था, चीन उसके आगे झुक रहा है… भारत की यह सामरिक और राजनयिक शक्ति एक नई घटना है.

इंफ्रास्ट्रक्टर में बिजली और सड़क के क्षेत्र में बहुत काम हो रहा है, यह भी खुशी की बात है. इनमें से किसी भी विषय पर मोदी की आलोचना नहीं कर रहा.

मोदी सरकार की विफलताएं गिनाऊँ तो सबसे ज्यादा मरोड़ उन्हीं सेक्युलरों के पेट में उठेगा जो मोदी के सबसे बड़े शत्रु हैं…. मोदी उन्हें कुचलने में असफल रहे हैं. जो कहते थे कि मोदी जीतेगा तो वे देश छोड़ देंगे, वे आज भी इसी देश की सड़कों-गलियों में आजाद घूम रहे हैं… ज़हर उगल रहे हैं… उनमें से एक ने भी देश नहीं छोड़ा, जेल नहीं गया, खुदकुशी नहीं की…

शिक्षा, कला, मीडिया के क्षेत्र में देशद्रोहियों का कब्ज़ा वैसे ही बना हुआ है. उसे तोड़ने और देश के मानस को स्वतंत्र करने के प्रयास मोदी की प्राथमिकताओं में कहीं दिखाई नहीं दे रहे.

और सबसे बड़ी असफलता रही है… जिहादी शक्तियों के मनोबल को तोड़ने और उन्हें कुचलने में मोदी बिल्कुल असफल रहे हैं. मैंने हमेशा यह प्रश्न पूछा है – देश में कुछ करोड़ शत्रु शक्तियाँ हैं, उपद्रव और संगठित हिंसा जिनका हथियार है… अगर वे सड़क पर निकल आये और पूरे देश में उपद्रव मचा दें तो उनसे निबटने की क्या तैयारी है? क्या तैयारी करने के प्रयास हुए हैं? उन्हें शिक्षित करना, उनकी महिलाओं को अधिकार दिलाना, उन्हें मुख्यधारा में जोड़ना जैसे तरीके आप अपनाने की सोच रहे हैं… तो कृपया जाग जाएं…

मोदी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं… उनकी संवैधानिक मर्यादाएं हैं… उन्हें सबको साथ लेकर चलना है, सबका विकास करना है… टाइप की बकलोलियाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बचा कर रखिये… यह नीति निर्धारक तत्व नहीं हो सकते…

मोदी की संवैधानिक मर्यादाएँ यही कहती हैं कि वे देश की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं… राष्ट्रीय हितों और सनातन संस्कृति की सुरक्षा और संवर्धन ही उनका दायित्व है… यह जैसे संभव हो, वैसे किया जाए… इसके लिए जिसे नाराज़ करना हो, जिसे कुचलना हो, कुचलें… क्योंकि इनके बिना ना टैक्सेशन सफल होगा, ना बुलेट ट्रेन चल पाएगी.

यह देश हिंदुओं का है… इस देश पर हिंदुओं का स्वामित्व सुनिश्चित करना और हिन्दू हितों की रक्षा करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए…

जो मित्र इस आयाम पर मोदी से शिकायत रखते हैं, कृपया केवल वे ही स्वर मिलाएँ… बाकी रंगे सियार आपिये और कांग्रेसी हमारे असंतोष के स्वरों को अपने लिए अवसर न समझें.

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