शिक्षक दिवस : गुरु तो शिक्षक होता है, पर बिरला ही कोई शिक्षक गुरु हो पाता है

हम ये गलती जानबूझकर कर रहे हैं या अनजाने में? देख रहा हूँ फेसबुक पर कि गुरु ये, गुरु वो… हद है यार, आज के दिन टीचर्स डे या शिक्षक दिवस मनाया जाता है. गुरु तो शिक्षक होता है पर बिरला ही कोई शिक्षक गुरु हो पाता है.

आज खूब मनाएं शिक्षक दिवस, गिफ्ट दें नौकरीपेशा और धंधेबाज़ (आदरणीय शिबन रैणा जी लिखते हैं ट्यूशनबाज़) शिक्षकों को, पर गुरु को इसमें न घसीटें.

अपने उत्साही भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत फेसबुक मित्रों की पोस्ट देखी, लिख रहे हैं – गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरुर देवो महेश्वर:, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवै नम:

ये गुरु वंदना किसी शिक्षक के लिए नहीं है. ये तो उस मुमुक्षु की वाणी है जो कहता है, ॐ असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माSमृतं गमय.

किस शिक्षक की औकात है जो ले जा सके असत्य से सत्य की ओर? उससे भी अहम् बात कोई जाना भी चाहता है सत्य की ओर.

आज के दौर में जब परीक्षाएं उत्तीर्ण नहीं की जातीं बल्कि एग्ज़ाम क्रैक किया जाता है, साधन कोई मायने नहीं रखते सिर्फ़ सफल होना जरूरी है, तो बेचारा शिक्षक क्या करे. उसे दोष नहीं, दोष किसी को भी नहीं, सिर्फ़ निवेदन इतना कि जो नौकरी करे वो नौकर, तो नौकर को गुरु के पद पर न बैठाइए, गुरु कुछ और ही होता है, जब किसी को मिल जाता है तो ही वो समझ पाता है.

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