भारत के न्यूज़ चैनलों का आभार, समझ आने लगा सही-गलत का फ़र्क

आज से 18-19 सालों पहले तक मेरी कोई विचारधारा पक्की नहीं थी. मुझे देश, समाज और राजनीति जैसी चीजों से ज़्यादा मतलब भी नहीं था. मेरा पूरा समय संगीत, साहित्य, फिल्मों और पुस्तकों के बीच गुज़रता था. मेरे लिए ज़िन्दगी का मतलब उतना ही था.

उसी दौरान एक-एक करके स्टार न्यूज़, एनडीटीवी इंडिया, आज तक जैसे कई मीडिया चैनलों की शुरुआत हुई. उससे पहले तक मुझे सिर्फ दूरदर्शन के समाचार ही मालूम थे. लेकिन इन नए चैनलों के आने के बाद पता चला कि एजेंडा का मतलब क्या होता है और उसे खबर जैसा बनाकर कैसे लोगों पर थोपा जाता है.

समाचार और पत्रकारिता के नाम पर कैसे दिन भर एकतरफा और झूठी खबरें दिखाई जाती हैं. कैसे गलत को सही और सही को गलत ठहराया जाता है. जब ये समझ आ गया, तो अहसास हुआ कि देश में हो क्या रहा है. जो बताया जा रहा है, सच्चाई उससे कितनी अलग है और जो एजेंडा चल रहा है, वो कितना भीषण है. उससे यह भी समझ आया कि देश के प्रति भी अपनी कुछ ज़िम्मेदारी होती है और वो पूरी करना सबसे पहला कर्तव्य है.

इन मीडिया चैनलों की मेहरबानी से जब यह समझ आने लगा कि गलत क्या है, तो फिर सही क्या है, ये पहचानना भी सरल हो गया. जब ये पता चल गया, तो फिर समझने में कोई दिक्कत नहीं हुई कि मुझे जीवन में करना क्या है.

अगर ये न पता चलता, तो मैं आज भी अधिकांश लोगों की तरह कन्फ्यूज़न या वैचारिक निद्रा में ही रहता और मेरी ज़िन्दगी इसी बात में सिमटी रहती कि शुक्रवार को कौन सी फ़िल्म रिलीज़ हो रही है, बॉलीवुड में क्या गॉसिप हो रहा है, पढ़ने लायक नई कहानी कौन सी है और शहर में कहां कौन सा बढ़िया ईवेंट होने वाला है, जहां समय बिताया जा सके. जीवन में मनोरंजन के अलावा कोई विचार ही न रहता.

हालांकि मनोरंजन की चीजें तो मैं आज भी करता हूं और संगीत, साहित्य, फिल्मों में अभी भी डूबता हूं; लेकिन देश में क्या हो रहा है, कौन क्या कर रहा है, क्या बोल रहा है, कौन सही है, कौन गलत है, इस सब पर भी ध्यान देता हूं और अपने स्तर पर उसमें सक्रिय भूमिका भी निभाता हूं. संक्षेप में, अब मैं देश के प्रति जागरुक रहता हूं.

इसलिए मैं भारतीय मीडिया चैनलों का बहुत आभारी हूं.

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