क़िस्मत की क़िताब का हर पन्ना इतना गोपनीय कि असंभव है उसको समय पूर्व पढ़ना

19 जनवरी 2014 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित भाजपा की नेशनल काउंसिल की बैठक में नरेन्द्र मोदी ने पहली बार अपने विज़न ऑफ इंडिया की विस्तृत रूपरेखा देश के समक्ष विस्तार से प्रस्तुत करते हुए, भाजपा के चुनावी प्रचार अभियान का औपचारिक श्रीगणेश किया था.

संयोग से उसी दिन देश भर से आये सोशल मीडिया के लगभग 40-50 चुनिंदा मित्रों की एक बैठक भी भाजपा मुख्यालय में हो रही थी. मैं भी उस बैठक में उपस्थित था. सभागार में क्योंकि टीवी नहीं था इसलिए नरेन्द्र मोदी का वह भाषण हममें से कोई भी मित्र सुन नहीं सका था.

उस दौरान आईटी सेल के मुखिया अरविंद गुप्ता के साथ लोगों का संवाद हो रहा था. तभी अचानक ही प्रशांत किशोर के साथ पीयूष गोयल ने सभागार में प्रवेश किया था. पीयूष गोयल की वह मुद्रा मैं कभी नहीं भूलूंगा. वह रामलीला मैदान से मोदी का भाषण सुनकर सीधे सभागार ही पहुंचे थे और मोदी के उस भाषण को सुनकर इतना उत्साहित थे कि किसी किशोर की भांति हर्षमिश्रित उत्तेजना से लगभग थरथरा रहे थे.

सभागार में घुसते ही प्रवेशद्वार से ही पीयूष गोयल ने हम लोगों को मोदी के भाषण की जानकारी देनी शुरू कर दी थी. उनके उस विवरण में था तो बहुत कुछ, लेकिन बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी से सम्बंधित नरेन्द्र मोदी के विज़न को लेकर पीयूष गोयल बहुत अधिक उत्साहित थे. उन्होंने कई बार बुलेट ट्रेन का जिक्र किया था.

बैठक के पश्चात जलपान के दौरान अनौपचारिक वार्तालाप में पीयूष गोयल और प्रशांत किशोर से मेरी संक्षिप्त वार्ता हुई थी. यूपी में लोकसभा चुनाव के परिणामों से सम्बंधित मेरा आंकलन मुझसे पूछने पर की गयी मेरी टिप्पणी पर पीयूष गोयल ने मेरी हथेली पर जोर से अपनी हथेली मारते हुए जिस तरह ठहाका लगाया था, वह मुद्रा एक आम आदमी या एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता की ही थी.

उस समय हम में से किसी मित्र ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि केवल तीन-साढ़े तीन साल बाद जब देश मे बुलेट ट्रेन की नींव रखी जाएगी तब यह आदमी देश के रेलमंत्री के रूप में भारत के प्रधानमंत्री और जापान के राष्ट्रपति के बगल में खड़ा होगा.

और केवल हम मित्रों ने ही नहीं, बल्कि उस दिन की पीयूष गोयल की भावभंगिमाएँ यह बता रही थीं कि स्वयं पीयूष गोयल ने भी उस दिन रामलीला मैदान में मोदी का भाषण सुनते समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस बुलेट ट्रेन का ज़िक्र नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं उसकी नींव का पत्थर जब रखा जाएगा तब देश का रेलमंत्री मैं होऊंगा.

बुलेट ट्रेन की नींव रखने के कार्यक्रम में पीयूष गोयल को देख अनुभव हुआ कि किस्मत की किताब का हर पन्ना कितना गोपनीय और रहस्यमय होता है. निर्धारित समय से पूर्व उसे पढ़ना असम्भव होता है.

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