हम मनुष्यों ने ही तोड़ा है बेज़ुबान जीवों का भरोसा

अमूमन जब दो सांड़ आपस में लड़ते हैं तब खूनखच्चर होता ही है. एक दूसरे की जांघ पीठ में सींग भी मार देते हैं जिससे गहरा पर बारीक घाव हो जाता है. ऊपर दिए गए फोटो में दिख रहा सांड़ भी पिछले दो दिन से क्लीनिक के पास खाली प्लाट में पड़ा हुआ है. इसके गर्दन के पास घाव है जिससे बराबर खून बह रहा है. घाव इतना गहरा है कि खून रुकने का नाम नहीं ले रहा. रह-रह कर तेज रंभाता है मानो विलाप कर रहा हो. खाने को रोटियां भी डालीं पर उसने मुंह तक ना लगाया. यहां तक कि पानी की बाल्टी जो इसके पीने के लिये रखी वह भी लुढ़का दी.

अब इसके घाव की फोटो ज़ूम कर देखें, गर्दन के पास घाव है जो साफ मालूम दे रहा है कि किसी धारदार हथियार से कई तगड़े प्रहार करने पर ही हो सकता है. जानवरों की आपस की लड़ाई में ऐसे घाव आ ही नहीं सकते और ना ही खेत के रखवाले इतने निर्दयी होते हैं कि ताबड़तोड़ चाकू का प्रहार करते ही जायें और फिर भला सांड़ जैसे जानवर को बिना बांधे, बेबस करे, कौन माई का लाल चाकू चापड़ चला सकता है.

नि:संदेह यह सांड़ कसाइयों के चंगुल से छूट कर आया है. यूपी में गायों की सुरक्षा व चौकसी के चलते अवैध गोकशी बंद ही है पर बीफ खाने वालों को तो चाहिये वीफ ही, तो उनको इधर उधर घूमने बाले आवारा साड़ों को मार कर उनका मनपसंद भोज्य पदार्थ उपलब्ध कराया जा रहा है.

मार्केट के नेपाली चौकीदार ने बताया कि वह पहले जिस शहर में था वहां एक गैंग पकड़ा गया था जो रात में आवारा गायों आदि को गुंथे आटे में चालीस पचास नींद की गोलियां मिला कर खिला देता था और एक घंटे बाद जब जानवर सुस्त हो पड़ जाता उसे रस्सियों में बांध पिकअप पर चढ़ा ले भागते थे.

शायद ऐसा ही हादसा इस निरीह के साथ भी हुआ है. उसे बेहोश कर कत्लखाने तक ले जाया गया होगा पर गर्दन पर चाकुओं के चार-छह वार होते ही वह सचेत हो रस्सी तुड़ा उनके चंगुल से भाग निकला हो.

इस बेचारे का मनुष्य जात से इतना भरोसा टूट चुका है कि हमारी टीम के कई मैम्बरों ने इसके घाव पर लोशन व खून रोकने की दवा डालने की कोशिश की पर इसने भय या क्रोध में उनको पास ना फटकने दिया. हम मनुष्यों ने बेजुबान जीवों का भरोसा अपने आप से स्वयं ही तोड़ा है. हो सकता है एक-दो रोज में हम लोगों की गतिविधियां संदिग्ध ना मान कर आश्वत हो जाये, तब ही घाव पर दवा लगाई जा सकती है.

फिलहाल तो आप सब दुआ करें कि नंदी का खून बहना स्वत: ही रुक जाये व हम लोगों को उन कसाइयों का साथी समझना जल्द छोड़ दवा आदि लगाने दे.

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