नवाज़ के बाद पाकिस्तान को एक अदद पीएम की तलाश, और ये बनने के लिए तैयार भी

इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसकी कभी बेइज्जती न हुई हो. किसी की दोस्तों के बीच, तो किसी की स्कूल में, किसी की घर या रिश्तेदारों के बीच कभी न कभी बेइज्जती हो ही जाती है.

सार्वजनिक जीवन वालों राजनेताओं की राज्य या देश के स्तर पर भी बेइज्जती हो जाया करती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेइज्जती में महारथ हासिल तो सिर्फ काँग्रेस के नेताओं ने ही की हुई है. पुराने नेता देश की बेइज्जती ज्यादा और अपनी स्वयं की कम करवाते थे पर अब समय बदला है तो सोच भी बदली है.

कुछ समय पहले से ही विपक्ष के बड़े वाले नेता ने ज्ञान प्राप्ति शुरू की है… पहला अध्याय था उनका ‘विपक्ष किसे कहते हैं’? गुरुजी ने समझाया… “जो सरकार के उल्टा काम करे वो विपक्ष”.

नेताजी समझ गए कि विपक्ष का बड़ा नेता बनना है तो प्रधानमंत्री के ठीक उल्टा काम करना पड़ेगा. प्रधानमंत्री विदेश जाते हैं तो प्रशंसा करवा कर आते है… नवज्ञानी जी गए तो उनको उसका उल्टा ही करना था, बस करवा लिया.

प्रधानमंत्री विदेश में आतंकवाद और कश्मीर समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हैं… भावी प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी जी प्रधानमंत्री को ही जिम्मेदार ठहरा कर पाकिस्तान को क्लीन चिट दे आए.

नवाज़ शरीफ़ के जाने के बाद से पाकिस्तान को एक अदद प्रधानमंत्री की तलाश तो है ही, और अपने चिर-युवा बाबा प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार भी हैं. पाकिस्तान चाहे तो इनको ही अपना प्रधानमंत्री बना ले… भारत के खिलाफ हल्ला बोलते रहेंगे.

इससे पाकिस्तान और काँग्रेस दोनों को लाभ होगा… पाकिस्तान का पक्ष लेने और भारत सरकार को गरियाने से भारत के सारे मुसलमान काँग्रेस को ही वोट देंगे और पाकिस्तान को खानदानी प्रधानमंत्री मिल जाएगा.

इसके साथ ही मणिशंकर अय्यर को पाकिस्तान से रिक्वेस्ट भी नहीं करनी पड़ेगी और मनमोहन सिंह को कोई देहाती औरत भी नहीं बोलेगा. इस इंटरनेशनल बेइज्जती के तो फायदे ही फायदे हैं.

वैसे भारत में भी अभी जो हालात हैं उनसे काँग्रेस की सरकार बनने की 50-50 उम्मीद है. अगले प्रधानमंत्री के स्वागत में आलू की फैक्टरी लगाने की तैयारी मैंने तो शुरू कर दी है… अपनी आप जानें.

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