Ryan School-2 : जितनी दिखती है उतनी भी आसान नहीं है समस्या

आज से कोई 15 साल पुरानी बात है. सत्य घटना. वाराणसी के एक बहुत बड़े शिक्षा माफिया जो अब भू माफिया भी बन चुका है, उसके बनारस में 10-15 स्कूल-कॉलेज चलते हैं. उसकी भगवानपुर मेन ब्रांच का छात्रावास अधीक्षक उस ज़माने में लगभग 2 करोड़ रु का गबन कर सपरिवार भाग गया.

स्कूल के छात्रावास में 470 बच्चे रहते-पढ़ते थे जिनकी सालाना फीस उन दिनों औसतन 70,000 रूपए थी. एक महीने तक वो फीस वसूल के घोटाला करता रहा और एक दिन भाग गया. स्कूल में हड़कंप मच गया. अभिभावकों ने जेब से पैसा दे दिया, छात्रावास अधीक्षक पर भरोसा करके, स्कूल में जमा नहीं हुआ… स्कूल बोला हम क्या जानें? रसीद दिखाओ? किसको दिए? क्यों दिए?

[Ryan School-1 : जितनी दिखती है, उससे ज़्यादा गंभीर है समस्या, पर क्या है हल]

स्कूल में जबरदस्त अफरा तफरी, असंतोष, अराजकता… दो शिफ्ट में चलने वाला स्कूल जिसमें 4000 बच्चे… छात्रावास में 470 बच्चे, 5 साल से लेकर 20 साल तक के, एक से बढ़ के एक बदमाश, हरामी, पर बेहद टैलेंटेड भी… मने हर किस्म के छात्र…

ऐसे में जब गदर मच गया तो न जाने कैसे खोज खाज के मैनेजमेंट हम दोनों मियाँ बीवी को ले आया… हमको छात्रावास अधीक्षक बना दिये, श्रीमतीजी को Girls Hostel में… हमको लाये थे सब मूलतः Fire Fighting के लिए…

किसी तरह स्थिति को कंट्रोल करो… मैनेजमेंट भयभीत, डरा हुआ… Hostel के लड़के सब बिना चरवाहे के बछड़े… मैनेजमेंट का निर्देश था कि लड़कों को कूट-छेत, मार पीट के कण्ट्रोल करो… मने आलम ये था कि मालकिन रोज़ाना शाम को पूछती थीं कि आज कितने लड़कों को कूटा!

इधर हम ठहरे जन्मजात लीडर… मदमस्त हाथी को भी पुचकार के बैठा देने वाले, 65 किलो की 17 साल के लड़के की तो औकात क्या?

एक महीने में हालात ये कि बच्चे सब हम दोनों पे फिदा… मने सब दीवाने… जो लड़के कल तक उत्पात मचाते, नंगा नाचते थे वो सब गाय जैसे सीधे… मने एक महीने में हम दोनों Pied Piper of Hamlin हो गए.

अब अपना अनुभव ये है कि जहां Hostel होगा वहाँ Child Abuse ज़रूर होगा और Child Abuse से बच्चे को बचाना हमारा पहला कर्तव्य… सो हम दोनों ने बड़े सुनियोजित तरीके से बच्चों की counselling शुरू की…

Bad Touch क्या होता है. इसे कैसे deal करना है. Abuse क्या होता है. Parents तुम्हारे सबसे बड़े दोस्त… अब यहाँ तो Mummy-Papa हैं नही, तो यहां तो हम ही लोग न तुम्हारे मम्मी पापा हैं. हमसे क्या छुपाना? We are here to help you…

पूरे 15 दिन लग गए बच्चों का भरोसा जीतने में, और फिर भैया, फटा जो बम… आने लगे बच्चे अपना अपना किस्सा ले के… घर, गाँव, परिवार, रिश्तेदार, मित्र, चाचा, मामा, नाना, नौकर, पापा-भैया के दोस्त, Room Mate, Friend, Staff… बच्चों के सैकड़ों cases निकल आये.

अब हमारे सामने समस्या… इस जानकारी का करें क्या? सबसे पहले तो Hostel के जो 3-4 लड़के, जो इस कुकृत्य में शामिल थे, उनको गिरा के कूटा… एक Medical Assistant शामिल था, उसके बारे में मैनेजमेंट को रिपोर्ट की…

अब मैनेजमेंट को काटो तो खून नहीं… अबे ये क्या खोद निकाला? क्या ज़रूरत थी? बच्चे के गांव घर में abuse हुआ, हम क्या करें? मैने पूछा, और जो स्कूल Hostel में हुआ उसका क्या?

Law of Omerta… Sicilian Mafia का सिद्धांत है… चुप रहो… मुंह मत खोलो… पर हमने तो जाने अनजाने ये सिद्धांत तोड़ दिया था.

उधर बदकिस्मती से मेरी counselling काम कर गयी… Mama Papa सबसे बड़े दोस्त होते हैं… इसे सच मान एक लड़की ने सारा किस्सा अपने पापा को सुना दिया… पापा ने जीप में Rifle दुनाली भरी और स्कूल में, साथ मे 10-20 parents और सीधा मेरे पास… मुझे तो उसने गले लगाया, thanks बोला… फिर पहुंचा मालिक के पास… मचा बमचक…

शाम को मालिक कहे, Brutus तुम हमसे गद्दारी किये? Parents को काहे बता दिए? हम बोले, नहीं मालिक हम बेवफा नहीं… लड़कियों ने खुद ही अपने बाप को बता दिया…

मामला दबा दिया गया. parents इज़्ज़त-मान के दबाव में आ गए. हमारी धर्मपत्नी ने विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया. मौका देख, दो महीने बाद मैनेजमेंट ने हमको निकाल दिया.

कल्पना कीजिये, उस समय किसी बच्चे के साथ कुछ हो जाता तो? जेल कौन जाता? हम ही दोनों न? समस्या इतनी भी आसान नहीं जितनी दिखती है.

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