‘मोलाराम’ से कुछ सीखें हॉलीवुड के महत्वहीन किरदारों के लिए बिछे जाते भारतीय कलाकार

इन दिनों जब अपने देश के कलाकारों को दस-दस मिनट के महत्वहीन किरदारों के लिए हॉलीवुड में धूनी रमाते देखता हूं तो अमरीश पुरी की बहुत याद आती है. अपनी शर्तों पर काम करने वाला स्वाभिमानी कलाकार. आज एक किस्सा पुरी साहब का, जब उन्होंने हॉलीवुड को नाक रगड़ने पर मजबूर कर दिया था.

ख्यात फ़िल्म निर्देशक स्टीवन स्पिलबर्ग अपनी ‘इंडियाना जोन्स’ सीरीज़ की नई फिल्म ‘टेम्पल ऑफ डूम’ की स्क्रिप्ट लिख रहे थे. फ़िल्म की पृष्ठभूमि हिमालय (भारत) थी इसलिए इसमें कुछ भारतीय किरदार भी रखे गए थे. इसके मुख्य खलनायक ‘मोलाराम’ के लिए स्पिलबर्ग को अमरीश बिल्कुल परफेक्ट लगे. उन्होंने हाल ही में रिचर्ड एटनबरो की विश्व विख्यात फ़िल्म ‘गांधी’ में अमरीश का काम देखा था और वे उनकी अदायगी के मुरीद हो गए थे.

फ़िल्म का स्क्रीनप्ले तैयार हुआ. ये 1984 में प्रदर्शित होने वाली थी. भारत में अमरीश को संदेशा भेजा गया कि अमेरिका आकर ऑडिशन दे दो. स्पिलबर्ग को भरोसा था कि इस किरदार के लिए अमरीश सिर के बल दौड़ते हुए अमेरिका चले आएंगे, लेकिन स्पिलबर्ग की आशाओं पर वज्रपात करते हुए अमरीश ने न केवल अमेरिका आने से इनकार कर दिया बल्कि फ़िल्म में काम करने से ही मना कर दिया. उन्होंने कहा ‘मैं अमेरिका क्यो आऊं, ज़रूरत आपको है मुझे नही’.

स्पिलबर्ग को अपने किरदार के लिए अमरीश पुरी किसी भी क़ीमत पर चाहिए थे. उन्होंने फिर संदेशा भेजा कि ऑडिशन की जरूरत नही, ऐसे ही आ जाओ. लेकिन अमरीश नही माने. इसके बाद स्पिलबर्ग ने गांधी फ़िल्म के निर्देशक रिचर्ड एटनबरो से बात कर एक सिफारिशी चिट्ठी लिखवाई, तब कहीं जाकर अमरीश ने हामी भरी.

1984 में प्रदर्शित हुई ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम” जबर्दस्त कामयाब रही. अमरीश पुरी को मुख्य नायक हैरिसन फोर्ड की टक्कर का किरदार दिया गया, जिसे उन्होंने यादगार बना दिया.

ये था एक महान भारतीय कलाकार का स्वाभिमान और ठसक. स्पिलबर्ग जैसे फ़िल्मकार को घुटनों पर ला दिया. आज चवन्नी किरदारों के लिए हॉलीवुड के रेड कॉरपेट पर बिछ जाने वाले कलाकार सबक ले सकते हैं कि ‘राष्ट्र का स्वाभिमान’ क्या होता है. अंत में उनकी फ़िल्म ‘परदेस’ के एक गीत की चंद पंक्तियां

‘लंदन देखा, पेरिस देखा
और देखा जापान,
माइकल देखा, एल्विस देखा
सब देखा मेरी जान,
सारे जग में कहीं नहीं है
दूसरा हिंदुस्तान’

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY