हिन्दू, हिंदी, हिन्दुस्तान, तीनों की स्थिति एक समान

घर में उपेक्षित और बाहर सम्मानित, यह स्थिति बन गई है हिन्दू, हिंदी, हिन्दुस्तान की. 50 करोड़ लोगों ने हिंदी बोल कर चौथे नंबर पर पहुँचा रखा है. 50 देशों में हिंदी पढ़ाई जा रही है और 500 से ज्यादा विदेशी संस्थान पढ़ा रहे हैं, परंतु देश के छोटे-छोटे गाँवों में इंग्लिश मीडियम स्कूल खुल रहे हैं.

डिजिटल दुनिया में भी हिंदी तेजी से पैर पसार रही है. आँकड़ो की मानें तो अंग्रेजी की तुलना में हिंदी की माँग पाँच गुणा ज्यादा तेज़ है. हम में से ज्यादातर लोग समझते होंगे कि हिंदी बोलने वाले लोग सिर्फ उत्तर भारत में ही रहते है.

निश्चित रूप से उन लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि विश्व के दस देशों में हिंदी भाषी रहते हैं. उनमें से कुछ देश तो ऐसे भी हैं जहाँ मोदी जी भी अभी तक नहीं गए हैं, जैसे गुयाना, त्रिनिदाद, टोबैगो, फिजी आदि.

डिजिटल मीडिया में 94 प्रतिशत की दर से हिंदी कन्टेन्ट की खपत बढ़ रही है. इसमें मेरा भी योगदान है हिंदी में पोस्ट लिख कर. वहीँ अंग्रेजी कन्टेन्ट की खपत सिर्फ 19 प्रतिशत ही बढ़ी है.

गाँव में जो अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने वाले हैं, वो भी गद्दारी करके हिंदी में ही पोस्ट लिख देते हैं. माँ-पापा के पैसे भी बर्बाद करा देते हैं और अंग्रेजी बेचारी भी पीछे रह जाती है.

हिंदी के सामने चुनौतियाँ भी बहुत है. गूगल के पास 95 प्रतिशत सामग्री अंग्रेजी में है, तब हिंदी की दौड़ इतनी तेज है. यदि 50 प्रतिशत सामग्री हिंदी में रहती तब क्या होता जरा सोचिए…

दक्षिण भारत में हिंदी बोलने वाले कम हैं पर यूट्यूब पर लगभग पूरा हिन्दुस्तान हिंदी को बढ़ाता है. 93 प्रतिशत भारतीय यूट्यूब पर हिंदी के वीडियो ही देखते हैं. एक लाख हिंदी के ब्लॉग हैं और 15 से ज्यादा हिंदी में सर्च इंजन भी हैं, पर वेबसाइटों के मामले में बहुत गरीबी है. सिर्फ 0.04 प्रतिशत वेबसाइट ही हिंदी में है.

डिजिटल मीडिया पर हिंदी को देख कर गर्व किया जा सकता है, पर एअरपोर्ट, फाइव स्टार होटल, तथाकथित बुद्धिजीवियों के समूह आदि में यदि आप हिंदी में बोलते हुए पाए जाते हैं तो अपने आपको अशिक्षित समझे जाने की जिम्मेदारी सिर्फ आपकी होगी.

इसका कारण यह है कि देश ने सर्वप्रथम जिन शिक्षितों को देखा था वो अंग्रेजी बोलते थे. ये बात अलग है कि कुछ विदेशी हिंदी बोल कर खुद को शिक्षित मानने लगते हैं।

खैर जो भी हो साल भर सोने वाली हिंदी की एक दिन चाँदी हो ही जाती है. तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी हिंदी अपनी अपनी जान-पहचान का दायरा बढ़ाते हुए सम्मान पाती रहेगी और हम लोग हिंदी प्रेमी एवम् हिंदी भाषी होने के लिए स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते रहेंगे. इस आशा के साथ सबको हिंदी दिवस की बधाई.

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