एक राजनीतिक व्यंग्य : बुलेटप्रूफ कांच

मोदी जी ने कहा, “चलो शिंज़ो रोड शो करते हैं”. शिंज़ो ने सवाल किया, “ये क्या होता है मोडी जी”. मोदी जी ने कहा, “बस भारत की 125 करोड़ जनता आपको देखना चाहती है”. अब शिंज़ो बोले, “ओके मोडी जी लेकिन इस कार में हम ऐसे खड़े नहीं होगा. कोई बुलेट वुलेट लग गयी तो. सुना है आपको बहुत लोग मारना चाहता है”.

अमित शाह, मोदी जी के कान में बोले, “मोटा भाई जाने दो इसे, किसी और को खड़ा कर देंगे. ये सब एक से तो दिखते हैं. अपने किरण रिजिजू भी चलेंगे”. मोदी जी चिरपरिचित मुस्कान में मुस्काये, “नहीं, अभी ओरिजिनल को ही भारत दर्शन कराने दो अमित”.

एक गहरा सा पॉज़, फिऱ शिंज़ो की ओर मुख़ातिब हो बोले मोदी जी, “शिंज़ो भाई ये कार चारों ओर से भारतीय टेक्नोलॉजी के बुलेट प्रूफ काँच से घिरी है”. शिंज़ो खड़े हो कर हाथ हिलाते हैं. कहीं कांच महसूस नहीं होता. अपने गोरे गालों को छूकर देखते हैं… हवा टकरा रही है.

मोदी जी तुरंत हाव भाव और असमंजस भांप लेते हैं, “शिंज़ो भाई इस महान भारतीय टेक्नोलॉजी की खोज प्राचीनकाल में ही नालंदा विश्वविद्यालय में कर ली गयी थी. अभी उसे परिष्कृत कर हमारे इसरो के वैज्ञानिकों ने आगे बढ़ाया है. इस कांच से हवा तो आ जा सकती है किंतु बुलेट भीतर नहीं आ सकती. यह कांच छूने पर महसूस नहीं होता किंतु हर वक्त सुरक्षा देता है”.

फिर शिंज़ो के कान में फुसफुसाते हैं, “मैं इसलिए तो जेहादियों से सुरक्षित हूँ अब तक”. शिंज़ो आश्वस्त हो जाते हैं. 5 किलोमीटर के रोड शो में खड़े होकर हाथ हिलाते जाते हैं. लोग मोदी-मोदी चिल्ला रहे हैं सड़क के दोनों ओर… मकानों, छतों, पेड़ों पर चढ़े.

मोदी जी के चेहरे पर मुस्कान है. बाजू में बैठे अमित शाह से कहते हैं…. देखते जाओ.

रोड शो पूरा होता है. शिंज़ो खुश हैं, वाक़ई मोदी सही थे उन्हें कोई गोली नहीं लगी थी. एक बार फिर हाथ को हिला बुलेट प्रूफ कांच को महसूस करते हैं. कुछ महसूस नहीं होने पर मोदी जी को तुस्सी ग्रेट हो, तोहफा क़ुबूल करो क़ी मुद्रा में अभिवादन करते हैं.

मोदी जी कहते हैं, “शिंज़ो, आप चाहें तो आप यह बुलेट प्रूफ काँच आपके देश के लिए हम दे सकते हैं. साथ ही टेक्नोलॉजी भी”. अमित शाह मुंह बंद कर हंसी दबा रहे हैं.

शिंज़ो तुरंत ये ऑफर लपक लेते हैं, “यस-यस मोडी जी, हम आपको बुलेट ट्रेन देगा आप हमको ये वाला बुलेट प्रूफ काँच दो”. डील पक्की हो ज़ाती है.

मोदी जी, अमित शाह से कहते हैं… “दिग्गी को कह देना एक और ट्वीट कर दे. कि मोदी ने एक और को …. बना दिया. बोलना एक और में देश और जोड़ ले”. मोदी जी, अमित शाह खिलखिला कर हंसते हैं.

2025 में भारत की पटरियों पर बुलेट प्रूफ ट्रेन दौड़ रही है. अमित शाह तेज़-तेज़ क़दमों से, और भी जवान मोदी के कमरे में पंहुचते हैं – “अरे वो लोग बुलेट प्रूफ कांच मांग रहे हैं”.

मोदी अपनी ठुड्डी पर हाथ रखते हैं, आँखें ऊपर कर सोच में डूब जाते हैं. फिर अमित शाह से कहते हैं… “कह दे वो तो जुमला था”. अमित शाह बुक्का फाड़ के हँसते-हँसते बैठ जाते हैं. फिर अपने पेट पर हाथ रख खड़े होते हैं और कहते हैं, “मोटा भाई, जापान है वो, ये तो ज़्यादा हो जायेगा”.

