Ryan School-1 : जितनी दिखती है, उससे ज़्यादा गंभीर है समस्या, पर क्या है हल

पिछले तीन दिन से मैं यहां जम्मू कश्मीर में हूँ. जम्मू रीजन के हिन्दू बहुल गांवों में कुछ परिवारों से और कश्मीरी पंडितों से मौका मिला पिछले तीन दिनों में. उसपे विस्तृत report बाद में लिखूंगा. इधर गुड़गाँव मने गुरु ग्राम के Ryan International School में दूसरी कक्षा के छात्र की स्कूल परिसर में ही हत्या हो गयी है. यूँ तो हत्यारा पकड़ लिया गया है पर सोशल मीडिया पे लोग नाराज हैं. लोगों को असली खुंदक हत्यारे से नहीं स्कूल से है, स्कूल मैनेजमेंट से है.

लोग दरअसल इन स्कूलों को स्कूल नहीं बल्कि Mint यानी नोट छापने की टकसाल मानते हैं. जाहिर सी बात है कि इन नोट छापने वाले स्कूलों से लोग-बाग हमेशा नाराज़ ही रहते हैं… प्रिंसिपल और मैनेजमेंट के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और स्कूल को बंद करने, स्कूल मैनेजमेंट को बेदखल/ बर्खास्त कर नई मैनेजमेंट से स्कूल चलवाने की मांग उठ रही है… कई महानुभाव तो स्कूल पे bulldozer चलाने तक का सुझाव दे रहे हैं.

पहली बात तो ये कि स्कूल में ऐसी घटना सीधे सीधे स्कूल के शीर्ष मैनेजमेंट के फेलियर का नतीजा है. पर आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि समस्या जितनी दिखती है उस से कहीं ज़्यादा विकराल और गहरी है. पहली बात तो ये कि कुकुरमुत्ते की माफ़िक़ देश भर में ये प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट अस्पताल आखिर उगे क्यों?

शिक्षा और स्वास्थ्य तो राज्य सरकार का विषय है न? तो आखिर शिक्षा/ स्वास्थ्य में सरकार फेल क्यों हुई? किसने फेल किया? हम ही लोगों ने फेल किया कि विदेश से आये थे लोग इसको फेल करने? जब सरकार और सरकारी व्यवस्था फेल होती है तभी प्राइवेट लोगों को सिर उठाने का मौका मिलता है.

सरकारी स्कूल फेल हुए तो जगह जगह प्राइवेट स्कूल खुले. सरकारी अस्पताल फेल हुए तो प्राइवेट अस्पताल खुले. बिजली व्यवस्था फेल हुई तो इन्वर्टर और जनरेटर इंडस्ट्री पल्लवित पुष्पित हुई.

अब एक प्राइवेट आदमी किसी बिजनस में कूदेगा तो क्यों? Ryan इंटरनेशनल जैसा स्कूल खोलने में कितनी पूंजी लगती है, जानते हैं? सुल्तानपुर लोधी जैसे कस्बे में भी 20 करोड़ का प्रोजेक्ट है. दिल्ली, गुड़गाँव, पुणे, बंगलूरू की बात ही क्या?

अब कोई आदमी 100 – 50 करोड़ लगा रहा, क्यों? वो पूंजी पति है. निवेश कर रहा है. उसको मुनाफा चाहिए. उसने तुम्हारे बेटे को पढ़ाने का ठेका नहीं लिया. उसको तुमसे और तुम्हारे बेटे से और उसकी पढ़ाई से कोई मतलब नही. वो एक व्यवसाय कर रहा है और उसको मुनाफ़ा चाहिए अपने निवेश पे. और तुम जाते क्यों हो उसके पास. सरकारी स्कूल में जाओ न?

एक-एक स्कूल को सरकार 20 – 30 लाख रु महीना दे के पाल रही है और बच्चे हैं कहीं 100, कहीं 150… सरकारी टीचर 80,000 पगार ले रहे पर बच्चा एक नहीं उनकी क्लास में… उनके पास क्यों नहीं जाते?

