संदीप मदान श्रद्धांजलि : जवाहर कला केंद्र ने खो दी अपनी बची-खुची सौम्यता भी

देर रात जब लगभग नींद में चला गया था, तब एक मित्र का फोन आया. कहा, एक खबर सुनी है, संदीप मदान शायद नहीं रहे. सुनकर धक्का लगा. फेसबुक खोलकर खबर की सत्यता जानने का कोई मन नहीं हुआ. लगा, नींद में हूँ. दिल को बहलाया. सुबह उठूंगा तो शायद ये कोई सपना होगा और शाम को जवाहर कला केंद जाकर उनसे हंसी ठिठोली करते हुए ये सपना उन्हें ही बताऊंगा. सुबह हुई और ये खबर सपना नहीं, बुरी हकीकत बनकर सामने आई. दिल उदास है. विदा होना दुखदाई है. इससे बुरा कुछ भी नहीं होता.

जयपुर में दिन कहीं भी पर शाम जवाहर कला केंद्र में ही. कभी ये मेरे दावे हुआ करते थे जिस पर कायम न रह सका. पर जवाहर कला केंद्र जाओ और संदीप सर से मिलना न हो, ऐसा कम ही होता है. एक हफ्ते पहले ही जेकेके में मिलना हुआ था. तब किसे पता था कि अंतिम बार मिल रहे हैं.

कॉफी टेबल पर आगे होने वाले फेस्टिवल के बारे में बता रहे थे. यहां होने वाले हर फेस्टिवल में टिकटों की मारामारी वाले शो में संदीप सर को ही फोन करता था. वो अपने उसी चिर परिचित अंदाज में बोलते. शो से 15 मिनिट पहले मेरी टेबल से टिकट ले लेना. मैं जाता, वो होते तो अपनी प्यारी मुस्कान के साथ टिकट दे देते वरना उनकी सीट की एक फिक्स जगह से टिकट उठा लेता, अब ऐसी मनुहार और किसी से न कर पाऊंगा.

जेकेके में जब कभी नाटक का शो होता और हम सभी एक्टर विंग्स में नाटक की कॉस्ट्यूम पहने नाटक शुरू होने से पहले की शुरुआती टेंशन में होते और शो शुरू करने की घोषणा करने आप आते और अपनी उसी सौम्यता और मुस्कान के साथ थम्सप दिखा कर चले जाते.

सौम्यता का अपना जादू होता है. उसका असर मारक होता है. आप जीवन भर छल-प्रपंच, जोड़ तोड़ में लगे रहो, कामयाब हो जाओ पर आप किसी के मन में अपने लिए टीस पैदा नहीं कर पाओगे. आपकी अच्छाई और जीवन की सौम्यता ही आपके लिए टीस पैदा कर पाती है. ये टीस आज थिएटर से जुड़े राजस्थान के हर बन्दे को है. जेकेके में शो आगे भी होंगे पर संदीप सर की सौम्यता, उनकी मुस्कान और उनका थम्सप अब नहीं होगा.

संदीप सर, आपके साथ साथ जेकेके जाने का मेरा एक बहाना भी आज खत्म हो गया. नमन.

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