आशा जन्मोत्सव : ग्लैमर के लिए ज़रूरी नहीं नग्नता!

कामुकता के लिया अश्लील हो जाने की कदापि आवश्यकता नहीं होती. जो मजा छिपा छिपा कर दिखाने में है वो शरीर को उघाड़ देने में नहीं. उघाड़ने के बाद तो कुछ छिपाने के लिए बचता ही नहीं.

पता नहीं ये छोटी सी बात भी आज के बॉलीवुडिया नचनिया क्यों नहीं जानते. आज, आशा जी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में हेलन जी के नृत्य, एक चैनल पर आज की पीढ़ी द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे थे, ऐसा लगा जिम्नास्टिक हो रहा है.

अरे मूर्खों, नृत्य एक कला है व्यायाम नहीं, और प्रेम प्रदर्शन के लिए नायक-नायिका का शरीर प्रदर्शन की जरूरत नहीं होती. भाव प्रकट करने के लिए आँखे ही काफी होती हैं और चेहरा तो नव रस का दर्पण बन सकता है, ऐसे में जब हेलन जी कैबरे करती थीं तो उनका रोम रोम नृत्य करता प्रतीत होता था जिसे देख कर दर्शक झूम उठता था.

जबकि आज के कलाकारों का डांस देख कर मुझे बीच में ही उठ कर चैनल बदलना पड़ा. अब ये मत कह देना कि आज की युवा पीढ़ी की तरह हमें रोमांस करना नहीं आता. हर पीढ़ी अपने समय के अनुसार प्रेम का आनंद लेती आयी है, हमारी संस्कृति में तो काम के भी देवता हुए हैं.

यहां कहने वाली बात ये है कि आशा जी के गाने सुन कर आज की पीढ़ी भी झूम जाती है, जबकि आज के कलाकारों के पास अपनी आने वाली पीढ़ियों को देने के लिए कुछ विशेष नहीं.

यकीन नहीं होता तो आशा जी का “दम मारो दम” सुन लो, बिना दम लगाए हुए ही नशा छाने लगता है. साक्षात सरस्वती का वरदान लता जी की छोटी बहन, महान गायिका आशा जी को उनके जन्मदिन की बधाई.

लता जी को मैंने यहाँ सिर्फ इसलिए याद किया क्योंकि उनके बिना मेरे लिए हिंदी सिनेमा का गायन अधूरा है. जब भी जीवन से प्यार करना होता है, आँख बंद कर उनके गीत सुन लेता हूँ.

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