दुर्लभ पोथियों का करना चाहिए पारायण

संस्कृत के पुराने आचार्यों से बात करने पर हम यह जानते है कि अधिक पुस्तकें नहीं पढ़ना चाहिए. पुराने आचार्य कहते थे हमने शिवपुराण, रघुवंश और ईशोपनिषद का परायण किया है, कोई कहता मैंने महाभारत पढ़ी है, आदि.
आज के समय की भाँति तब बहुत पढ़ने का आग्रह नहीं था.

जो महत्तम बात है तब एक ही पुस्तक का पुनः पुनः पाठ किया जाता था. जब हम किसी टेक्स्ट को कंठस्थ कर लेते है तब वह भिन्न भिन्न समय अलग अलग स्थितियों में हमारी स्मृति की सतह पर आता है, जिसके अनुभव से हम उसी टेक्स्ट पर उससे सुदीर्घ अर्थों का आरोपण करते है जिसे उठाकर भी वह टेक्स्ट सार्थवाही बना रहे.

भुवन में और हमारे मन में जो रचना जितने अधिक समय से है, जिस शब्द पर समय की जितनी धूल एकत्र हुई है उतना उसमें अर्थगौरव होता है और अनेक अन्य पदों से उसकी सम्बंधबहुलता.

दुर्लभ पोथियों का पारायण करना चाहिए ऐसा भी आचार्य बताते है क्योंकि बकरियाँ सरलता से लब्ध नीचे नीचे के पत्रतृणादि खाती है किंतु ऊँट आकाश में फले दुष्प्राप्य फल भक्षते हैं.

व्याकरण और कामशास्त्र अवश्य पढ़ने चाहिए क्योंकि सुपठितों और स्त्रियों को सदैव प्रसन्न रखना चाहिए. स्त्रियों के लिए व्याकरण पढ़े या कामशास्त्र और सुपठितों के लिए व्याकरण पढ़े या कामशास्त्र; इस विषय पर आचार्य मौन हैं.

जलाद्रक्षेत्तैलाद्रक्षेद्रक्षेच्छिथिलबन्धनात् |
मूर्खहस्ते न मां दद्यादिति वदति पुस्तकम् ||

‘मुझे जल से बचाना
तैल से मेरी रक्षा करना
और जिल्द से खुल जाने से
और मूर्ख के हाथों में मत देना’
पाण्डुलिपि ने कहा.

(यहाँ मूढ़ के अर्थ में मूर्ख लिखा गया है.) यह श्लोक संस्कृत पांडुलिपियों की इति पर अवश्य ही लिखा जाता है.

मूढ़ पढ़कर ज्ञानी नहीं होता और ज्ञानी लोभवश ही पुस्तकें माँगते है इसलिए पुस्तक किसी को नहीं देनी चाहिए. उसे बार बार जीवनभर पढ़ना चाहिए. स्वर्ण से पहले पुरातन पोथियों की रक्षा करन चाहिए. पुस्तक की चोरी नहीं करना चाहिए. पोथीमोचन को केवल अनपढ़ राजा ही दंडित करते हैं.

Incredible est quantum morae lectioni festinatione adiciatur.

(It is incredible how much delay in reading comes from undue haste.)

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अम्बर रंजना पाण्डेय दर्शन शास्त्र में स्नातक हैं. अम्बर पाण्डेय ने सिनेमा से सम्बंधित अध्ययन पुणे, मुंबई और न्यूयॉर्क में किया है. संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी और गुजराती भाषा के जानकार अम्बर ने इन सभी भाषाओं में कवितायें और कहानियाँ लिखी हैं. इसके अलावा इन्होंने फिल्मों के सभी पक्षों में गंभीर काम किया है. पंद्रह दिसंबर 1983 को जन्म. अतिथि शिक्षक के रूप में देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में अध्यापन कर चुके अम्बर इंदौर में रहते हैं.

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