Ryan में तुम अपनी गरज से जाते हो, अपने Status Symbol के लिए जाते हो… तो फिर रोते क्यों हो कि बहुत महंगा है? ये Ryan तुमने पैदा किया… ये तुम्हारी हमारी इस समाज की नाजायज़ औलाद है.

आजकल सोशल मीडिया पे यूपी के एक सरकारी स्कूल के हेड मास्टर का एक आवेदन चल रहा है. वो आदमी एकदम अंगूठा टेक, अनपढ़ है और हेड मास्टर बना 65,000 रु सैलरी ले रहा है. किसने बनाया उसको हेड मास्टर? अकल लेस जादो ऐसे ही डेढ़ लाख शिक्षा मित्रों को टीचर बना के हमारे ऊपर थोप रहा था?

अब आइये, ज़रा Ryan जैसे pvt स्कूलों की मैनेजमेंट पे भी एक नज़र मार लें. ऐसे स्कूलों में 3 साल से ले के 17 – 18 – 20 साल तक के 2000 बच्चे (लड़के-लड़कियाँ) पढ़ते हैं. 100 से 150 लोगों का staff (Teacher, Non teaching, Helping, ड्राइवर, खलासी, माली, चौकीदार, Cook) होता है.

8-10 एकड़ में फैला, विशाल स्कूल campus, building, play grounds, parks, play pan, parking, toilets… किसी बड़े स्कूल में 100 ऐसे कोने, Corners, Spots होते हैं जहां बच्चे पे किसी किस्म का sexual assault हो सकता है.

एक बड़े स्कूल में किसी छोटे बच्चे को assault कर सकने वाले 1000 से ज़्यादा ‘Potential Rapist’, killers हो सकते हैं… 14-18 साल का लड़का जो दिन रात अपने Smart फोन में Blue Film और हिंसक games खेल रहा वो कब क्या करेगा?

जिस समाज में अब चरित्र संस्कार और ब्रह्मचर्य जैसी बातें obsolete हो चुकी, जहां स्कूल कॉलेज की लड़कियों को कंडोम इस्तेमाल करने की एडवाइज़री जारी हो, वहां आप 1000 adolescent बच्चों में किसकी किसकी guarantee लोगे, किस किस पे निगाह रखोगे? कितनी निगरानी करोगे? कौन करेगा?

ऊपर से तुर्रा ये कि हमारे जैसे खुर्राट teacher/ administrator को ये सख्त निर्देश कि किसी बदमाश लौंडे को मारना पीटना ताड़ना तो दूर आप डाँट या घूर भी नहीं सकते? दिन रात Blue Film देखने वाले, रईस माँ बाप की इकलौती बिगड़ैल औलाद वो भी दिल्ली गुड़गांव में… ऐसे लौंडों को कौन control करे? कैसे? आपने डाँट दिया और लौंडा तीन तल्ले से कूद गया तो कौन जिम्मेवार होगा?

Ryan में तो दोषी बस का खलासी निकला… वैसे वो कोई बड़ा लड़की, लड़का, Teacher, helper, स्टाफ कोई भी हो सकता है?

एक जमाना था कि स्कूल का प्रिंसिपल एक शिक्षाविद Educationist होता था जिसका एक मात्र काम स्कूल में पढ़ना-पढ़ाना होता था. प्रिंसिपल रोज़ाना कम से कम एक-दो पीरियड ज़रूर पढ़ाता था… उसके जिम्मे सिर्फ एक काम था… academics… स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता… आज Ryan जैसे किसी स्कूल का प्रिंसिपल पढ़ाई छोड़ HR, finance, Business डेवलपमेंट, transport मैनेजर, accounts और अब सबसे बड़ा Security अफसर और Intelligence officer मने खुफिया अधिकारी की भूमिका में हैं.

प्रिंसिपल को सिर्फ CBSE के लिए ही 127 file और register maintain करने होते हैं. इसके अलावा Distt. Education officer और स्थानीय प्रशासन पुलिस की कागज़ी खानापूर्ति अलग से… Academics गयी तेल लेने. समस्या जितनी दिखती है उससे कहीं ज़्यादा गंभीर विकराल है. हल क्या है?

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