ट्रांसपोर्ट क्रांति भाग-2

पिछले दिनों अमृतसर-सहरसा गरीब रथ की AC Chaircar में जालंधर से दिल्ली तक की यात्रा का मौका मिला. यहाँ पंजाब में यूपी-बिहार के आदमी को भैया कहते हैं. और यूपी-बिहार जाने वाली गाड़ी को भइयों की गाड़ी कहा जाता है.

पंजाबी भरसक जनसेवा, जननायक और Flying जैसी गाड़ियों में सफर नहीं करना चाहते. ये बदबूदार भइयों से भरी होती हैं. अब आपसे क्या छुपाना… सफर तो मैं भी नहीं करना चाहता. बड़ी विडंबना है…

[ट्रांसपोर्ट क्रांति भाग-1]

हम हिंदुस्तानी नस्ल भेद और रंग भेद के लिए अंग्रेजों को चाहे जितना गरिया लें, हम हिंदुस्तानियों से बड़ा रंग और नस्ल भेदी इस धरती पे कोई नही. दूसरे ये कि हमको मेहनतकश लोगों के पसीने से, उनके धूल धूसरित कपड़ों से बहुत बदबू आती है.

सो उस दिन हुआ ये कि गरीब रथ लुधियाना आ के ‘गंदे बदबूदार भइयों’ से ठसाठस भर गई. हम ठहरे Class Conscious लोग… Fogg का perfume और American Tourister और Samsonite का घिसटने वाला suitcase ले के चलने वाले लोग… हमारे डिब्बे में 25-50 बिहारी मज़दूर घुस आए, अ उन्ने अपनी गठरी मोटरी हमरे 4500 रुपैय्या के सूटकेस से सटा के रख दी.

हमको कौतूहल हुआ… सिर्फ chair car में ये हाल है क्या? AC sleeper में क्या हाल है, ये देखने के लिए मैने पूरी रेल का चक्कर लगाया. पूरी रेल में भइये भरे थे. मुझे पंजाबियों पे तरस आया. अब इन बेचारों का क्या होगा?

भइयों को समझ आ गया है कि sleeper में waiting का टिकट करा के शौचालय के पास बैठ के यात्रा करने से बेहतर है कि 500 रूपए अतिरिक्त खर्च AC में चला जाये.

दिल्ली में रोहिणी में जो societies बनी हैं, उनमें पंजाबियों की सोसाइटी में फ़्लैट 5 लाख रूपए महंगे हैं बजाय उनके जो बिहारियों की हैं… पंजाबी भरसक यूपी-बिहारियों के साथ नहीं रहना चाहते.

आज 2017 में बिहारी मज़दूरों ने AC 3 Tier में रिजर्वेशन करा के चलना शुरू कर दिया है. 2020 तक ये पूरा डिब्बा छेक लेंगे.

प्रभु 2024 तक पूरी भारतीय रेल को AC करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे थे. 2024 तक भारतीय रेल को आज का मेहनतकश भारत छेक लेगा. बाबू साहेब और मैडम जी लोग तेल फुलेल इत्र Deo लगा के बुलेट ट्रेन में चलेंगे.

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