बेवजह खर्चों और दिखावा कम करने बंद होगी बिग फैट पंजाबी शादियां

बिग फैट पंजाबी शादियां देश में काफी मशहूर हैं. एक से एक बढ़िया इंतजाम जहां शोऑफ और पैसों का खेल दिखता है. लेकिन शायद अब यह इतिहास बन जाए क्योंकि दिल्ली और देश के बाकी राज्यों में बिग फैट वेडिंग को रिजेक्ट कर दिया गया है.

इस बात पर अकाल तख्त ने भी मुहर लगा दी है. इंटरनैशनल पंजाब फोरम ने मंगलवार को एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था. कई राज्यों से गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्षों ने हिस्सा लिया. इसमें सिखों और पंजाबियों की शादियों में बेवजह खर्चों के साथ-साथ कैसे दिखावा किया जाता है, इस पर चर्चा हुई. सुझाव दिया गया कि ऐसी शादियों पर रोक लगाई जानी चाहिए.

सिखों की सुप्रीम बॉडी अकाल तख्त और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (डीएसजीपीसी) को भी इस मामले में लिखा गया था. दोनों ने ऐसी शादियों को रोकने पर हामी भरी है. सिख लीडर्स ने कहा कि इसको लागू करने के लिए हम लोग बड़े लेवल पर कैंपेन चलाएंगे. सभी लोगों को जागरूक किया जाएगा.

डीएसजीपीसी के प्रेजिडेंट मनजीत सिंह जीके ने कहा कि मैं अपने बेटे की शादी में कोई फालतू खर्च नहीं करूंगा. न कार्ड प्रिंट होंगे, न सजावट होगी… सभी को इनवाइट मेसेज और मेल के जरिए भेजे जाएंगे. जीके ने बताया कि रकाबगंज गुरुद्वारे में बने लक्खी शाह वंजारा हॉल में बड़े लेवल पर शादियां होती हैं. अब से यहां जिसकी भी शादी होगी उसका मेन्यू डीएसजीपीसी तय करेगी.

शादी में कितने तरह की सब्जी बननी है, दाल बननी है और कौन सा मीठा रखा जाएगा इसका फैसला कमिटी लेगी. फोरम में उठी सभी जायज मांगों को मान लिया गया है. इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा कि शादियों पर होने वाले खर्च को कम से कम किया जाए. जीके ने कहा कि इससे एक बड़ी गंभीर समस्या दूर होगी. जो लड़कीवाले सिर्फ दिखावे के लिए बैंकों से लोन लेकर शादी करते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ेगा. शायद इस ट्रेंड को भी लोग फॉलो करेंगे. कई सालों से हम लोग रात में शादियां न करने की मुहिम चला रहे हैं. इसका असर भी देखने को मिल रहा है. सिखों की 90 पर्सेंट शादियां अब दिन में हो रही हैं.

फोरम के प्रेजिडेंट राजिंदर सिंह चड्डा ने बताया कि हाल ही में मेरी मां की मौत हुई. ट्रेंड होता है कि भोग वाले दिन बढ़िया खाना खिलाया जाता है लेकिन ऐसा नहीं किया गया. सिर्फ मट्ठी और चाय का इंतजाम किया गया. चड्डा ने कहा कि हम लोगों को फिजूल खर्चों पर लगाम लगाकर जरूरतमदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

अब शादी में ये सब नहीं होगा

अकाल तख्त ने फैसला लिया है कि अब पंजाबी शादियों में महंगे कार्ड्स प्रिंट नहीं होंगे. इसकी जगह Whatsapp, मैसेज और मेल के जरिए मेहमानों को Invitation भेजे जाएंगे. मिठाई के डिब्बे जो आजकल काफी ट्रेंड में हैं, उन पर रोक लगाई जाएगी. शादियां रात में नहीं बल्कि दिन में होंगी, ताकि लाइट्स और सजावट पर फालतू खर्च न हो. रिजॉर्ट्स, फार्महाउस और बड़े-बड़े बैंक्वेट हॉल्स में गुरु महाराज को नहीं ले जाया जाएगा.

ऊपर लिखी बातों को यदि हम सिंधी समाज के नजरिये से देखें तो सिंधी समाज भी कमोबेश इसी सामाजिक बुराई से जूझ रहा है. दिखावा, महंगी शादियां, अत्यधिक दारूबाजी, यह सब स्थिति एक सभ्य समाज के लिए बहुत ही बुरी है. पहल की आवाज समाज के अंदर से निकलनी चाहिए.
क्या सिंधी समाज तैयार है ???
क्या सिंधी समाज भी पहल करेगा ???

– वासुदेव कालरा जी की फेसबुक वाल से साभार

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