वैम्पायर खत्म होंगे, सत्ययुग आएगा, सत्य का प्रकाश फैलेगा

कभी आपने हॉलीवुड की वैम्पायर फ़िल्में देखी हैं? उन्होंने हज़ारों फ़िल्में इस पर बनाई है. अगर उसने किसी का खून पी लिया तो वह भी खूनी-पिशाच में बदल जाता है. फिर साधारण आदमी का खून पी कर उसे वैम्पायर बनाने में लग जाता है. दोबारा वापस नॉर्मल आदमी बनते नही देखा गया है. बिल्कुल ही नहीं बनता. फिल्मों में उनका आखिरी हश्र यह होता है कि सूरज की रोशनी उन्हें जलाकर राख कर देती है.

तो भैया घर वापसी का हिसाब सूरज की रोशनी है. अन्य कोई दूसरा रास्ता नहीं है. हर तरह से इतिहास, भूगोल, मनोविज्ञान, चरित्र, फिजिक्स, संगठनात्मक रचना, ट्रेनिंग का तरीका अध्ययन कर डालिये, यही एक मात्र राह दिखेगी. एक दिन सत्य का प्रकाश हृदयों में फैलेगा और समस्त नर-पिशाच खत्म हो जाएंगे.

[प्रधानमंत्री न होते तो संन्यासी होते मोदी]

मैँने दुनिया भर के हजारों प्राचीन ग्रन्थ पढ़ डाले. नाम दूंगा तो लेख बोरिंग हो जाएगा. उन ग्रन्थों में ‘कलाप ग्राम, नाम गोपनीय, रहस्यमयी हिमालयी गांव’ का जिक्र है जिसमें 88 हजार ऋषि हैं तपस्या करते हुए. जिसने भी म. महोपाध्याय गोपीनाथ कविराज को पढ़ा होगा उसमें ज्ञानगंज नामक गाँव की चर्चा आई है जिसमें हजारो योगी गोपनीय रूप से रह रहे हैं.

पाल ब्रंटन भी किसी घाटी का जिक्र करता है. हिमालय के ‘संग्रीला घाटी’ के बारे में दुनिया भर के सभी एलीट की जिज्ञासा जगत-जाहिर है. तिब्बत की रहस्यमय पहाड़ियों के बारे में हज़ारों किताबें लिखी गई हैं. गोरख-ग्रन्थावली में भी ऐसे किसी हिमाई जगह का जिक्र है जो मानवीय दृष्टि से नहीं दिखता. फिलहाल आज विषय दूसरा है.

बहुत सारे ग्रन्थों में (भविष्य को लेकर) जो लिखा है उसका सार दे रहा हूँ ‘मन और इंद्रियों से जिसका ग्रहण हुआ है वह विकार (विकृत होने वाला प्राकृतिक तत्व) कहलाता है’.

पहचान लीजिए जिन जातियों/ नस्लों/ मजहबों की सोच, संस्कृति, विचार और जीवनशैली हमेशा दूसरों को दु:ख देने/ नष्ट करने/ अपने में मिला लेने पर आधारित है वह वैम्पायर (खून पीने वाली) कहलाती है.

लेकिन ‘जिसमें वेद, पुराण, विद्या, उपनिषद, श्लोक, सूत्र, भाष्य और अन्य परानुभूतियों वांग्मय’ में जो अभिव्यक्तियां होती हैं जो दूसरे के दर्द को महसूस करता हुआ उसे भी अपने तरीके की पूर्ण स्वतंत्रता देता है, जो इस समस्त लोक में व्याप्त समस्त चेतन-जड़ सब में एक ही तत्व को देखता है, उसे अपना समझता है वही रास्ता परमात्मा का है. वही सत्य है. जो न्याय से धन का उपार्जन करने वाला तत्व-ज्ञान में स्थिर, अतिथि प्रेमी, श्राद्धकर्ता तथा सत्यवादी है वह गृहस्थ मुक्त हो जाता है. हृदयाकाश में दीपक की भांति प्रकाशमान ब्रह्म का ध्यान करता है वही अमृतमार्गी है.

किंतु जो भी इस जगत में रहकर क्षण-क्षण, एक-एक मिनट इसी भौतिक लोक का चिंतन करता हुआ, दूसरे विचारों, व्यक्तियो-व्यक्तित्वों, समुदायों, समाजों, सम्प्रदायों, राष्ट्रों, जीवों को नष्ट करने का प्रयत्न करता है, एकाधिकार(कब्जा) जमाने का प्रयत्न करता है वही असुर है. उन असुरों (वैम्पायरों) को नष्ट हो जाना है, क्योंकि इस धरती पर केवल सत्य का वास ही रहेगा. सेमेटिक चिंतन असुर-चिंतन है, सेमेटिक जीवन शैली राक्षसी जीवन शैली है. उसको एक दिन नष्ट ही हो जाना है. भारत भूमि से निकली हुई चिंतन शैली और रुचियों का प्रसाद इस देश को, इस राष्ट्र को सदैव के लिए अजर अमर बना चुकी है.

तंत्र-शास्त्रों तथा अन्य कई प्राचीन ग्रन्थों में लिखा है ‘इस लोक में व्याप्त सभी धर्मों के प्रवर्तक कुल 88 हजार मुनियों-ऋषियोँ द्वारा बनाया गया है. वह इसी लोक में है, वही पुनरावृत्ति के बीच कारण माने गए हैं. वह लगातार नजर रखते है. वह सप्तर्षियों तथा नागवीथी के बीच के मार्ग से देवलोक में आते-जाते हैं. उतने ही अर्थात 88 हजार मुनि और भी हैं जो सब प्रकार के आरामों से, व्यसनों और आसक्तियों से रहित हैं वह भी इसी लोक में व्याप्त हैं. हिमालय में अदृश्य रहकर तपस्यारत है. वह तपस्या, ब्रह्मचर्य, त्याग और विद्या शक्ति के प्रभाव से कल्पपर्यंत भिन्न-भिन्न लोक-परलोक-देवलोक में निवास करते हैं.

हिमालय देवात्मा, हिमालय के माध्यम से सम्पूर्ण धरा पर दृष्टि रखते हैं. बहुत सारी चीजों/ घटनाओं पर वह पिछले एक युग से नजर रखे हुए हैं. जल्द ही उनकी शक्तियां भारत-भू में व्याप्त हो जाएंगी. जो भी ठग-कालनेमि इस समय भारतवर्ष में, दुनिया में अपने-अपने अवगुणों से आच्छादित कर रहे हैं उनका प्रभाव नष्ट हो जाएगा.

शुक्राचार्य का जो असुर-राक्षसी संस्कार/ विचार प्रभाव उत्पन्न हो गया है वह भी नष्ट हो जाएगा. दूसरे मार्गो/ जातियों/ जीवों को दुःख-दर्द देने वालों का नाश होगा. दूसरे को नष्ट करने वाले मार्गियों का खुद ही, अपने अंतर्विरोधों से ही समापन होगा यही परमात्मा का संदेश है. विश्वास करो यह मोदी भी पांच साल हिमालय के हैलँग घाटी में रह कर आया है. कुछ सीख/ जान समझ कर ही आया होगा. किसी न किसी की कृपा के साथ.

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