“अरे अमित, जब तुमने 15 लाख वाली बात बोली थी न कि वो तो जुमला था, तब मैंने भी यही सोचा था क़ि अब तो अपन गए. लेकिन देखो आज भी कुर्सी हमारी है. जा बोल दे जुमला था”.

“अरे नहीं मोटा भाई, कुछ और सोचो…”

“अच्छा एक काम कर, पटरी तो हमारी है न”?

“हाँ, वो तो है…”

“तो बोल, अपनी बुलेट ट्रेन ले जाएं लेकिन हमाई पटरी से न ले जाएं”.

अमित शाह एक बार फिर बुक्का फाड़ कर हँसते हैं. अमित शाह दरअसल जन्म से ही बुक्का फाड़ के हंसते थे, और दूसरों को बुक्का फाड़ के रुलाते थे. हंसी रुकी तो फिर कहा मोदी जी से, “मोटा भाई, कुछ और बताओ”.

मोदी जी ने कहा, “ठीक है, चल बोल उनको दे रहे हैं बुलेट प्रूफ कांच”.

अमित शाह – “मोटा भाई, पहले वो डेमोंस्ट्रेशन मांग रहे हैं”.

“अच्छा…”, मोदी जी फिऱ ठुड्डी पर हाथ रख लेते हैं. अमित शाह एक पोज़ क्लिक कर लेते हैं मोदी जी का.

जापानी डेलिगेशन को बुलेट प्रूफ कांच के डेमोंस्ट्रेशन के लिए बुलाया जाता है. मोदी जी के कहे अनुसार फिर से उन्हें एक खुली जीप में बिठाया जाता है. कांच पर हाथ फेर के देखते हैं वे… खुली जीप में कांच महसूस नहीं होता, हवा महसूस होती है. वे जापानी इस अदृश्य कांच से आश्वस्त हो जाते हैं. बस अब बुलेट प्रूफ है या नहीं यह देखना बचा होता है.

दूर से पूर्व ओलिंपिक मेडलिस्ट और 2025 के स्पोर्ट्स मिनिस्टर कर्नल (रि) राज्यवर्धन सिंह राठौड़ गन लिए आते दिखते हैं. जीप की ओर निशाना लगाते हैं. जापानी डेलीगेशन डरता है.

धायं की आवाज़ होती है, जीप पर कुछ निशान पड़ता है, कुछ धुआं.. लेकिन डेलिगेट्स को कुछ नहीं होता. अमित शाह, राज्यवर्धन की ओर जीत का निशान दिखाते हैं. लेकिन एक और मुश्किल आती है, डेलीगेशन कहता है, हम हमारी बुलेट चला कर देखेंगे.

अमित शाह समझाते हैं, यह कांच भारतीय बुलेट पर काम करता है. जापानी बुलेट आप दे जाएं, हम नए कांच बनाएंगे. इससे आसान यह है क़ि आप भारतीय बुलेट भी खरीद लें, भारतीय अदृश्य बुलेट प्रूफ कांच के साथ.

डेलिगेशन खुश हो जाता है और फिर से अभिवादन करता है तोहफा क़ुबूल वाला. जाते जाते मोदी जी से वे कहते हैं – “हमें टेक्नोलॉजी भी चाहिए”.

मोदी जी एक कोहनी मारते हैं अमित शाह के पेट पर, अमित गुदगुदी रोक कर कहते हैं, जापानी डेलिगेट से… “वो तो हमने एक जुमला दिया था…”

जापानी खुश हो जाते हैं क़ि अरे वाह कुछ नयी सी चीज़ इन्होंने दी थी. एक बार फिर अभिवादन करते हैं… तोहफा कबूल वाला…

अगले दिन मोदी जी भाषण में… भाइयों और बहनों, 150 करोड़ देश वासियों… हमने जो कहा वो कर दिखाया. बुलेट प्रूफ ट्रेन भारत की रफ़्तार बढ़ाने वाली ट्रेन है. इसे पाने हमने जो कठिन जतन किये, मैं उसमें नहीं जाना चाहता… किंतु अपने मित्र देश जापान को 150 करोड़ देशवासियों की ओर से धन्यवाद देना चाहता हूँ. उनका तोहफ़ा हमें क़ुबूल है.

मितरों
बस इतना बोलो…
क़ि
बुलेट ट्रेन भारत में चलना चैये कि नहीं चलना चैये…

आवाज़ कोरस में : चलना चैये चलना चैये…

तोहफा क़ुबूल करना चैये
कि नई करना चैये…

दर्शकों की आवाज़ कोरस में : क़ुबूल करना चैये, क़ुबूल करना चैये…

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