जा कहां रही है पेट्रोल से हो रही अतिरिक्त कमाई?

रोजाना औसतन 30 से 40 किलोमीटर कार चलाता हूं. लगभग 5-6 हज़ार रूपए प्रति माह का पेट्रोल खर्च होता है. यदि सरकार पेट्रोल के दाम 25 रू लीटर कम कर दे तो महीने में लगभग 16-17 सौ रूपए की बचत मुझे होगी. मोटरसाइकिल वाले के लिए यही बचत अधिकतम लगभग 500 रूपए प्रतिमाह होगी.

दामों में यह कमी होनी चाहिए. मैं भी इससे सहमत हूं. लेकिन सवाल यह है कि ये पैसा जा कहां रहा है? क्या किसी निजी कम्पनी को मुनाफा पहुंचाया जा रहा है? या यह पैसा सरकार के खजाने में जा रहा है? यदि सरकार के खजाने में जा रहा है तो उसका उपयोग क्या हो रहा है?

यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मुझे इस बात के लिए परेशान नहीं करते कि पेट्रोल की घटी हुई कीमत का शत प्रतिशत लाभ हमें क्यों नहीं दे रही सरकार.

इसका कारण जानने के लिए पहले यह जानना भी जरूरी है कि UPA के 10 वर्ष के शासनकाल में कोई रक्षा सौदा किया ही नहीं गया. नेवी एयरफोर्स के सैन्य अधिकारी आधुनिक लड़ाकू युद्धपोतों और वायुयानों के लिए गुहार ही लगाते रहे लेकिन उन्हें मिला कुछ नहीं. थलसेना के लिए नए अत्याधुनिक हथियार खरीदना तो दूर, उनके लिए अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट तक नहीं खरीदे गए UPA के 10 वर्ष के शासन में.

जबकि पिछले 3 वर्षों में ही लगभग 5 लाख करोड़ के रक्षा सौदे कर चुकी है भारत सरकार. अगले वर्ष तक मोर्चे पर तैनात हर सैनिक के पास अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट होगा. यह प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है.

यह पैसा कौन देगा? इसके दो जवाब हैं…

पहला कांग्रेसी शैली का जवाब कि इसका पैसा कोई नहीं देगा. हम भी मौज लें, तुम भी मौज लो… देश जाए भाड़ में.

दूसरा जवाब है कि यह पैसा सरकार भी देगी, हम भी देंगे…

यह केवल एक उदाहरण है रक्षा क्षेत्र का. कई अन्य ऐसे क्षेत्र हैं जो धन के लिए बुरी तरह तरस रहे थे, जिन्हें अब जाकर कुछ राहत मिली है.

और अंत मे एक और बात….

2014-15 तक एयरटेल के इंटरनेट का बिल प्रतिमाह 750 रूपए चुकाता था मैं, उस बिल में भी एक निश्चित सीमा तक डाटा ही उपलब्ध होता था.

वह पैसा निजी कम्पनियों की तिजोरी में जाता था. वह भी तब जबकि देश के खजाने से 2G सरीखे लूटकांड कर लाखों करोड़ लूट चुकी थीं वह कम्पनियां.

अब क्यों नहीं जा रहा? आज क्या स्थिति है?

उन्हीं कम्पनियों से लगभग 3 लाख करोड़ रूपए भी वसूल रही है सरकार, फिर भी वही कम्पनियां आज वही डेटा 150 और 200 में हमें बेच रहीं हैं जिसकी कीमत तीन साल पहले तक 750 रूपए वसूलती थीं.

कार वाले को तो शिकायत करनी ही नहीं चाहिए. लेकिन मोटरसाइकिल वाले को यदि 4-5 सौ रूपए का लाभ पेट्रोल में नहीं मिल रहा है तो मोबाइल और इंटरनेट में उसे क्या और कितनी छूट मिल रही है. कम से कम इतना आंकलन अवश्य करें.

यह तो सर्वविदित तथ्य है कि देश मे मोटरसाइकिल से अधिक मोबाइल इस्तेमाल करने वाले रहते हैं.

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