Ryan School-3 : हिन्दुस्तान है, बगैर लट्ठ तो रोज़ाना होंगे ऐसे कांड

सीबीएसई का फरमान आया है. स्कूल में ड्राईवर के साथ खलासी रखो, CCTV लगाओ, Low Floor, Automatic Hydraulic Door वाली बस ले आओ… पर फीस मत बढ़ाओ. अब स्कूल ने एक खलासी रख लिया 8000 रूपए में. वो सुबह 8 से 2 बजे तक फ्री है. उसका क्या करें?

सो उस से स्कूल काम लेता है, झाड़ू पोंछा लगवाता है, फूल पौधा पत्ती संवारता है… Toilets की सफाई करता है… अब आई समझ कि खलासी toilet में क्या कर रहा था? Police Verification और चरित्र प्रमाणपत्र कागज़ी बातें हैं… सिर्फ precaution है… character certificate जेब में ले के घूमता आदमी अपराध नहीं करेगा, ऐसा कौन बोला?

[Ryan School-1 : जितनी दिखती है, उससे ज़्यादा गंभीर है समस्या, पर क्या है हल]

आदमी पर कब काम सवार हो जाये और वो इंसान से हैवान बन जाये, कौन जानता है? आप मेरी या किसी और की गारंटी ले सकते हैं? Toilets में CCTV लगाओगे? CCTV के Monitor पे निगरानी कौन करेगा?

स्कूल कितने लोगों को किस-किस काम के लिए नियुक्त करे? उनकी तनख्वाह कहां से आएगी? अब एक नई पोस्ट आ गयी स्कूल में… चलो भैया एक सिक्योरिटी ऑफिसर रखो…

[Ryan School-2 : जितनी दिखती है उतनी भी आसान नहीं है समस्या]

हम एक बात के लिए सख्ती से मना करते हैं अभिभावकों को… सुबह 7:45 से पहले कोई बच्चा स्कूल में नहीं घुसेगा. फिर भी किसी न किसी माता-पिता की कोई न कोई मजबूरी आ ही जाती है कि वो 7 बजे ही बच्चा छोड़ गया.

अब उस बच्चे का क्या करें? सड़क पर रहने दें या गेट के अंदर ले लें? अगर अंदर ले लिया तो अब ये बच्चा… He or She is at great Risk… उसके साथ सुनसान स्कूल में कोई भी दुर्घटना या abuse हो सकता है.

ऐसे में parents स्कूल की समस्या को नहीं समझते. वो गेट पे ही बच्चा उतार के भुनभुनाते गरियाते चले जाते हैं… रोज़ाना ऐसे दो-चार बच्चे स्कूल में होते ही हैं… अब क्या करे मैनेजमेंट? एक जिम्मेवार व्यक्ति या टीचर की ड्यूटी सुबह 7 बजे ही लगा दी… अगवानी करो और संभालो भैया? ऐसे में सुनसान देख गाय ही खेत खा जाए तो?

हो गयी न सुरक्षा में चूक?

Parents से स्कूल का सिर्फ एक झगड़ा… फीस का… बहुत महंगा है स्कूल, स्कूल वाले लूटते हैं, they are minting Money, वो तो बैठे-बैठे नोट छाप रहे हैं… पर ऐसे जितने भी security concerns हैं, उनके हल खर्चीले हैं… पर फीस बढ़नी नहीं चाहिए.

सरकारी व्यवस्था में कक्षा 5 तक प्राइमरी स्कूल अलग, 6 से 8 मिडिल स्कूल अलग और 9-10 का हाई स्कूल अलग और 11-12 का इंटरमीडिएट कॉलेज अलग… बहुत हुआ तो कक्षा 9 से 12 कर लिया. इस CBSE में तो 3 बरस वाला play pan और नर्सरी से लेकर 12वीं तक का 20 साल का घोड़ा… सब एक ही कैम्पस में हैं….

रिस्क काहे नहीं होगा?

देखो जी… अपनी ज़िंदगी के 52 साल का एक ही अनुभव… स्कूल प्रिंसिपल बहुत खुर्राट आदमी मेरे जैसा, और उसके हाथ में बहुत मजबूत लट्ठ… मारे बेशक न, पर चले लट्ठ ले के… भैया मेरे, लट्ठ से तो भूत पिशाच तक डरते है, आदमी की तो औकात ही क्या?

पर ये आजकल के महंगे स्कूलों में नया चलन आया है, प्रिंसिपल से लेकर पूरा स्टाफ महिलाएं… वो भी खुर्राट नहीं… सुंदर, गोरी चिट्टी, प्यारी सी, cute सी… नर्सरी-केजी में तो चल जाती हैं ऐसी… पर +2 के स्कूल में जहां 2000 लड़के हों और 200 बंदों का स्टाफ हो, मेरे जैसा जल्लाद रखो…

माँ कसम, मैंने अपने 25 साल के करियर में जितने लड़के नहीं पीटे, उस से ज़्यादा तो अभिभावक पीटे, स्टाफ को गिरा के कूटा और ड्राईवर-खलासी तो कमरे में बंद करके मारे… बेशक मेरी बीबी से गवाही ले लो…

Ryan International School की प्रिंसिपल किसी को कूट लेगी ऐसे??? कोई मैनेजमेंट मेरे जैसे को बर्दाश्त कर लेगा? हिन्दोस्तान है… बगैर लट्ठ कोनी चाले काम… बगैर लट्ठ तो रोज़ाना Ryan होंगे.

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