सहानुभूति पाने में नाकाम गिरोह, कहीं ले ना आए और लाशें

गौरी लंकेश की मौत, जो एक हत्या है, ने एक अनाम को कई नाम दे दिये है. जब तक उसको गोलियों से भून कर मारा नहीं गया था तब तक उसे एक खास गिरोह के अलावा कोई नहीं जानता था. इस खास गिरोह में नक्सली, वामिये, क्रिप्टो ईसाई और कट्टर इस्लामिक शामिल हैं, जिनको कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी का राजनैतिक से लेकर व्यवहारिक समर्थन प्राप्त है.

यह अनाम, जीते जी जो नहीं प्राप्त कर सकी वह उसकी मौत ने इसको प्रदान कर दिया है. आज यह अनाम, पूरे भारत वर्ष में एक घृणित और विक्षिप्त व्यक्तित्व के रूप में नाम पा रही है. इसने जीते जी जो भी टुटपंजिया लिखा या शेयर किया था, वह एक बदबूदार सड़ी हुयी लाश की तरह सोशल मीडिया में हर गली हर चौराहे पर बजबजा रहा है.

गौरी लंकेश को यह भी गौरव हासिल है कि उसको मरे एक घण्टे भी नहीं हुये थे कि पूरा गिरोह, उसको महामंडित करने और उसके हत्यारों की शिनाख्त करने उतर पड़ा था. इस गिरोह के लोग अलग अलग दिशा से, एक ही तरह की बात, एक तरह की फोटो और उसकी हत्या का एक ही जिम्मेदार बताने के लिये कूद पड़े थे.

इन सबके निशाने पर है संघ, जो राष्ट्रवाद की अलख जगाये इन नर पिशाचों से भारत को मुक्त कर रहा है और इसका उत्तरदायित्व भी उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री मोदी पर लाद दिया है. इस गिरोह को कर्नाटक के मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछने है और न ही गौरी लंकेश के भाई द्वारा उठाये गए प्रश्नों पर कुछ कहना है क्योंकि उनको मालूम है कि यह हत्या क्यों हुई है.

इस गिरोह को मालूम है कि यह हत्या उनकी ही विचारधारा और राष्ट्रतोड़क नीतियों की इतिश्री है. उनका सबसे बड़ा डर भी यही है कि कही गलती से भी गौरी लंकेश की हत्या की डोर, उनके गिरोह और उनको संरक्षण देने वाली राजनैतिक पार्टी कांग्रेस तक न पहुंच जाए.

इसी डर से, गिरोह ने पत्रकारिता के दामन में लगी हुयी एक कलंकनी को महामंडित किया, अपनी राजनैतिक संरक्षक कांग्रेस से 21 तोपों की सलामी दिलवा कर कब्र में दफनाया और गौरी लंकेश की राष्ट्रतोड़क व हिन्दू विरोधी क्रियाकलापों पर प्रश्न करने वालों को अपने विरोध का निशाना बनाया है.

ये लोग यही पर नहीं रुके हैं, यह आज हाहाकार कर रहे हैं कि पूरे देश में राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं मन रहा है? वह पूछ रहे हैं कि एक पत्रकार, वह भी एक महिला की मौत पर भारत का एक बड़े वर्ग में जश्न क्यों है? हद तो यह हो गयी है कि जो शोक में नहीं है, उस पर जश्न का इल्ज़ाम लगा कर, मोदी सरकार को उसका जवाबदेह बना रहे हैं.

यह सब जो हुआ है, यह वामी इतिहास को देखते हुये कुछ भी नया नहीं है. वामपंथ ने अपने शैशव काल से ही इन्ही हथकंडों से यूरोप से लेकर शेष विश्व में अपने को स्थापित किया था. वामपंथियों के दौर में जब भी ठहराव या उनका ह्रास काल आया है तब उन्होंने गौरी लंकेश जैसे अपने साथियों की लाश बना कर उस पर खड़े होने की कोशिश की है.

भारत में जनता के सामने इन लोगों के इतने कुकर्म खुल कर आ चुके है कि इन्हें राष्ट्र के नैरेशन से ही ढकेल दिया गया है. इनके पास अब सिर्फ लाश-लाश का खेल खेलने का सहारा रह गया है. मैं समझता हूं गौरी लंकेश की हत्या अपवाद नहीं रहेगी. यह गिरोह अपने षडयंत्रो से वांछित सफलता न मिलने पर गैर भाजपा शासित राज्यों में 2-3 लाशें और लायेंगे. ये उसको टपका देंगे जिसकी उपयोगिता खत्म हो गयी है या वामी नक्सली गुटबन्दी में फंस गया हो या ईसाई हो या मुस्लिम हो या आदिवासी दलित. लाशों के लिए गिरोह का यही आग्रह होगा.

जनता से गौरी लंकेश की हत्या पर अपने लिये सहानभूति बटोरने की असफलता और राजनैतिक लाभ न मिलने की विक्षिप्तता इस गिरोह को 2-3 लाशों के बाद सड़क पर ले आयेगी. ये अराजकता करने उतरेंगे और संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती भी देंगे. यही इनका आखिरी हथियार होगा और यही इनके अंत का भी हथियार होगा.

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