बहुत जल्दी फिर लौटना है, माँ के साथ…

Ajit Singh in Jammu
Ajit Singh in Jammu

कल का दिन तीर्थ यात्रा सा रहा. 46 साल के बाद अखनूर और ज्योडियाँ जाना हुआ.

ज्योडियाँ भारत पाक border का एक सीमावर्ती गांव है जहां मेरे पिता जी 1971 की Indo Pak War में Posted थे. 71 में यहाँ एक भीषण युद्ध लड़ा गया था. एक स्थिति ये आ गयी थी कि पाकिस्तानी सेना भारत में 30 km तक अंदर घुस आयी थी. फिर अखनूर के पास sikh Regiment और Gorkha Regiment ने उन्हें रोका और वापस तवी पार खदेड़ के आये.

आम बोलचाल में इसे छम्ब Sector कहा जाता है. छम्ब दरअसल अखनूर तहसील का एक Block हुआ करता था जो अब पाकिस्तान में है पर इस क्षेत्र को आज भी छम्ब Sector ही कहा जाता है और ज्योडियाँ का नाम छम्ब ज्योडियाँ ही बुलाया जाता है.

तो, मेरे पिता जी 71 के war में यहीं ज्योडियाँ में posted थे. युद्ध जब समाप्त हो गया, तो सभी सैनिकों को तो बेचैन परिवारों से मिलने छुट्टी भेजना तो संभव न था. ऐसे में Battalion के कमांडिंग officer Col. अर्जुन देव खन्ना ने कहा कि आप सबको तो छुट्टी देना संभव नहीं है इसलिए आप अपने परिवारों को यहीं बुला लें.

फिर क्या था, पहुंच गए कोई 150 परिवार. एक बहुत बड़े मैदान में, Families के लिए Tent गाड़ दिए गए. मैं उस समय 6 साल का था. वो 2 महीने एक Picnic सरीखे थे. फौज की गाड़ी में Mess से खाना आता. हर तीसरे दिन कोई trip. कभी यहाँ picnic कभी वहाँ पार्टी. उन 2 महीनों में हम तमाम उन जगहों पे गए जहां भीषण युद्ध हुआ था. जगह जगह पाकिस्तानी फौज की तबाह गाड़ियां और Tank पड़े थे. मौत का भय हो तो आदमी थोड़ा ज्यादा धार्मिक हो ही जाता है. हर Sunday को Unit मंदिर में प्रोग्राम होता जहां पूरी फौज हिस्सा लेती. युद्ध के उन्माद में भी फौजी Basket ball और Hockey का Match लगा लेते हैं.

कल दोपहर मैं ज्योडियाँ स्थित ***ASC Battalion के gate पे जा पहुंचा. Bike गेट पे लगाई. Sentry को पूरी बात बताई. मेरे पिता यहाँ 71 में posted थे. उन्होंने अपने हवलदार को, उन्होंने Sr JCO को, उन्होंने सूबेदार मेजर साब को सूचित किया कि Ajit सिंह साहब आये हैं और ऐसा किस्सा सुना रहे हैं.

SM साहब ने Madam से बात की. मैडम मने Officer Commanding. मैडम ने कहा उनको वहीं बैठाइए, मैं आ रही हूँ. कुछ देर बाद Major जयश्री आयीं. उन्होंने मुझसे ढेर सारी बातें की. पिता जी के बारे में पूछा. फिर उस दौर की तमाम बातें बतायीं मैंने उन्हें. माहौल बड़ा Emotional हो गया. फिर उन्होंने अपने Commanding Officer से बात की.

Sorry Singh साहब, I hope you understand our Security Concerns. आज तो हम आपको allow नहीं कर पाएंगे, पर आप घर जा के अपने पिता जी का कोई एक Document और अपना कोई Id proof लगा के हमको पत्र लिखिए और हम Authorities से permission ले के आपको बाकायदा Invite करेंगे. We would love to have you as our Guests. Please Come with your Mother and Family.

उस regiment के गेट को छू के एक अजीब सा अहसास हुआ. ज्योडियाँ जो उन दिनों एक बहुत छोटा सा गांव होता था, जिसमे एक भी पक्का घर नहीं था, आज एक भरा पूरा आधुनिक कस्बा है. 46 साल बाद कहीं लौटना एक अजीब से अहसास से भर देता है आपको.

बहुत जल्दी फिर लौटना है, माँ के साथ…

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