राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि की पात्रता बता दो, मुझे भी करवाना है

खबर है कि कल गौरी लंकेश पैट्रिक का जनाज़ा Caritas Internationalis नामक एक अंतराष्ट्रीय ईसाई मिशनरी संस्था ने बाकायदे एक event की तरह मैनेज किया. Caritas का मुख्यालय Vatican City में है. इसका संचालन 1897 से हो रहा है मने 120 साल पुरानी मिशनरी संस्था है. 200 से ज़्यादा देशों और territories में इनका network है.

बताया जाता है कि इस अकेली संस्था का सालाना बजट पाकिस्तान के सालाना बजट से भी ज़्यादा है. गौरी लंकेश पैट्रिक की हत्या के उपरान्त हुआ सारा तमाशा इसी Caritas द्वारा planned और प्रायोजित था.

ये भी बताया जा रहा है कि हत्या शाम 7 बजे के बाद हुई, पर सुबह तक ही पूरे प्रदेश और दिल्ली समेत देश भर में एक ही design के बहुत उच्च क्वालिटी के flex board और बैनर-पोस्टर बन के तैयार थे.

गौरी लंकेश पैट्रिक की लाश से अब सड़ांध उठने लगी है. गृह मंत्रालय को इस हत्या की जांच सिर्फ CBI नही बल्कि NIA से करानी चाहिए. गौरी लंकेश पैट्रिक का वध किसने किया, ये जांच का विषय है.

विवाद इस बात पर भी है कि मरते समय उसने क्या कहा? ‘हे राम’ कहा या ‘हाय राम’? दोनों में अंतर है. हे राम और हाय राम… वैसे वो लिबरल सेक्यूलर थी तो ‘या अल्लाह’, ‘Ohhh Jesus’ भी कहा हो सकता है.

जांच का दूसरा विषय ये है कि कितनी गोलियां कहां-कहां लगी? राजकीय सम्मान से जनाज़ा उठा है… ऐसे में किस स्थान पर गोली लगी इसका बहुत ज़्यादा महत्व है. फौजियों के बारे में गर्व से कहा जाता है कि सीने पर गोली खाई. पीठ पर गोली खाना फौज में बहुत बुरा माना जाता है. तो पता होना चाहिए कि हत्यारों ने गौरी लंकेश पैट्रिक को कहां गोली मारी. ये कहीं Hate Crime तो नहीं?

इससे पहले गौरी लंकेश पैट्रिक को कर्नाटक की कांग्रेसी सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया. किसी किस्म का कोई राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय शोक घोषित हुआ या नहीं, ये पता नहीं. कर्नाटक की सरकारी इमारतों पर झंडे झुके हुए हैं या पूरी शान से लहरा रहे हैं?

लगे हाथ कांग्रेस को ये भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि राजकीय सम्मान से Funeral किए जाने की पात्रता क्या है? क्या है protocol? गौरी लंकेश पैट्रिक को वो पात्रता कैसे हासिल हुई? ऐसी क्या उपलब्धियां थीं गौरी लंकेश पैट्रिक की, कि एक राज्य सरकार ने उसे राजकीय सम्मान दिया?

देश के बहुसंख्यक समाज को गरियाना? बहुसंख्यक समाज के धर्म को गरियाना? उनके प्रतीकों का अपमान करना? भारत के टुकड़े करने की मंशा रखने वालों का पोषण करना? देश के बहुसंख्यक समाज को चिढ़ाने के लिए चटखारे लेकर बीफ-गोमाँस खाने का आह्वाहन करना? इसके अलावा क्या पत्रकारीय उपलब्धि थी गौरी लंकेश पैट्रिक की?

उस दिन जब हम दिल्ली में 35A Documentary की स्क्रीनिंग में गए तो वक्ताओं का परिचय कराया गया. मुख्य वक्ता और जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल श्री जगमोहन के बारे में बताया गया कि उनके 700 से ज़्यादा लेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और journals में छप चुके हैं. दर्ज़न भर किताबें लिखी हैं.

गौरी लंकेश पैट्रिक की उपलब्धियां भी बताओ हमको… कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर्फ हिन्दू और हिंदुत्व को गरिया के ही राजकीय सम्मान हासिल कर लिया?

Comments

comments

loading...

1 COMMENT

LEAVE A REPLY