धन की कीमत सीमित, पर समय है अनमोल

पैट्रोल की बढ़ती जा रही कीमत पर अब समस्त सोशल मीडिया चर्चा कर रहा है तो हम भी कब तक चुप रहें? हाँ, यह सत्य है कि सरकार पैट्रोल पर बहुत अधिक ड्यूटी / टैक्स वसूल करती है और यह भी सत्य है कि पैट्रोल का बढ़ता हुआ दाम चुभता है. पर ज़रा यह भी बताइए –

अभी कुछ ही महीने पूर्व पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सभी राष्ट्रवादी युद्ध के समर्थन में थे?
कुछ ही दिन पूर्व Doklam पर चीन के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में थे?
युद्ध के दिनों में महँगाई बढ़ती है यह तो जानते हो न?
अभी तो केवल पैट्रोल का दाम बढ़ा है, यदि सभी वस्तुओं के दाम बढ़ जाएँ तो? टाँय टाँय फिस्स?

रुकिए, मैं सरकार के समर्थन में नहीं बोल रहा हूँ. एक अन्य दृष्टिकोण से देखते हैं. दिन में कितनी गाड़ी चलाते हो? 50 किलोमीटर? 100 किलोमीटर? प्रतिदिन कितना पैट्रोल खर्च होता है? 2 लिटर? 5 लिटर? कितना खर्च बढ़ गया? 10 रुपए़? 20 रुपए?

रुकिए, रुकिए… अब आप यह सोच रहे होंगे कि पैट्रोल के दाम बढ़ने का असर आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर भी पड़ेगा अत: आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे… हाँ ठीक बात है, पर कितने अंशों में? पर बाबूजी हमारा दृष्टिकोण तो अभी आगे है… धैर्य रखिए…

2 लिटर पैट्रोल खर्च करने के लिए (कार से) 1 घंटा भी खर्च करना पड़ता है. समय भी महँगा हुआ है क्या? नहीं, हम भारतीयों का समय तो पहले भी सस्ता था, आज भी सस्ता है.

– एक चैनल देखते थे तब भी सस्ता था, आज 10 चैनल देखते हैं तब भी सस्ता है.
– मोबाइल नहीं थे तब भी सस्ता था, आज मोबाइल पर दिन के 2 घंटे बातचीत करते हैं तब भी सस्ता है.
– इंटरनेट फेसबुक यूट्यूब नहीं थे तब भी सस्ता था, आज इन पर दिन के 2-3 घंटे व्यतीत करते हैं तब भी सस्ता है.
समय महँगा नहीं हुआ उसे बचा कर क्या करेंगे?

भाई हम तो समय बचाने का सोचते हैं… हम तो यह सोचते हैं कि चाहे नौकरी करें या अपना काम, यात्रा कम से कम हो… 50-100 रुपए का पैट्रोल बचाने के लिए नहीं, दिन के 3-4 घंटे बचाने के लिए.

Money has limited value, TIME IS PRECIOUS! सोच बदलो, देश बदलेगा

अशोक सत्यमेव जयते The 4th Pillar

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